करो – करों(टेक्सों ) से मुक्त-विद्यावाचस्पति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन भोपाल

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एक बार एक मरीज़ बहुत बड़े और प्रसिद्ध डॉक्टर के यहाँ इलाज़ कराने गया .वह पुराने इलाज़ के कागज़ ,रिपोर्ट्स लेकर गया .डॉक्टर ने बहुत समय लगाकार कागजो का अध्ययन किया और झुझलाकर बोला की तुम्हे इतने सब डॉक्टरों के पास इलाज़ इलाज कराने की क्या जरुरत थी.?सब मूर्खों ने गलत ,सलत इलाज किया .मुझे यह समझ में नहीं आ रहा की तुम्हारा कौन सा इलाज़करे और तुमने इतनी अधिक दवाएं खाई हैं की अब कोई दवा नहीं बची हैं लिखने के लिए .मरीज़ बोला साहब ये सब छोडो मुझे मात्र सर दर्द हो रहा हैं .और हो सकता हैं की ये फाइल में अपनी पत्नी का ले आया हूँ धोखे से ! आप मेरा अभी का इलाज करो .
भारत वर्ष में वर्तमान में जो राजनैतिक उथल पुथल मची हुई हैं उसका मूल कारण सत्ताशीन होना .सब पार्टियां देश का शासन चलाना चाहती हैं पर कोई भी एक दूसरे साथ मिलकर सौहद्रायता पूर्वक विचार विमर्श नहीं करना चाहती ,जिस कारण आपसी कटुता बढ़ती हैं और जनता बीच में पिस रही हैं और सब पार्टियां जनता को मूर्ख बना रही हैं .आज देशवासियों के पास कोई सशक्त विकल्प नहीं हैं .एक सांप नाथ हैं तो दूसरे नाग नाथ हैं .सब विषधर नाग हैं .किसी भी पार्टी में नैतिकता ,चरित्र नहीं हैं .वैसे राजनीती में इन बातों का कोई स्थान नहीं होता हैं .कारण जो नेता होते हैं वे अधिकतर गुंडे ,लुच्चे ,लफंगे बदमाश ,अपराधी ही होते हैं और इन गुणों के कारण राजनीती में आना संभव नहीं हैं .जनता को मूर्ख बनाकर अपनी कुर्सी बचाना और अकूत धन संचय करना और स्वयं को ईमानदार घोषित करना और अन्यों को बेईमान बताना .
वर्तमान सरकार और प्रधान सेवक हमेशा पिछली सरकार का रोना हमेशा रोती रहती हैं की उन्होंने ये किया और ये नहीं किया .ठीक भी हैं जो जिस परिस्थिति में रहा उसने वो किया ,कारण जो भी निरयण लिए जाते हैं वे उस समय की तात्कालिक परिस्थियों के अनुरूप लिए जाते हैं बाद में उसका पोस्टमार्टम किया जाता हैं .आज इस बात पर विचार करे की गाँधी जी ने पाकिस्तान क्यों बनने दिया ?इस पर चिंतन करेंगे तो उससे क्या हासिल होने वाला हैं .जो हुआ हुआ .
क्या वर्तमान सरकार ने ७६ वर्ष का विकास मात्र ९ वर्ष से अधिक में किया .यानी पूर्व में कुछ नहीं हुआ .अरे भाई नीव के पत्थर कभी मीनार नहीं देखते .जैसे एक व्यक्ति ने पूछा मेने कई वर्षों से कर्फ्यू नहीं देखा ! इसका मतलब देश में या शहर में दंगा हो तब कर्फ्यू लगेगा तब उसको संतोष होगा .
इतना समय गुजारने के बाद भी आपको समय की कमी रही ,पूरा बहुमत ,पूरा सत्ता पर, पार्टी पर नियंत्रण और उसके बाद हताशा /निराशा /असफलता का रोना रोना यह प्रधान सेवक की सच्चाई तो नहीं दर्शा रही !.प्रधान सेवक ने देश के अंदर आर्थिक अराजकता पैदा कर दी .बिना कारण के कोई कार्य नहीं होता हैं .यदि देश में असंतोष हैं तो इसका मतलब कोई न कोई कारण हैं .आज देश का नागरिक हर वस्तु पर कर(टेक्स) दे रहा हैं .घर से बाहर या घर के अंदर बिजली ,पानी ,खाद्य सामग्री ,बात करने का मोबाइल .टेलीफोन ,टी वी ,इंटरनेट ,पेट्रोल .जो भी सामान ले रहा हैं क्या वह बिना टेक्स का हैं ,मनोरंजन ,कपडा ,होटल ,सड़क पर चलना ,कही अन्य शहर जाना तो टोल टेक्स . बताये हम कौन सी वस्तु बिना टेक्स के खरीद रहे हैं .जनता का पैसा दिन रात टेक्स में जा रहा हैं और टेक्स की कोई सीमा नहीं .इसलिए टेक्स चोरी होती हैं .शासन का सञ्चालन अर्थ संग्रह की अपेक्षा करता हैं ,इसलिए राजा प्रजा से कर यानी टेक्स लिया करता हैं
पयस्विनया यथा क्षीरम अद्रोहेनोपजीव्यते!
प्रजापयेवं धनं दोहया नातिपीड़ा करैः करैः !!
जिस प्रकार दूध देने वाली गाय से उसे बिना किसी प्रकार की पीड़ा पहुचाये दूध दुहा जाता हैं ,उसी प्रकार राजा को भी प्रजा से धन लेना चाहिए .अति पीड़ाकारी करों के द्वारा धन संग्रह नहीं करना चाहिए .पर आज इतना अधिक कर बसूला जा रहा हैं की जनता त्राहिमाम कर रही हैं .यहाँ तक जब राजा को प्रचुर धन राशि की लालसा हो तो राष्ट्र की हानि निश्चित होती हैं —
समुद्रस्य पिपासायां कुतो जगति जलानि?
जब समुद्र ही प्यासा हो जाय तो उस अनंत जलराशि को पूर्ण करने के लिए संसार में और कहाँ जल प्राप्त हो सकते हैं ?उसी प्रकार राजा भी यदि प्रचुर धन राशि की लालसा रखता हो अर्थात उपयुक्त छठे भाग सभी अधिक कर लेने की लालसा प्रजा से रखता हो ,तो फिर राष्ट्र की सम्पत्ति किस तरह रह सकती हैं .शुक्र ने भी इसी बात की पुष्टि की हैं —
षड्भागा भ्यागभ्यअधिको दण्डो यस्य राज्ञःप्रतुष्ट्ये !
तस्य राष्ट्रं क्षयं याति राजयं च तदनन्तरं !!
आज राजनेता स्वयं का धन अपनी सुख सुविधाओं में खरच करे तब समझ में आये .आज तो प्रधान सेवक जनता के सेवक हैं और उनकी सुरक्षा में करोड़ों रूपया खर्च होते हैं ,पेट्रोल, सुरक्षा व्यवस्था में किसके धन सी .जनता की खून पसीने की कमाई सी और उसका बोझ हम पर यह कहाँ की नीति हैं ./सत्ता च्युत होने पर फिर दर दर की ठोकरे खाने को मजबूर .जिस शासक ने विपक्ष की उपेक्षा की यानी उसका गर्त में जाना निश्चित ! जी हाँ .अधिक उपेक्षा .अपमानित करना उचित नहीं हैं .समझो कारण क्या हैं ?आपने कह दिया पचास साल राज करेंगे.कल का ठिकाना नहीं .अरे आप सब दया के पात्र हैं .भिखारी हैं ,वोट के भिखारी और किस बात पर कितना दम .अरे पराधीन हो .इतना अहम गर्त में ले जाएगगा .हमारा देश बहुत विशाल हैं और अनेक भाषाएँ जातियां हैं कोई महात्मा गाँधी जैसा युग पुरुष चाहिए जिसकी आवाज़ सी देश एक आवाज़ पर जाग जाए तो क्या कोई इतना बड़ा तानाशाह नहीं हैं इस देश में .तानाशाही पार्टी में और कैबिनेट पर चल सकती हैं ,जनता तुम्हारी गुलाम नहीं हैं .तुम्हे चुना हैं किसी ने लादा नहीं हैं ,भरम में मत रहना प्रधान सेवकऔर पार्टी मुखिया ,जनता अब समझ रही हैं ,मीडिया ,पत्र और पत्रकारों को दलाल बना दिया .ये कितने दिन साथ देंगे .इनका चरित्र नगर बधु जैसा होता हैं ,उन्हें धन से मतलब, और आपने अपने चारों ओर पूंजीपतियों का जमावड़ा लगा रखा हैं वे कोई वोट बैंक नहीं हैं सिर्फ मतदाता हैं और वो भी निश्चित नहीं .
पुराना गाना कब तक गाओगें ,अपना कुछ कर के दिखाओ पुराने विकास पर अपनी मुहर जैसे मेड इन यु एस ए यानी उल्हास नगर सिंधी एसोसिएशन जैसा नकली माल या चीन का माल .सत्ता के कारण जब जुड़े हैं कारण उससे पैसा ,पद, प्रतिष्ठा सब मिल रही हैं .आज कौन कितना अटलबिहारी जी को याद करता या पूछता हैं .मतलब निकल गया तो अब पहचानते नहीं .
हम कुछ नहीं चाहिए बस रोटी , कपडा और मकान वो भी सामान्य दरों पर .आपकी सरकार ने लूट मचा रखी हैं ,रूपया कहाँ से कहाँ ,डीज़ल ,पेट्रोल आसमान की छू रहे और आप गरीबो के लिए खुली छूट .क्या हम लोग हरिजन आदिवासियों गरीब तबकों को कब तक पालेंगे ! बहुत हो चूका लोली पोप दिखाना .
अपनी असफलता ,नाकामी ,कमियों को छिपाने
पुरानी सरकारों को कोसेंगे
जब गला माला पहनने तैयार रहता हैं
तो क्यों शिर ……खाने तैयार नहीं रहता
पुराने पुण्य के कारण यहाँ तक आये हो
अब क्यों नहीं अच्छा कर पा रहे हो
उसका कारण अदूरदर्शिता ,अज्ञानता ,बड़बोलापन
अनुभवहीनता ,अवज्ञाकारिता और अविनयी भाव होना
हमें चाहिए महंगाई मुक्त देश भारत
विद्यावाचस्पति डॉक्टर अरविन्द जैन संस्थापक शाकाहार परिषद्A2/104 पेसिफिक ब्लू नियर डी मार्ट होशंगाबाद रोड भोपाल 462026 मोबाइल 09425006753

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