हमें भगवान राम के विचारों का अनुसरण करना चाहिए: आचार्य प्रमुख सागर महाराज

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श्री दि.जैन महिला समिति द्वारा केसरिया उत्सव का आयोजन
 गुवाहाटी :अयोध्या हिंदू , जैन, बौद् धर्म का संयुक्त तीर्थ स्थान है। यहां के कण-कण में भगवान विराजमान है। अयोध्या में कई महान योद्धा, ऋषि-मुनि और अवतारी पुरुष हो चुके हैं। जैन धर्म के अनुसार यहां प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ ऋषभदेव सहित कई कई तीर्थंकरों का जन्म हुआ था। जैन धर्म के अधिकांश तीर्थंकरों का जन्म भगवान राम के इश्वाकु वंश में माना जाता है। राम शब्द में 24 तीर्थंकरों का समावेश है। रा: से प्रथम  तीर्थंकर ऋषभदेव और म:  से अंतिम तीर्थंकर महावीर स्वामी है जैन धर्म में भगवान राम को उच्च स्थान दिया है। भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम कहे जाते हैं, क्यो कि मर्यादा, करुणा, दया, सत्य, सदाचार और धर्म के मार्ग पर चलकर वह आदर्श पुरुष कहलाए हैं। यह उक्त बातें आचार्य प्रमुख सागर महाराज ने  मंगलवार को एक धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि जीवन में उनके विचारों का अनुसरण करना चाहिए तभी आपका यह प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के निमित्त हो रहे देश भर में आयोजन सार्थक हो जाएगा। मालूम हो कि आगामी 26 जनवरी से 31 जनवरी तक आयोजित होने वाले श्री सूर्य पहाड़ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के पात्रों का मंगलवार को भगवान महावीर धर्म स्थल में अभिनंदन किया गया। श्री दि.जैन महिला समिति द्वारा केसरिया उत्सव के रूप में आयोजित इस समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें भक्तिमय संगीत नृत्य,भाग्यशाली कूपन एवं भगवान के माता-पिता की कुमकुम केसर द्वारा पीठ्ठी की गई। इस अवसर पर समिति की सदस्यों के अलावा काफी संख्या में समाज के सदस्य उपस्थित थे। यह जानकारी समाज के प्रचार प्रसार के मुख्य संयोजक ओम प्रकाश सेठी एवं सहसंयोजक सुनील कुमार सेठी द्वारा एक प्रेस विज्ञप्ति में दी गई है।

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