गंध दशमी पर्व : चारों ओर बिखरी धूप की खुशबू

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दिगंबर जैन मंदिरों में आज चारों ओर धूप की भीनी-भीनी और सुगंधित खुशबू बिखरी । सभी समाजवासीयों ने आज के दिन सुगंध दशमी (धूप दशमी) का पर्व मनाया।  महावीर   इंटरनॅशनल अजयमेरु के निवर्तमान अध्यक्ष अशोक छाजेड़ व  संरक्षक कमल गंगवाल  ने बताया कि भाद्रपद में शुक्‍ल पक्ष की दशमी को यह पर्व मनाया जाता है। इसे सुगंध दशमी अथवा धूपदशमी कहा जाता है।*
*जैन मान्‍यताओं के अनुसार पर्युषण पर्व के अंतर्गत आने वाली सुगंध दशमी का काफी महत्‍व है।इस व्रत को विधिपूर्वक करने से मनुष्य के अशुभ कर्मों का क्षय होकर पुण्‍यबंध का निर्माण होता है तथा उन्हें स्‍वर्ग, मोक्ष की प्राप्ति होती है।*सचिव विजय पांड्या के अनुसार
*इस दौरान जैन समुदाय शहरों/गांवों में सभी जैन मंदिरों में जाकर भगवान को धूप अर्पण करतेहैं। जिसे धूप खेवन भी कहा जाता है, जिससे सारा वायुमंडल सुगंधमय होकर, बाहरी वातावरण स्‍वच्‍छ और खुशनुमा हो जाता है।इस अवसर पर अपने द्वारा हुए बुरे कर्मों के क्षयकी भावना मन में लेकर मंदिरों में भगवान के समक्ष धूप चढ़ाई जाती है।कई मं‍दिरों में मंडल विधान की सुंदर रचनाएं, कई जगहों पर झाकियां, तो कहीं अलग-अलग जगहों के तीर्थ क्षेत्र की झाकियां सजाई जाती हैं तथा स्वर्ण व रजत उपकरणों से जिनालयों को सजाया जाता है।*
*इस दिन पांचों पाप (हिंसा, झूठ, चोरी, कुशील,परिग्रह) का त्‍याग कर भगवान की पूजा, स्‍वाध्‍याय, धर्म चिंतन, कथा श्रवण एवं सामयिक आदि में समय व्‍यतीत करके सुंगध दशमीकी पूजा की जाती है। शाम में दशमुख वाले घट में दशांग धूप आदि का क्षेपणकर रात्रि को आरती-भक्ति, भजन आदि में समय व्यतीत कर यह व्रत किया जाता है।*
*सभी जिनालयों में चौबीस तीर्थंकरों को धूप अर्पित करके, भगवान से अच्छे तन-मन की प्रार्थना की गयी, साथही अपने अंदर व्याप्त बुराइयों को दूर करने कीभगवान से प्रार्थना की जाती है , ताकि हमारे सारे बुरे कर्मों का क्षय होकर हम मोक्ष की ओर अग्रसर हो सकें
तथा धूप खेवन के इस पवित्र वातावरण से भगवानखुश होकर मोक्ष पद का रा्स्ता हमें दिखलाएं, इसी मनोभावना के साथ सभीजैन मंदिरों में सुगंध दशमी पर धूप खेई जाती है।
विजय कुमार जैन पांड्या
सचिव

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