दिगंबर जैन संत से अजेन भक्त ने पूछा मुनि जी आप कपड़े क्यों नहीं पहनते

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वर्षा योग कर रहे जैन मुनि विश्रांत सागर महाराज मध्य प्रदेश के गांव बड़ा गांव में
अपार धर्म सभा को संबोधित करते हुए भजेन भक्त को मुनि ने बताया

दिगंबर संत से बड़ा कोई संत नहीं है
दिगंबर संत से बड़ा कोई चोला नहीं है सभी भोग वास्तु को त्याग कर दिगंबर अवस्था प्राप्त करते हैं इसीलिए बिना कपड़े वाले संत की पहचान मुनि की है
अपनी संपूर्ण इंद्रियों को वश में करना ही एक जैन संत की पहचान है
जहा पर दिगंबर संत जाते हैं उन शहरों गांव में एक मेला जैसा उत्सव हो जाता है शहर गांव के लोगों को मालूम हो जाता है कि कोई जैन संत का पदार्पण होने वाला है
मुनि ने बताया की कांटों वाले मार्ग भी फूलों के मार्ग बन जाते हैं जो मुंह से मुनि कहते हैं वह प्रवचन सार बन जाते हैं
बड़े से बड़े राजा महाराजा राजनेता मंत्री दिगंबर संत के चरणों में आशीष लेने आते हैं
इस कारण ही जैन संत कपड़े नहीं पहनते परिग्रह के त्यागी होते हैं किसी प्रकार का भी उनके पास में परिग्रह नहीं रखते इसलिए उनकी पहचान जैन संत की मानी जाती है
अजेन भक्त ने मुनि की बहुत प्रशंसा की उसे इस बात का ज्ञान ही नहीं था कि यह कपड़े क्यों नहीं पहनते

महावीर कुमार जैन सरावगी नैनवा

जैन मुनि विश्रांत सागर के प्रवचन में अजेन परिवार भी उमड़े

जैन मुनि कपड़े क्यों नहीं पहनते अजेन भक्तों ने पूछा

महावीर कुमार जैन सरावगी जैन गजट संवाददाता नैनवा

बड़ागांव मध्य प्रदेश वर्षा योग कर रहे जैन मुनि दिगंबर जैन पारसनाथ जिनालय में पयुषण महापर्व के चौथे रोज मुनि ने बताया
दिगंबर संत से बड़ा कोई संत नहीं *होता दिगंबर चोला से बड़ा कोई चोला नहीं होता
दिगंबर संत सभी भोग की वस्तुओं को त्याग कर दिगंबर अवस्था प्राप्त करने पर ही बिना कपड़े के दिगंबर संत है रहता है
अपने समस्त इंद्रियों को वश में करना ही एक दिगंबर संत की पहचान बताइए
दिगंबर संत गांव शहरों में जहां जाते हैं वहां पर मेले जैसे उत्सव अपने आप होने लगते हैं
संत जिस मार्ग में चलते हैं कांटो वाले मार्ग फूलों के मार्ग बन जाते हैं
जो साधु मुझे बोलते हैं वह प्रवचन सार बन जाते हैं
बड़े से बड़े राजा महाराजा देश के राजनेता मंत्री आदि सभी दिगंबर संत के चरणों में आकर आशीष प्राप्त करते हैं
पंचम काल में दिगंबर संत ना होते तो शायद जैन धर्म की पहचान ना होती
धर्म का ज्ञान बांटने वाले मुंह से बोलने वाले चलंते फिरते एक तीर्थंकर भगवान के रूप में जैन मुनि हैं
दिगंबर संत कपड़े ही नहीं सभी भोग वस्तुओं के त्यागी होते हैं
इसीलिए सभी सरकार दिगंबर मुनि अतिथि सम्मान दे रहे हैं
पिछी कमडल वाले संत से कोई बड़ा संत नहीं है
अपार जैन परिवारों ने मुनि के सम्मान में जोरदार तालियां गदगद की

महावीर कुमार जैन सरावगी जैन गजट संवाददाता नैनवा जिला बूंदी राजस्थान

 

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