दांतों का पीसना – विद्यावाचस्पति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन भोपाल

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दाँत पीसना एक प्रचलित लोकोक्ति अथवा हिन्दी मुहावरा है। अर्थ- क्रोध से अभिभूत होने पर इस प्रकार दाँतो से दाँत दबाना कि मानो खा या चबा ही जाएँगे।
व्यक्ति नींद में दांतों को पीसता है या दांतों से कट-कट की आवाज आती है। इस बीमारी को दांतों का पीसना कहते हैं। इस स्थिति का तुरंत इलाज किया जाना चाहिए।
सुबह उठते ही गले में खराश या सिरदर्द जैसे लक्षण महसूस होते हैं। अगर हां, तो आपको समझ लेना चाहिए कि आप किसी आंतरिक रोग से पीड़ित हैं ऐसा तब होता है, जब आप ब्रुक्सिज्म नाम की बीमारी से पीड़ित होते हैं। मेडिकल भाषा में इस बीमारी को दांतों का पीसना कहते हैं। इसके कारण दांतों से पहले एनामेल फिर डेंटीन की सतह हट जाती है। साथ ही इससे दांतों टूटने लगते हैं और जबडों में दर्द हो जाता है। इस रोग से स्लीप पैटर्न भी डिस्टर्ब होता है। दांतों से चबाने में दिक्कत आ जाती है।
यह एक ऐसा रोग है जिसमें व्यक्ति नींद में दांतों को पीसता है या दांतों से कट-कट की आवाज आती है। इसमें आपके दांत अधिक संवेदनशील हो सकते हैं और खराब हो सकते हैं, जबड़े की मांसपेशियों में दर्द हो सकता है और आप सिरदर्द से भी पीड़ित हो सकते हैं।
दांत पीसने के कारण मसूड़ों की मांसपेशियां ढीली हो जाती है और मांस पेशियों में जल्दी ही थकान होने लगता है। दांतों के घिसने की वजह से दांतों में ठंडा गर्म या मीठा खाने से झनझनाहट महसूस होती है। लगातार दांत के घिसने की क्रिया बनी रहने से दांत में दर्द शुरू हो जाता है। मसूड़ों में भी सूजन आता है और ढीलापन होता है। दांतों में ज्यादा दबाव के कारण दांतों की स्थिति में भी परिवर्तन आ जाता है। वे एक दूसरे के ऊपर असामान्य रूप से चढ़ जाते हैं। कभी कभी मुंह के अंदर का हिस्सा और गाल कट जाता है। मुंह से लार लगातार निकलने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। मुंह खुला रखने की आदत हो जाती है। जिससे मुंह का आकार भी असामान्य हो जाता है।
इस बीमारी को स्लीप एपनिया नामक रोग से जोड़ा जाता है। यह रोग भी नींद न आने से जुड़ा है। यह तब होता है जब गले की मांसपेशियां रात में आराम करती हैं और सांस लेने में रुकावट पैदा करते हुए वायुमार्ग को बाधित कर देती हैं। ब्रुक्सिज्म से राहत पाना चाहते हैं, तो आपको नींद की गुणवत्ता में सुधार करना होगा।
लक्षण
जबड़ों पर अधिक दबाव के कारण दांतों में दर्द होना। जबड़ों में दर्द होना।,दांत की बनावट में गड़बड़ी होना।,मसूड़ों में सूजन होना। दांत का केंद्र असामान्य होना।दांत पीसने की आदत के कारण जीभ प्रभावित होना। मसूड़ों का ढीला पड़ना खाने में परेशानी होना।ठंडा, गर्म और खट्टा खाने पर झनझनाहट महसूस होना। दांतों का टूटना, छिलना इत्यादि. दांतों को जोड़ने पर दर्द होना। गालों के आसपास छाले पड़ना।
​कैफीन से बचें
खाने-पीने से आपके दांतों का स्वास्थ्य प्रभावित होता है। कॉफी, कोला और एनर्जी ड्रिंक्स को कम करने की कोशिश करनी चाहिए क्योंकि इनमें कैफीन की मात्रा बहुत अधिक होती है। ये चीजें आपको बहुत उत्तेजित और सक्रिय कर सकती हैं और आपको सोते समय यह समस्या हो सकती है।
​ तनाव कम करें
तनाव ब्रुक्सिज्म का एक सामान्य कारण है। तनाव से छुटकारा पाने के लिए एक प्रभावी योजना बनाए। अच्छा खाना खाएं, एक्सरसाइज करें, योग और मेडिटेशन करें। फास्ट फूड, सोडा पेय और मीठे पदार्थों से बचें।
​ फालतू की चीजों को चबाने से बचें
बहुत से लोगों को नाखून, लोहा, कपड़े या रबड़ जैसी चीजें चबाने की आदत यह आदत होती है। यह आदत सीधे आपके दांत पीसने से जुड़ी हुई है और इनसे बचा जाना चाहिए। इसके बजाय आप च्युइंग गम, पुदीना या दिन में कई बार हल्का-फुल्का खाने की कोशिश करें।
​कैल्शियम और मैग्नीशियम का सेवन करें
इस रोग का मतलब हो सकता है कि आपको कुछ सप्लीमेंट्स की कमी है। विटामिन और सप्लीमेंट्स का सेवन करें। अपने खाने में कैल्शियम और मैग्नीशियम से भरपूर चीजों को शामिल करें।
​सोने से पहले ठीक से आराम करें
ब्रुक्सिज्म से राहत पाने के लिए आपको सोने से पहले शांत और तनावमुक्त होना चाहिए। सोने से पहले लैपटॉप या मोबाइल का इस्तेमाल करना जोखिम बढ़ा सकता है। आप हर्बल चाय ले सकते हैं या फिर अपनी गर्दन, कंधों और चेहरे की मालिश करने कर सकते हैं।
जोखिम
अगर सही समय पर दांत पीसने की आदत से छुटकारा नहीं पाया गया, तो यह आगे गंभीर रूप धारण कर सकता है। इसके कारण मरीज के दांत टूट सकते हैं। साथ ही दांतों पर दरारें आ सकती हैं। इसके अलावा अन्य जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। जैसे-
दांतों में संवेदनशीलता,जबड़ों में तेज दर्द (खाने पीने में परेशानी बढ़ सकती है),जोड़ों में परेशानी बढ़ सकती है।
इलाज
ब्रुक्सिज्म से बचने के लिए आमतौर पर नाइट गॉड दिया जाता है। साथ ही रोगी के लिए स्प्लेंडर डिवाइस का सहारा लिया जाता है।
ऑर्थोडॉन्टिक ट्रीटमेंट देकर भी मरीज का इलाज करने की कोशिश की जाती है।
वहीं, अगर तनाव और चिंता के कारण यह समस्या हुई है, तो उन्हें दवाई दी जाती है।
गंभीर दर्द या मांसपेशियों में तनाव होने पर रिलैक्सेशन थेरेपी दी जाती है।
विद्यावाचस्पति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन संरक्षक शाकाहार परिषद् A2 /104 पेसिफिक ब्लू ,नियर डी मार्ट, होशंगाबाद रोड, भोपाल 462026 मोबाइल ०९४२५००६७५३

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