चिकनगुनिया—-विद्यावाचस्पति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन भोपाल

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चिकनगुनिया मच्छरों की वजह से फैलने वाली बीमारी है। अफ्रीका और एशिया महाद्वीप के देशों में यह बीमारी बहुत अधिक पायी जाती है। हालांकि, मच्छरों की वजह से पनपने वाली इस बीमारी के कुछ मामले यूरोप और अमेरिका के कुछ हिस्सों में भी पाए गए हैं।
चिकनगुनिया क्या है?
यह एक वायरस है जो इंफेक्टेड मादा मच्छर के काटने से होता है। चिकनगुनिया का प्रसार आमतौर पर घर के बाहर और दिन के समय में होता है। खासकर, तड़के सुबह या दोपहर बाद अंधेरा होने से पहले मच्छर बहुत ज़्यादा सक्रिय होते हैं और इसीलिए, इस समय चिकनगुनिया बहुत तेज़ी से फैलता है। इस वायरल इंफेक्शन की पहचान तेज़ बुखार के साथ मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द से होती है। इसके अलावा सिर दर्द, चक्कर, थकान और रैशेज़ जैसी समस्याएं भी इसके अन्य लक्षण हो सकते हैं।
आमतौर पर मच्छर काटने के 3-7 दिनों के बीच चिकनगुनिया की शुरुआत होती है। वैसे तो यह समस्या खुद-ब-खुद ठीक हो जाती है, लेकिन बुज़ुर्गों और किसी अन्य प्रकार की बीमारी से ग्रसित लोगों के लिए यह इंफेक्शन जानलेवा भी साबित हो सकता है। चिकनगुनिया का कोई इलाज या वैक्सीन नहीं है। हालांकि, इस समस्या का इलाज, इसके लक्षणों जैसे बुखार, दर्द और सूजन से आराम दिलाने के आधार पर होता है।
लक्षण
चिकनगुनिया के लक्षण और संकेत 10-12 दिनों तक रहते हैं, जो धीरे-धीरे खुद ठीक होने लगते हैं। बुखार और जोड़ों में असहनीय दर्द के अलावा चिकनगुनिया में कुछ और भी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। उनमें से कुछ इस प्रकार है- – सिर दर्द, थकान, चक्कर आना,,लिम्फ नॉड्स में संवेदनशीलता ,उल्टी (इंफेक्शन के 2 से 22 दिन के भीतर)
अक्सर, चिकनगुनिया के लक्षणों को लोग मच्छरों की वजह से होने वाली अन्य बीमारियों जैसे मलेरिया और डेंगू के लक्षण मान लेते हैं। लेकिन, इनका प्रभाव शरीर पर अलग तरीके से होता है। जैसे, इसमें होने वाले बुखार की गम्भीरता अन्य बीमारियों से अलग होता है। इसी तरह डेंगू में कई बार मरीज़ को ब्लीडिंग जैसे लक्षण भी दिखायी पड़ते हैं। जबकि, मलेरिया में मरीज़ों में तेज़ बुखार होता है जो, शाम में काफी बढ़ जाता है। जिसके बाद बार-बार और जल्दी-जल्दी ठंड और पसीना जैसी समस्याएं होती रहती हैं। तो वहीं दूसरी तरफ चिकनगुनिया में मरीजों को तेज बुखार के साथ तेज़ दर्द (खासकर, जोड़ों में असहनीय दर्द) महसूस होता है। इन तीनों ही स्थितियों में मरीज़ों को 102’oF डिग्री बुखार हो सकता है।
कारण
“ चिकनगुनिया वायरल इंफेक्शन की वजह से होता है और मच्छरों द्वारा संक्रमित व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्तियों तक इस वायरस का प्रसार होता है। चिकनगुनिया के मच्छर दिन के समय और स्वस्थ पानी में पनपते हुए देखे जा सकते हैं। साफ-सफाई की कमी, संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आने से, संक्रमण वाले स्थानों में रहने और वहां की यात्रा करने से, कमज़ोर इम्यून सिस्टम के अलावा आपके घर के आसपास पानी का जमाव चिकनगुनिया का खतरा आपके लिए बढ़ा सकता है। इसी तरह 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोग, नवजात बच्चे, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों के मरीज़ों को चिकनगुनिया होने का डर अधिक होता है।
निदान
इस बीमारी का पता लगाने के लिए पहले डेंगू और मलेरिया का टेस्ट करते हैं। फिर, चिकनगुनिया का टेस्ट किया जाता है। इस मच्छर जनित बीमारी का पता लगाने के लिए एक साधारण सा ब्लड टेस्ट (CHIKV) किया जाता है।
इसके अलावा आपको ELISA (Enzyme-linked immunosorbent assays) जैसे अन्य ब्लड टेस्ट कराने की भी ज़रूरत पड़ सकती है। जिसकी मदद से शरीर में चिकनगुनिया से लड़ने वाली एंटी-बॉडीज़ (Immunoglobulin M and Immunoglobulin G) का पता लगाया जा सकता है। आपको खून की जांच के लिए आरटी-पीसीआर नामक एक और ब्लड टेस्ट कराना चाहिए जिसे, इंफेक्शन होने के सप्ताहभर के अंदर ही किया जाता है।
उपचार
जैसा कि एक वायरल इंफेक्शन होने की वजह से, चिकनगुनिया के लिए कोई विशेष टीका या दवाई नहीं है। ज़्यादातर मामलों में मरीज़, सप्ताहभर में ठीक हो जाता है। लेकिन, जोडों में दर्द की समस्या कुछ महीनों तक बनी रह सकती है। चिकनगुनिया के प्राथमिक उपचार के लिए सूजन, बुखार और दर्द कम करने वाली दवाइयों की सलाह दी जा सकती है। साथ ही मरीज़ों को अधिक मात्रा में तरल पदार्थों के सेवन और आराम करने की सलाह दी जाती है।
चिकनगुनिया में आहार कैसी होनी चाहिए ?
दवाइयों के साथ-साथ कुछ विशेष फूड्स का सेवन चिकनगुनिया से जल्द ठीक होने में मदद कर सकता है। इसीलिए, इन्हें अपनी डायट में शामिल करें-
तरल: जब किसी व्यक्ति को चिकनगुनिया जैसे वायरल इंफेक्शन्स होते हैं। तो, शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इसीलिए, मरीज़ को अधिक मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए ताकि शरीर को पर्याप्त मात्रा में पानी मिल सके। सूप, छाछ, नींबू पानी और नारियल पानी जैसे हेल्दी ड्रिंक्स का सेवन करें।
विटामिन-सी युक्त फल: ऐसे फल आपके इम्यून सिस्टम को मज़बूत बनाकर इंफेक्शन से लड़ने के लिए शरीर की क्षमता बढ़ाते हैं। संतरा,अमरूद और नींबू जैसे फल इसके अच्छे उदाहरण हैं।
सब्ज़ियां: आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ-साथ ये पचने में भी आसान होती हैं। जिससे, गैस्ट्रोइंस्टेटाइनल ट्रैक्ट को इंफेक्शन के दौरान सही तरीके से काम करने में मदद होती है। हरी सब्ज़ियों के सेवन से भी चिकनगुनिया के लक्षणों से जल्द राहत मिलती है।
निवारण
निवारक उपायों का उद्देश्य मच्छरों के काटने को कम करना है।
व्यक्ति को त्वचा को ढंकना चाहिए और त्वचा के संपर्क को कम करना चाहिए।
यदि त्वचा उजागर हो जाती है तो इसे त्वचा के विकर्षक लगाने से ढंकना चाहिए।
आस-पास की हमेशा जांच की जानी चाहिए और साफ-सुथरा रखना चाहिए।
जल संचय से बचना चाहिए।
मच्छरों के काटने से बचने के लिए नेट का इस्तेमाल करना चाहिए
डीईईटी युक्त मच्छर विकर्षक का उपयोग किया जाना चाहिए।
लेमन ग्रास जैसे प्राकृतिक कीट विकर्षक का उपयोग किया जा सकता है
घरेलू उपाय
चिकनगुनिया होने पर रोगी के शरीर में पानी की कमी हो जाती है। पानी शरीर के सभी विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है । यदि चिकनगुनिया से ग्रसित रोगी को पानी कम मात्रा में पिलाया जाएगा तो उसे डीहाईड्रेशन की समस्या हो सकती है।
अजवाइन से
चिकनगुनिया में अजवायन देने की सलाह दी जाती है। अजवायन में थाइमोल नामक एक तेल पाया जाता है जो लोकल एनेस्थिसिया की तरह काम करता है, जिसके परिणामस्वरूप शरीर का दर्द कम हो जाता है।
सहजन का इस्तेमाल
चिकनगुनिया में सहजन की फलियों का सूप पीने को दिया जाता है। इसके पत्ते भी काफी फायदेमंद होते हैं। सहजन के सेवन से मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं।
हल्दी का सेवन
हल्दी हर रोग का रामबाण है, इसे आप दूध में मिलाकर पएं। इससे चिकनगुनिया से ग्रसित मनुष्य ठीक हो जाता है। यह उपाय बहुत लाभ देता है।
तुलसी
तुलसी हमारे प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है और हमें बिमारियों से बचाती है।
गिलोय
चिकनगुनिया से राहत के लिए गिलोय रस या गिलोय कैप्सूल लें। आप एक दिन में एक ग्राम की खुराक ले सकते हैं। यह चिकनगुनिया के उपचार में मदद करता है।
पपीता की पत्तियां
7 से 8 ताजे पपीते की पत्तियां लेकर उन्हें धो लें और उनका पेस्ट बना लें। फिर उस रस को निचोड़कर 2-2 चम्मच रस 3-3 घण्टे बाद पिलाएँ। इस बुखार में शरीर के प्लेट्लेट्स तेजी से गिरते हैं और पपीते की पत्तियाँ प्लेट्लेट्स को बढ़ाते हैं।
अंगूर से
अंगूर के बीजरहित फल को गाय के गुनगुने दूध के साथ पीने से चिकनगुनिया का वायरस मर जाता है। यह कारगर उपाय है।
लहसुन का सेवन
जोड़ों के दर्द से राहत दिलाने में लहसुन का कोई मुकाबला नहीं है। इसे प्रभावित जगह पर जितना ज्यादा लगाया जाए, उतना अच्छा होता है। यह ना सिर्फ दर्द से राहत दिलाता है, बल्कि सूजन को कम करके रक्त संचार को बेहतर करता है।
लहसुन की 10 से 12 कलियां लें और उनका पेस्ट बनाकर पानी के साथ पेस्ट (ग्राइंड) बना लें। अब इस पेस्ट को जोड़ों पर दर्द वाली जगह पर लगाएँ और कुछ घण्टों के लिए छोड़ दें।
शहद व नीम्बू से फायदा
चिकनगुनिया का इलाज करने के लिए शहद का प्रयोग किया जा सकता है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल व एंटी-माइक्रोबियल गुण पाए जाते हैं, जो बीमारियों से लड़ने में हमारी मदद करते हैं। वहीं नीम्बू बुखार से लड़ने के लिए शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
एक चम्मच शहद व आधे नीम्बू को एक गिलास पानी में मिलाकर इसका सेवन करें। आप पानी को गर्म कर उसमें नीम्बू व शहद को मिक्स कर उसकी चाय का सेवन भी कर सकते हैं।
सब्जियों का सूप चिकनगुनिया में बहुत अधिक लाभदायक होता है इसलिए चिकनगुनिया में टमाटर का सूप पिएं इसके अलावा तरल पदार्थ का सेवन करें।
ओमेगा-3 फैटी एसिड रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है। यह हमें दाल, अलसी और अखरोट से प्राप्त होता है। इससे चिकनगुनिया में लाभ मिलता है।
केला
केले में चीनी की मात्रा कम होती है और स्टार्च की मात्रा अधिक होती है। इसके अलावा केले में फाइबर भी बहुत अधिक मात्रा में पाया जाता है। इसके सेवन से पाचन क्रिया मजबूत रहती है।
आइस पैक
बर्फ का पैक सूजन और दर्द में आराम पहुँचाता है। यह उपाय चिकनगुनिया के उपचार के दौरान किया जाना चाहिए। इससे रोगी को आराम मिलता है।
गाजर
कच्ची गाजर खाने से वह चिकनगुनिया के उपचार में बेहद फायदेमंद है। यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और आपको राहत दिलाता है।
कुछ दिनों के लिए दिन में दो से तीन बार नारियल पानी का सेवन करें। यह चिकनगुनिया के उपचार के दौरान बहुत ही फायदा दिलाता है।
विद्यावाचस्पति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन संरक्षक शाकाहार परिषद् A2 /104 पेसिफिक ब्लू ,नियर डी मार्ट, होशंगाबाद रोड भोपाल 462026 मोबाइल ०९४२५००६७५३

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