चिड़ियाघर में हाथियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय कार्रवाई दिवस:– विद्यावाचस्पति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन भोपाल

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सिम्स और एलिफेंट की इंट्रोडक्शन फाउंडेशन द्वारा साल २०११  में इसकी पहल की गई थी लेकिन ऑफिशियली १० जून २०१२  को इसे मनाने की घोषणा हुई थी।
हर साल १०  जूनको मनाए जाने वाले “विश्व हाथी दिवस” का उद्देश्य हाथियों के लुत्प हो रही संख्या, उसके कारणों पर की ओर लोगों का ध्यान खींचना है। साथ ही उनके संरक्षण के उपायों, पुनर्वास, बेहतर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और गैर कानूनी तस्करी रोकने की ओर भी प्रयास करने के लिए प्रेरित करना है।
– हाथी विश्व के लिए बहुत ही जरूरी प्राणी है। हाथी जंगल में रहने वाले दूसरे वन्यजीव के लिए पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में मदद करते हैं।
– हाथी झुंड में चलते हैं जिससे घने जंगलों में रास्ता बनते जाता है जो दूसरे जानवरों के लिए बहुत मददगार होता है।
– एशियाई हाथियों की वैश्विक आबादी का ६०  प्रतिशत से अधिक भारत में है। वर्तमान में देश के १४  राज्यों में लगभग ६५०००  वर्ग किलोमीटर में हाथियों के लिए ३०  वन क्षेत्र सुरक्षित हैं।
लेकिन हाल- फिलहाल जितनी तेजी से मानव हाथी संघर्ष की घटनाएं हुई हैं, वह चिंता का विषय है। हाथियों की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि वन विभाग, गैर सरकारी संस्थाएं और पर्यावरण प्रेमियों द्वारा सामूहिक रूप से इनके संरक्षण का कार्यक्रम चलाया जाए।
१०  जून को दुनिया वर्ल्ड  एलीफैंट  डे  के रूप में सेलिब्रेटमनाया जाता हैं ., जिसका उद्देश्य हाथियों के संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक करना है। ‘विश्व हाथी दिवस’ १०  जून  २०१२  से मनाया जा रहा है। यह दिन दुनियाभर में हाथियों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए समर्पित है। बता दें, एलीफैंट  शब्द की उत्पत्ति ग्रीक शब्द एलेफ़स  से हुई है, जिसका अर्थ है गजदंत।
चमड़ी मोटी होती है इनकी
हाथी की खाल का ज्यादातर हिस्सा २ .५  सेंटीमीटर मोटा होता है। दरअसल, उनकी त्वचा पर मौजूद सिलवटें और झुर्रियां, सपाट त्वचा के मुकाबले १०  गुना अधिक पानी बनाए रख सकती हैं जो उन्हें ठंडा रखने में मदद करता है। वे नियमित रूप से अपनी त्वाचा को साफ रखते हैं, और धूल व मिट्टी में नहाकर खुद को तेज धूप से बचाते हैं।
जमीन का सबसे बड़ा जानवर
अफ्रीकी हाथी दुनिया का सबसे बड़ा जमीन पर रहने वाला स्तनपायी प्राणी है। इसमें नर औसतन ३  मीटर तक ऊंचा और 6  टन तक वजनी होता है। सिर्फ नर हाथी ३५ -४०  वर्षों में अपने पूरे साइज तक पहुंचते हैं। उनकी उम्र ६० -७०  वर्षों तक की होती है। जन्म के समय हाथियों का वजन १२०  किलोग्राम तक हो सकता है।
सूंड में होती है कमाल की खूबियां
हाथियों की सूंड में लगभग १५० ,०००  मसल्स यूनिट होती हैं। एक तरह से यह उनका हाथ ही होता है जिससे वह मूंगफली तक को छीलकर खा लेते हैं! इसके अलावा वे अपनी सूंड का उपयोग पानी पीने के लिए करते हैं, जिसमें ८  लीटर तक पानी आ सकता है। और हां, तैरते समय वे सूंड का उपयोग स्नोर्कल (सांस लेने के लिए) के रूप में भी करते हैं।
उनके गजदंत असल में दांत ही होते हैं!
गजदंत (टस्क) वास्तव में हाथी के बढ़े हुए दांत होते हैं, जो पहली बार तब दिखाई देते हैं जब वे लगभग
२  वर्ष के होते हैं। बढ़ती उम्र के साथ उनके गजदंत भी बढ़ते हैं। वे टस्क का इस्तेमाल पेड़ों की छाल उतारने, जड़ों को खोदने या खुद की रक्षा के लिए करते हैं। हालांकि, इन्हीं दांतों की वजह से उनका शिकार भी किया जाता है।
खाने के मामले में इनका मुकाबला नहीं
हाथियों को रोजाना १५०  किलोग्राम तक के भोजन की जरूरत होती है। इसलिए वे अपने दिन का तीन-चौथाई हिस्सा खाने में बिता सकते हैं।
हाथी सब कुछ याद रखते हैं!
हाथी का टेम्पोरल लोब (स्मृति से जुड़ा दिमाग का हिस्सा) लोगों की तुलना में बड़ा और सघन होता है- इसलिए कहावत है कि हाथी कभी नहीं भूलते।
जन्म के कुछ देर बाद हो जाते हैं खड़े
जी हां, हाथी के बच्चे जन्म के २०  मिनट के भीतर ही अपने पैरों पर खड़े हो जाते हैं, और १  घंटे के अंदर तो वह चलने लगते हैं। जबकि दो दिनों के बाद वे झुंड के साथ रहने लगते हैं। ताकि भोजन और पानी के लिए वह पलायन कर सकें।
वाइब्रेशन्स से करते हैं कम्यूनिकेशन
वैसे तो हाथी कई तरह से संवाद करते हैं। कई बार वे इतनी कम आवाज में कम्यूनिकेट करते हैं कि इंसान भी उसे नहीं सुन पाते। इसके अलावा वे खास तरीके से शरीर को हिलाकर, छूकर और गंध के जरिए भी संवाद करते हैं। इतना ही नहीं, वे जमीन पर वाइब्रेशन पैदा करके एक दूसरे को संकेत भी देते हैं।
हाथी लेट कर नहीं बल्कि  खड़े होकर ही सोते हैं!
असल में, अध्ययन कहते हैं कि हाथी लेट कर और खड़े होकर दोनों तरह से सो सकते हैं। लेकिन एक्सपर्ट का कहना है कि जंगल में अधिकतर हाथी खड़े-खड़े ही सोते हैं क्योंकि उनके लिए हिलना डुलना आसान रहता है। इसके अलावा वे इसलिए भी खड़े होकर सोते हैं क्योंकि उनका शरीर काफी भारी होता है ऐसे में जमीन पर बैठने से उनके शरीर का कोई अंग चोटिल भी हो सकता है।
हाथी एक दिन में ८०  गैलन तक पानी पी सकता है
हाथियों के दांतों के लिए व्यापार के लिए अब भी उनका शिकार जारी है। बढ़ता कंकरीट जंगल उनसे उनका घर छीन रहा है, जिसके कारण इंसानों और हाथियों के बीच एनकाउंटर बढ़ गया है। कई हाथी तो रेल गाड़ियों की चपेट में आ जाते हैं। जबकि कुछ हाथी भोजन और पानी की तलाश में इंसानी बस्तियों में भी पहुंच जाते हैं। इसलिए हाथियों का सरंक्षण काफी जरूरी है।
विद्यावाचस्पति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन  संरक्षक शाकाहार परिषद् A2 /104  पेसिफिक ब्लू ,नियर डी मार्ट, होशंगाबाद रोड, भोपाल 462026  मोबाइल  ०९४२५००६७५३

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