भूख के वक्त कुछ दिखाई नहीं देता..लेकिन भूखा पेट बहुत कुछ दिखा देता है..! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज

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  भूख के वक्त कुछ दिखाई नहीं देता..लेकिन भूखा पेट बहुत कुछ दिखा देता है..! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज

औरंगाबाद नरेंद्र पियुष जैन    अन्तर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय पियूष सागरजी महाराज की अहिंसा संस्कार पदयात्रा दिक्षा भुमी परतापुर बांसवाड़ा राजस्थान की और चल रही है उसी श्रुंखला में उपस्थित मध्यप्रदेश के निमच में उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि

भूख के वक्त कुछ दिखाई नहीं देता..लेकिन भूखा पेट बहुत कुछ दिखा देता है..! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज
     दो प्रकार के लोग हैं इस वसुन्धरा पर —  एक वह जो जीने के लिये भोजन करते हैं और दूसरे वह जो खाने के लिए ही जीते हैं  जीने के लिए खाने वाले लोग दिन में दो बार भोजन करते हैं – स्वास्थ्य के लिए और दीर्घकालीन जीने के लिए। खाने के लिए जीने वाले लोग दिन भर चटर पटर खायेंगे। खाने के लिए जीने वाले लोग स्वाद के लिए खायेंगे और डाक्टर के चक्कर लगायेंगे।
आज कल लोग मोटापा को कम करने के लिए अनेक प्रकार की दवाइयां और गोली खा रहे हैं, जो शरीर को भयंकर नुकसान दे रही है। अगर हम 50 साल पहले के खान पान को देखें तो उस समय उतनी बीमारी नहीं थी, जितनी बीमारी आज बढ़ रही है कुकुरमुत्तो की तरह। पहले व्यक्ति दो बार भोजन करता था और 6-8 घन्टे की नींद लेता था। आज यह सब खत्म सा हो गया है, क्योंकि आज हम जिस दौर से गुजर रहे हैं, वह दौर फास्ट फूड और प्रोसेस्ड फूड का दौर है। जो कम से कम रूपये पैसे में मिलते हैं, वह पैक पैकेट आते हैं — खोलो, गर्म पानी में डालो और सीधा खाओ। आज मोटापा बढ़ने का कारण और बीमारी बढ़ने की वजह हमारा खान पान ही है। बार-बार खाने पीने से शरीर में इन्सुलिन का स्तर बढ़ जाता है, और मस्तिष्क पर तृप्ति केन्द्र कम संवेदनशील हो जाता है। फिर हमारी असली भूख मर जाती है, चटर पटर खाने की आदत लग जाती है। मोटापा और बीमारी उसी चटर पटर का परिणाम है।
सात्विक भोजन के खान पान से शरीर ऊर्जावान, मस्तिष्क तरोताजा, और आत्म विश्वास जागृत बना रहता है। स्वस्थ शरीर का मूल मन्त्र है भोजन में संयम   कम से कम भोजन करने की आदत डालना चाहिए, यह कठिन काम नहीं है, सिर्फ 7 दिन का अभ्यास ही हमें हजार बीमारियों से बचा सकता है और हर मास एक उपवास दीर्घकालीन जीवन दे सकता है।भूख एक बीमारी है, भोजन उसकी औषधि है। आदमी को भोजन औषधि समझकर करना चाहिए, ताकि दवाखाने ना जाना पड़े। जो लोग भोजन को दबा-दबा के खाते हैं, वही लोग दवा खाने जाते हैं…!!!आज यह अहिंसा संस्कार पदयात्रा दिशा:नीमच मध्यप्रदेश , प्रतापगढ, घाटोल, बांसवाडा परतापुर अद्वेश्वर पार्श्वनाथ राजस्थान की ओर बढते गुरुचरण परम पूज्य गुरुदेव भारत गोरव विश्व के सर्वश्रेष्ठ तपस्वी  उत्तम सिंह निष्क्रिडित व्रत्तकर्ता अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागरजी महाराज जी चतुर्विघ संघ का भव्य मंगल  पद विहार दिनाँक 2 मार्च 2026, सोमवार,  सुबह 6.30 बजे राजकीय उच्च माध्यमिक विघालय,मेलाना,तहसील निम्बाहेड़ा, जिला चितोड़गढ से श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर जावद जिला- नीमच मध्यप्रदेश 11 किलोमीटर के लिए होगा।                        नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद

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