अंतर्राष्ट्रीय प्लास्टिक बैग मुक्त दिवस—– विद्यावाचस्पति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन भोपाल

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प्लास्टिक एक आत्मा जैसा अजर– अमर वस्तु हैं .जो अविनाशी हैं जो एक विनाशक पदार्थ हैं .इसका वर्तमान में अंधाधुंध उपयोग के कारण हमारा जीवन अंधकारमय हो गया हैं ,इसके उपयोग पर प्रतिबन्ध किया जाना बहुत आवश्यक हैं .इसके प्रतिकूल प्रभाव से सभी परिचित हैं पर इसका उपयोग एक प्रकार से प्रज्ञापराध हैं .जिससे हमारा आगामी जीवन बहुत वीभस्त होगा ,इससे सुरक्षित होना ही एक मात्र विकल्प हैं .
3 जुलाई को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय प्लास्टिक बैग मुक्त दिवस, एक वैश्विक पहल है जिसका उद्देश्य प्लास्टिक बैग के उपयोग को खत्म करना है। प्लास्टिक बैग किराने की खरीदारी की सुविधा की तरह लग सकते हैं, लेकिन वे पर्यावरण पर भी भारी दबाव डालते हैं।
संगठन का उद्देश्य हमारे दैनिक उपयोग से एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक को खत्म करना है। ज़ीरो वेस्ट यूरोप के अनुसार, यह पाया गया कि 2010 में कुल 95.5 बिलियन कैरियर बैग में से 92 प्रतिशत यूरोपीय संघ में एकल-उपयोग थे। दिन की शुरुआत 2008 में,ज़ीरो वेस्ट यूरोप रेज़ेरो के एक सदस्य ने की थी
संगठन का उद्देश्य हमारे दैनिक उपयोग से एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक को खत्म करना है। ज़ीरो वेस्ट यूरोप के अनुसार, यह पाया गया कि 2010 में कुल 95.5 बिलियन कैरियर बैग में से 92 प्रतिशत यूरोपीय संघ में एकल-उपयोग थे।
जीरो वेस्ट यूरोप द्वारा शुरू किया गया, अंतर्राष्ट्रीय प्लास्टिक बैग मुक्त दिवस 3 जुलाई को विश्व स्तर पर मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य इस गैर-बायोडिग्रेडेबल सामग्री के उपयोग के खिलाफ जागरूकता बढ़ाना है जो हमारे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है। संगठन का उद्देश्य हमारे दैनिक उपयोग से एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक को खत्म करना है। ज़ीरो वेस्ट यूरोप के अनुसार , यह पाया गया कि 2010 में कुल 95.5 बिलियन कैरियर बैग में से 92 प्रतिशत यूरोपीय संघ में एकल-उपयोग थे।
इस दिन की शुरुआत 2008 में ज़ीरो वेस्ट यूरोप , रेज़ेरो के एक सदस्य ने की थी। इसकी स्थापना के पहले वर्ष में, दिन केवल कैटेलोनिया में चिह्नित किया गया था। एक साल बाद, ज़ीरो वेस्ट यूरोप ने यूरोपीय संघ में अंतर्राष्ट्रीय प्लास्टिक बैग मुक्त दिवस की शुरुआत की। उनका अभियान वर्षों में विकसित हुआ और संगठन कई देशों को एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के उपाय करने के लिए प्रेरित करने में सक्षम था।
संगठन द्वारा किए गए उपायों ने उन्हें महत्वपूर्ण परिणाम दिए हैं। प्लास्टिक बैग निर्देश यूरोपीय संघ द्वारा 2015 में अधिनियमित किया गया था। इस निर्देश का उद्देश्य ऐसे उपाय करना था जो 2018 तक प्रति व्यक्ति प्लास्टिक की खपत को 90 बैग तक कम कर सके। यह 2025 के लिए प्रति व्यक्ति 40 प्लास्टिक बैग की खपत को और कम करने की योजना बना रहा है।
प्लास्टिक की पानी की बोतलों के उपयोग में कटौती करने के लिए हैदराबाद के सुनीत तातिनेनी और चैतन्य अयनापुडी द्वारा पानी के बक्से बनाए गए हैं। इन पानी के बक्सों की मदद से उनका लक्ष्य प्लास्टिक की पानी की बोतलों के उपयोग को 85 प्रतिशत तक खत्म करना है। उनके द्वारा उपयोग किए जाने वाले पानी के बक्से और बैग पर्यावरण के अनुकूल हैं और इन्हें पुनर्नवीनीकरण किया जा सकता है।
औसतन, प्लास्टिक की थैलियों का उपयोग सिर्फ 25 मिनट के लिए किया जाता है और दुर्भाग्यवश एक प्लास्टिक को गलने में कम से कम 1000 साल लगते हैं, साथ ही, दुनिया के महासागरों और पृथ्वी को प्रदूषित करने में सिर्फ चंद मिनट लगते हैं। अधिकांश लोग इस तथ्य से अनजान हैं कि हर मिनट 10 लाख प्लास्टिक बैग का उपयोग किया जाता है। आज अंतर्राष्ट्रीय प्लास्टिक बैग मुक्त दिवस है। जागरूकता फैलाने के लिए ये दिवस तो घोषित कर दिया गया लेकिन आप बढ़ते प्रदुषण और आने वाली पीढ़ी के लिए लगातार बढ़ते खतरे को लेकर कितना सजग हुए हैं?
बड़े-बड़े बाजारों से लेकर सब्जी मंडी में आज भी प्लास्टिक में खुले आम सामान बेचा जा रहा है। आए दिन समुद्र में बढ़ते प्लास्टिक प्रदुषण के कारण समुद्री जीवों की जान पर भी खतरा मंडरा रहा है। इंडोनेशिया एक द्वीपसमूह है जहां की जनसंख्या 260 मिलियन है। यह देश चीन के बाद सबसे ज्यादा प्लास्टिक प्रदूषण फैलाने वाला दुनिया का दूसरा देश है। जनवरी में जरनल साइंस में प्रकाशित अध्ययन में ये बात कही गई है। यहां हर साल 3.2 मिलियन टन प्लास्टिक का कचरा उत्पन्न होता है। जिसका निपटारा नहीं किया जाता। अध्ययन के मुताबिक इसमें से 1.29 मिलियन टन कचरा समुद्र में पहुंचता है।
1950 से 1970 तक प्लास्टिक का काफी कम उत्पादन किया जाता था इसलिए प्लास्टिक प्रदुषण का नियंत्रण करना आसान था। 1990 तक दो दशकों में प्लास्टिक के उत्पादन में तीन गुना बढ़ोतरी हुई। पिछले 40 वर्षों के मुकाबले वर्ष 2000 के दौरान प्लास्टिक का उत्पादन काफी ज्यादा हो गया। फलस्वरूप आज 30 करोड़ टन प्लास्टिक का उत्पादन रोजाना होता है जो करीब पूरी आबादी के वजन के बराबर है।
प्लास्टिक के कम इस्तेमाल के लिए सरकार प्रयास कर रही है। यहां तक कि दुकानदारों से भी कहा जा रहा है कि लोगों को प्लाटिक के थौलों में सामान न दें और देशभर के स्कूलों में बच्चों को बताया जा रहा है कि इससे क्या समस्याएं हो सकती हैं। सरकार की ओर से सभी तरह के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि वह 2025 तक प्लास्टिक के 70 फीसदी कम इस्तेमाल करने संबंधी अपने उद्देश्य को प्राप्त कर सके। यह बड़ा उद्देश्य तभी पूरा हो सकता है जब लोग ये समझें कि प्लास्टिक हमारा दुश्मन है।
इससे बचने के लिए जागरूकता जरुरी हैं
विद्यावाचस्पति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन संरक्षक शाकाहार परिषद् A2 /104 पेसिफिक ब्लू ,नियर डी मार्ट, होशंगाबाद रोड, भोपाल 462026 मोबाइल ०९४२५००६७५३

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