आगरा में मनाया 9वा श्री शान्ति भक्ति सिद्धि दिवस, 10 वर्ष बाद छीपीटीला आगरा की बेटियों के साथ पधारे आचार्य श्री विमर्श सागर जी महामुनिराज

0
19
आचार्यश्री ने कहा- आगरा शुरु भक्तो की नगरी है, भक्तो के  अहवाहन पर आगरा आया हूँ। आहार जी के छोटे बाबा जीवन है पानी की बूँद महाकाव्य के मूल रचियता, आआदर्श महाकवि भावलिंगी संत आचार्य श्री 108 विमर्श सागर जी महामुनिराज 10 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद महानगर आगरा में पदार्पण किया। आचार्य श्री ke विशाल संघ की भव्य आगवानी में हजारों की संख्या में भक्तो का विशाल सैलाब उमड़ पड़ा। गुरुदेव के आगरा नगर आगमन पर आस-पास के नगर- शहरों में जतारा, एटा , फिरोजाबाद, दिल्ली आदि अनेक स्थानों से भी गुरु भक्तों ने गुरुवर के नगर आगवानी में शिरकत कर आगवानी को भव्यातिभव्य बनाया। 25 दिसम्बर सोमवार की प्रातः बेला में आगरा के अग्रसेवा सदन से मंगल पद-विहार करते हुए मधुनगर जैन मंदिर, सदर जैन मंदिर, निर्मल सदन आदि अनेको नगर के प्रसिद्ध स्थानों से विशाल शोभायात्रा के साथ आचार्य संघ ने छीपीटोला जैन मंदिर में भव्यातिभाव्य मंगल प्रवेश किया।आचार्य श्री विमर्श सागर जी महामुनिराज जन्मभूमि जतरा चातुर्मास 2023 के जजन्मभूमि जतारा से अतिश क्षेत्र तिजारा तक नगर- नगर, डगर डगर पद विहार करते हुए “जिनागम पंथ प्रभावना पात्रा” को साथ लेकर जिनधर्म की अतिशय प्रभावना भारत भूमि में फैला रहे हैं। 25 दिसंबर शनिवार को आचार्य भगवन ससंघ की यह मंगल यात्रा धर्मनगरी आगरा मे पहुँचीआगरा महानगर में गूंजी गुरुवर विमर्श सागर जी की वाणी(छीपीटोला चहका है, भक्तों का दिल महका है।आज आगरा वालों का भक्ति में दिल बहका है।
मुनि भक्तों की यह, हो हो-२, नगरी कहलाए रे ।।
जीवन है पानी की बूंद, कब मिट जाए रे ।
होनी अनहोनी हो-हो-2 कब क्या घट जाए रे ।।
आज बड़ा दिन है। आपके नगर में विशाल चतुर्विध संघ पधारा है इसीलिए आपके लिए आज का दिन बड़ा दिन हो आपके घर में आपकी ही दो बेटियों नगर गौरव आर्यिका विद्यांत श्री और आर्यिका विमलांत श्री जो आपके आगरा का नाम सम्पूर्ण विश्व में फैला रही है। अपने घर आई है,  और ‘आगरा तो हमारा भी घर बन गया है। क्योंकि आपके हृदय रूपी छोटे से घर में हम निवास करते हैं।आज का दिन 2015 से हमारे लिए बड़ा दिन बन गया था। जब बुरे खण्ड के सिहक्षेत्र अहार जी में हमारी संघस्य बाल ब्रह्मचारिणी निशु दीदी ने जीते-जी नव जीवन प्राप्त किया था। दीदी के शरीर में ऐसी अस्वस्थ अवस्था बन गई थी जिसे रंग के बडे बडे डॉक्टर्स भी कहने लगे कि कोई-कोई केस ऐसे होते हैं जिनका विज्ञान के पास भी कोई हल नहीं होता। ध्यान रखना, बंधुओ । हमारे भगवान वीतरागी होते हैं, आप सोचते होंगे कि भगवान हमे कर नहीं देते लेकिन मैं कहूंगा कि जो हमारे नीलागी भगवान देते है वह करी मौर नहीं मिलता 25 दिसम्बर 2015 को अहार जी के बड़े बाबा भगवान शान्तिनाय स्वामी की’ श्री शान्ति भक्ति’ के माहात्म्य से विशु दीदी असाध्य रोग से बाहर निकलकर पूर्ण स्वस्थ अवस्था अर्थात नव जीवन को प्राप्त किया था। मैं आज आगरा आया हूँ। आगरा गुरु भक्तों की नगहरी है और मैं आगरा में मात्र अपने भक्तों के आह‌वान पर आया है। मंदिरों न्डी कमेटी तो नव-नवेली दुल्हन की तरह घूंघट डाले सिर झुकाए बैठी है। ध्यान रखना जान्‌कों को अपने कर्तव्य का निर्वाह करना चाहिए। मैं तो आज आया हूँ और आगे भी आता रहूँ‌गा ।
मैं बहुत प्रफुल्लित हूँ प्रसन्न चित्त हूँ आप सभी भक्तों की भक्ति को देखकर । 16 वर्ष पूर्व 2008 में चन्दाप्रभु भगवान ने चातुर्मास कराया था और पार्श्वनाथ स्वामी ने पंचकल्याणक कराया था और भगवान शान्तिनाथ स्वामी विराजमान हुए थे। आज चन्दा बाबा और पार्श्वनाथ स्वामी के देखकर मेरा तो हृदय कमल सा खिल गया। मैं तो अपने प्रभु में मिलन करने आया हूँ

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here