आचार्य चरक – चिकित्सा शास्त्र के प्रवर्तक – विद्यावाचस्पति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन भोपाल

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चरक एक महर्षि एवं आयुर्वेद विशारद के रूप में विख्यात हैं। वे कुषाण राज्य के राजवैद्य थे। इनके द्वारा रचित चरक संहिता एक प्रसिद्ध आयुर्वेद ग्रन्थ है। इसमें रोगनाशक एवं रोगनिरोधक दवाओं का उल्लेख है तथा सोना, चाँदी, लोहा, पारा आदि धातुओं के भस्म एवं उनके उपयोग का वर्णन मिलता है।
यहाँ यह उल्लेख करना अनिवार्य होगा कि चरक संहिता एक चिकित्सा ग्रन्थ ही नहीं वरन यह एक जीवन दर्शन हैं इसमें यह बतलाया गया हैं की आप अपना जीवन कैसे सुन्दर और सुखमय बना सकते हैं .इस ग्रन्थ में बहुत ही बहुमूल्य सूत्र हैं जो आज के वैज्ञानिक की पहुँच से परे हैं बशर्ते उन्हें व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता हैं .इस ग्रन्थ में अद्भुत योगों का संग्रह हैं जो समय के साथ परीक्षित हैं .परिक्षण में किये जाने वाले जानवरों को बचाया जा सकता हैं .
आचार्य चरक ने आचार्य अग्निवेश के अग्निवेशतन्त्र में कुछ स्थान तथा अध्याय जोड्कर उसे नया रूप दिया जिसे आज चरक संहिता के नाम से जाना जाता है । 300-200 ई. पूर्व लगभगआयुर्वेद के आचार्य महर्षि चरक की गणना भारतीय औषधि विज्ञान के मूल प्रवर्तकों में होती है।चरक की शिक्षा तक्षशिला में हुई ।इनका रचा हुआ ग्रंथ ‘चरक संहिता’ आज भी वैद्यक का अद्वितीय ग्रंथ माना जाता है। इन्हें ईसा की प्रथम शताब्दी का बताते हैं। कुछ विद्वानों का मत है कि चरक कनिष्क के राजवैद्य थे परंतु कुछ लोग इन्हें बौद्ध काल से भी पहले का मानते हैं।आठवीं शताब्दी में इस ग्रंथ का अरबी भाषा में अनुवाद हुआ और यह शास्त्र पश्चिमी देशों तक पहुंचा।चरक संहिता में व्याधियों के उपचार तो बताए ही गए हैं, प्रसंगवश स्थान-स्थान पर दर्शन और अर्थशास्त्र के विषयों की भी उल्लेख है।उन्होंने आयुर्वेद के प्रमुख ग्रन्थों और उसके ज्ञान को इकट्ठा करके उसका संकलन किया । चरक ने भ्रमण करके चिकित्सकों के साथ बैठकें की, विचार एकत्र किए और सिद्धांतों को प्रतिपादित किया और उसे पढ़ाई लिखाई के योग्य बनाया ।यह सब ठीक है।
चरकसंहिता आयुर्वेद में प्रसिद्ध है। इसके उपदेशक अत्रिपुत्र पुनर्वसु, ग्रंथकर्ता अग्निवेश और प्रतिसंस्कारक चरक हैं।
प्राचीन वाङ्मय के परिशीलन से ज्ञात होता है कि उन दिनों ग्रंथ या तंत्र की रचना शाखा के नाम से होती थी। जैसे कठ शाखा में कठोपनिषद् बनी। शाखाएँ या चरण उन दिनों के विद्यापीठ थे, जहाँ अनेक विषयों का अध्ययन होता था। अत: संभव है, चरकसंहिता का प्रतिसंस्कार चरक शाखा में हुआ हो।
चरकसंहिता में पालि साहित्य के कुछ शब्द मिलते हैं, जैसे अवक्रांति, जेंताक (जंताक – विनयपिटक), भंगोदन, खुड्डाक, भूतधात्री (निद्रा के लिये)। इससे चरकसंहिता का उपदेशकाल उपनिषदों के बाद और बुद्ध के पूर्व निश्चित होता है। इसका प्रतिसंस्कार कनिष्क के समय 78 ई. पू .के लगभग हुआ।
त्रिपिटक के चीनी अनुवाद में कनिष्क के राजवैद्य के रूप में चरक का उल्लेख है। किंतु कनिष्क बौद्ध था और उसका कवि अश्वघोष भी बौद्ध था, पर चरक संहिता में बुद्धमत का जोरदार खंडन मिलता है। अत: चरक और कनिष्क का संबंध संदिग्ध ही नहीं असंभव जान पड़ता है। पर्याप्त प्रमाणों के अभाव में मत स्थिर करना कठिन है।
चरक संहिता —प्राचीन भारत के सामाजिक-आर्थिक तथा पर्यावरणीय इतिहास का स्रोत
चरकसंहिता केवल प्राचीन भारतीय चिकित्सा की दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि इसमें भारत के तत्कालीन समाज के आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरण-सम्बन्धी स्थितियों का भी वर्णन है। ग्रन्थ में भारत के भौतिक भूगोल का वर्णन ‘जंगल’, ‘आनूप’, ‘साधारण’ आधि शब्दों के माध्यम से किया गया है। इसके बाद इन क्षेत्रों में पाये जाने वाले वृक्षों, वनस्पतियों, झीलों, नदियों, पशु-पक्षियों आदि का वर्णन है।
अनेक औषधियों के नाम उनके प्राप्ति-क्षेत्र के नाम पर है, जैसे माघदी, मघद से; काश्मार्य, कश्मीर से। विभिन्न अध्यायों में आये हुए अनेक स्तनपोषियों, सरीसृपों, कीटों, मछलियों, उभयचरों, संधिपादों और पक्षियों की सूची दी है
चरकसंहिता में इस बात का उल्लेख भी है कि प्राचीन भारत के लोगों की भोजन सम्बन्धी आदतें और पसन्द अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग थीं।बहलिक, पहलव, चीन, शूलिका, यवन, तथा शक आदि देशों के लोग मांस खाते थे। प्राच्य देश के लोग मत्स्य (मछ्ली) पसन्द करते थे। सिन्धु देश के लोग दूध पसन्द करते थे जबकि अश्मक और अवन्तिका के लोग अधिक तैलीय भोजन तथा खट्टी चीजे खाते थे। दक्षिण देश (दक्षिणी भारत) के लोग पेय पसन्द करते थे जबकि उत्तर और पश्चिम के लोग मन्थ पसन्द करते थे। मध्यदेश (मध्य भारत) के लोग यव (जौ), गेहूँ, और दूध की बनी वस्तुएँ पसन्द करते थे।
आदर्श जीवन शैली के पथ प्रदर्शक आचार्य चरक को वंदन अभिनन्दन और मानव जाति उनके उपक्रम से हमेशा ऋणी रहेगा .
विद्यावाचस्पति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन संरक्षक शाकाहार परिषद् A2 /104 पेसिफिक ब्लू ,नियर डी मार्ट, होशंगाबाद रोड, भोपाल 462026 मोबाइल ०९४२५००६७५३

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