आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज सहित17 संतों की जन्म भूमि सनावद में मुनि दीक्षा के 25 वर्षों बाद मुनिश्री प्रयोग सागर व प्रबोध सागर महाराज का हुआ मंगल आगमन

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मध्यप्रदेश का सनावद नगर तप त्याग और साधना की भूमि हैं। तप कर अपने आप को वैराग्यपथ पर अग्रसर कर  साधु संतों की नगरी से 17 पिच्छी धारी संत हुए है। 25 वर्ष के बाद संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य मुनिश्री प्रयोग सागर महाराज व मुनिश्री प्रबोध सागर महाराज का मंगल आगमन 28दिसंबर 2023 को हुआ। समाजजनों ने जगह  जगह मुनिराजों का पाद प्रक्षालन व आरती कर स्वागत किया। शहर के मुख्य मार्गों से होकर निकला जुलूस जैन धर्मशाला में सभा के रूप में परिवर्तित हुआ। जहां आचार्य श्री आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज वह आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चित्र के
समक्ष अतिथियों ने चित्र अनावरण व दीप प्रज्ज्वल किया। मंगलाचरण सुमधुर भजन गायक  प्रदीप पंचोलिया ने किया।
जो अंतर की ओर ले जाए वह दर्शन ही सार्थक मुनिश्री प्रबोध सागर जी।
धर्म सभा में मुनिश्री प्रबोध सागर महाराज ने
कहा आज जो दिखने में आता है उसे प्रदर्शन कहते हैं लेकिन अंतर की ओर जो ले जाता है वह दर्शन है। महाराज श्री ने कहा प्रदर्शन द्वारा ही दर्शन की अनुभूति
का सौभाग्य मिलता है। इस घोर पंचम
काल में भी वीतरागता के प्रति इतनी आस्था को लेकर चल रहे हैं, इसे
देख बहुत आनंद होता है। यह व्यक्ति
विशेष की प्रभावना नहीं है, यह वीतरागता की प्रभावना है। व्यक्ति विशेष की प्रभावना नहीं होती है। प्रभावना होती
है वीतराग धर्म की। जो भी उनके प्रति प्रयत्नशील है, उन्हीं की प्रभावना होती है।
आज का वातावरण देखकर ऐसा लगा
कि पंचम काल में भी वीतरागता के प्रति
अटूट श्रद्धा है।
संस्कारों के कारण आज इस मुकाम पर हूं मुनिश्री प्रयोग सागर जी।
मुनिश्री प्रयोग सागर महाराज ने संबोधित करते हुए कहा कि दादाजी, माता-पिता ने  हमें जो संस्कार दिए  इसलिए आज हम मुनि अवस्था में हैं। मुनिश्री ने कहा साधु संत और सज्जन पुरुष जो होते हैं वह कभी दूसरों के द्वारा जो उपकार किए हैं उन्हें कभी भूलते नहीं। आज जहां बैठा हूं उस सनावद समाज, घर परिवार के प्रति साथ में पढ़े मित्रगण जो यहां बैठे हैं ,उन सभी से यह कहता हूं कि यह संकल्प ले की महाराज आप जहां भी रहेंगे हम एक वर्ष में एक बार वहां जरूर आएंगे। माता-पिता ने तो हमें संस्कार दिए लेकिन इस भूमि का प्रभाव है कि इस निमाड़ की वसुंधरा ने 17 पिच्छी धारी संतों को जन्म दिया। संस्कारों का प्रभाव है कि यह परंपरा आज भी जारी है। जन्मभूमि के प्रति भाव व्यक्त करते हुए कहा कि जननी मां जन्मभूमि का गौरव स्वर्ग से भी ऊपर है।  सनावद में दिगंबरत्व संस्कारों की शुरुआत और  वैराग्य का बीजारोपण जिन्होंने किया वह वात्सल्य वारिधि आचार्यश्री वर्धमान सागर महाराज है।  समय-समय पर उस पर खाद पानी भी आवश्यक होता है। बीजारोपण तो आचार्यश्री वर्धमान सागर महाराज ने किया व उसे खाद पानी देने का काम आर्यिका पूर्णमति माताजी ने किया। उनकी प्रेरणा और उनके संस्कारों का ही प्रभाव था कि आज हम इस अवस्था में  बैठे हैं। सनावद की जन्मभूमि जिसने ऐसे सपूत दिए जो श्रमण संस्कृति की ध्वजा को फहरा रहे हैं जिनमें सबसे पहले आचार्य वर्धमान सागर महाराज का नाम आता है। इस जन्म भूमि से महान संतों ने जन्म – लिया उसका एकमात्र कारण है कि यह सनावद की भूमि तीन सिद्ध क्षेत्र से घिरी है,इसमें सिद्धवरकूट, ऊन पावागिरी , बावनगजा है।दोनों मुनिराज ने नगर के सभी जिनालयों के दर्शन किए। मुनिश्री प्रयोग सागरजी महाराज के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य प्रकाशचंद जैन परिवार को प्राप्त हुआ। वहीं शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य सावित्री बाई कैलाशचंद जटाले राजेश  हीरो परिवार को प्राप्त हुआ। वहीं मुनिश्री प्रबोध सागर महाराज के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य पवन कुमार विनीश कुमार गोधा परिवार को मिला। शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य आशीष जैन बंटी को प्राप्त हुआ।
25 वर्षों के पश्चात हुए  के आगमन से सनावद नगर में अत्यंत हर्ष और उत्साह का वातावरण रहा। नगर के प्रमुख मार्गों पर रंगोली पोस्टर बैनर आदि लगाए गए नगर को सजाया गया और अपूर्व उत्साह के साथ संपूर्ण निमाड़ वासी इस पावन बेला को अपने  स्मृति पटल में अंकित करने के लिए बेताब थे। क्षेत्रीय विधायक सचिन बिरला नगर पालिका अध्यक्ष सुनीता इंदर बिरला ,नगर पालिका उपाध्यक्ष नयना मनीष चौधरी, सहित अनेक नेताओं ने भी पहुंचकर अगवानी में हिस्सा लिया। मुनि श्री के आगमन के दौरान सर्वधर्म समभाव का दृश्य भी सामने आया जब  वर्धमान चौक पर जुलूस पहुंचा  तो वहां स्थित बोहरा समुदाय के व्यवसायी ने अपनी दुकान से काजू, किशमिश,बादाम,मखाने ,सूखे मेवे  बाटना प्रारंभ कर दिया।अत्यंत प्रफ्फुलित मन  से उनका उत्साह देखते ही बनता था ।
सुबह 8:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक भव्य जुलूस नगर में निकाला उपरांत मुनि श्री के मंगल प्रवचन संपन्न हुए ।संभावना है कि मुनिश्री की शीतकालीन योजना सनावद नगर में संपन्न होगी। सनावद नगर के युवा श्रेयांश और संदेश विगत 25वर्ष से दिगंबर दीक्षा धारण कर का दिगंबरत्व संदेश संपूर्ण भारतवर्ष में प्रदान कर रहे हैं। मुनि त्यागी कमेटी के अध्यक्ष  मुकेश जैन पेप्सी के मार्गदर्शन में युवाओं ने साफे बांधे वह सफेद कुर्ता पजामा पहनकर जुलूस को सुंदर रूप प्रदान किया। नगर पालिका उपाध्यक्ष प्रतिनिधि आशीष जैन चौधरी ने व अमरावती के अंकित जैन संपूर्ण नगर में स्वागत के पोस्टर   लगाए।
राजेंद्र जैन महावीर 217 सोलंकी कॉलोनी सनावद जिला खरगोन मध्य प्रदेश

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