आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज का बेंगलुरू प्रवास, आठ वर्षों बाद वापसी

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तप के माध्यम से हम अपनी आत्मा को शुद्ध कर सकते हैं और परमात्मा की प्राप्ति कर सकते हैं। अन्तर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर
औरंगाबाद संवादाता नरेंद्र  अजमेरा पियुष कासलीवाल  कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में आठ वर्षों बाद तीर्थराज सम्मेद शिखर पर्वत की स्वर्ण भद्र कूट पर उत्कृष्ट सिंहनिष्क्रिडित व्रत की 557 दिन की अखण्ड मौन और कठोर तप साधना करने वाले साधना महोदधि, अन्तर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज अपने चतुर्विध संघ के साथ पधारे हैं।
 शिविर का आयोजन
14 से 18 मई के बीच आयोजित इस प्रवास के दौरान एक अनोखा शिविर आयोजित किया गया है, जिसमें 08 से 80 वर्ष के लोग भाग ले सकते हैं। शिविर का समय सुबह 05:45 से 08:45 और शाम 06:30 से 08:30 तक रखा गया है। इस शिविर का उद्देश्य साधकों को ध्यान, योग और जैन धर्म के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराना है।
 तप और साधना
आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज की तप साधना अत्यंत कठोर और अनुकरणीय है। उन्होंने 557 दिनों तक अखण्ड मौन व्रत का पालन किया है, जो एक असाधारण उपलब्धि है। इस साधना के माध्यम से उन्होंने आत्मा की शुद्धि और अध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त किया है।
 प्रातःकाल शिविर
17 मई को तृतीय दिवस के संध्या शिविर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भक्तों और साधकों ने आचार्य श्री के प्रवचनों का लाभ उठाया और गुरुदेव अंतर्मना की चर्या से प्रेरणा ली। आचार्य श्री ने अपने प्रवचनों में आत्मा की शुद्धि, तप, त्याग और साधना के महत्व पर प्रकाश डाला।
 गुरु पाद पूजा
19 मई को सुबह गुरु पाद पूजा और आशीर्वाद समारोह का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दिन आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज स्वयं उपस्थित रहकर भक्तों को आशीर्वाद देंगे। यह पूजा उनके तप और साधना की महत्ता को दर्शाती है और भक्तों को अध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।
बेंगलुरू प्रवास की महत्ता
इस बेंगलुरू प्रवास का उद्देश्य जैन धर्म के सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार करना और लोगों को अध्यात्मिक उन्नति की ओर प्रेरित करना है। आचार्य श्री के प्रवास के दौरान अनेक धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिनमें बच्चों से लेकर वृद्धों तक सभी ने भाग लिया।
 संध्या शिविर के विशेष पल
संध्या शिविर के दौरान आचार्य श्री ने अपने जीवन के अनुभवों को साझा किया और साधकों को तप और साधना के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि तप के माध्यम से हम अपनी आत्मा को शुद्ध कर सकते हैं और परमात्मा की प्राप्ति कर सकते हैं।
 बेंगलोर मै पूर्णता की ओर अनूठा उत्सव:-
यह प्रवास एक अनूठा उत्सव की तरह रहा है, जिसमें आचार्य श्री के अनुयायियों को उनके साथ समय बिताने और उनके मार्गदर्शन में साधना करने का अवसर मिला है। इस अवसर पर अनेक धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें भक्तों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
 समापन समारोह
19 मई को गुरु पाद पूजा और आशीर्वाद समारोह के साथ इस शिविर का समापन होगा। यह समारोह भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दिन उन्हें आचार्य श्री से आशीर्वाद प्राप्त होगा। इस अवसर पर अनेक धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें भक्तों को आचार्य श्री के मार्गदर्शन में अध्यात्मिक उन्नति का अवसर मिलेगा।
इस प्रकार, आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज का बेंगलुरू प्रवास एक ऐतिहासिक और अध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण आयोजन है, जिसने भक्तों को अध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है।
नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद

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