फादर्स डे मनाने की कहानी! ——-विद्यावाचस्पति -डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन भोपाल

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हम हर साल जून माह के तीसरे सप्ताह में फादर्स डे मनाते हैं और पिता के प्रति प्रेम व्यक्त करते हैं। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है, कि यह परिकल्पना आई हां से और इसकी शुरुआत कैसे हुई? जानिए फादर्स डे के पीछे छुपी इस कहानी को –
माना जाता है कि फादर्स डे सर्वप्रथम 19 जून 1910 को वाशिंगटन में मनाया गया। साल 2017 में फादर्स-डे के 107 साल पूरे हो गए। इसके पीछे भी एक रोचक कहानी है- सोनेरा डोड की।
सोनेरा डोड जब नन्ही सी थी, तभी उनकी मां का देहांत हो गया। पिता विलियम स्मार्ट ने सोनेरो के जीवन में मां की कमी नहीं महसूस होने दी और उसे मां का भी प्यार दिया। एक दिन यूं ही सोनेरा के दिल में ख्याल आया कि आखिर एक दिन पिता के नाम क्यों नहीं हो सकता? ….इस तरह 19 जून 1910 को पहली बार फादर्स डे मनाया गया।
1924 में अमेरिकी राष्ट्रपति कैल्विन कोली ने फादर्स डे पर अपनी सहमति दी। फिर 1966 में राष्ट्रपति लिंडन जानसन ने जून के तीसरे रविवार को फादर्स डे मनाने की आधिकारिक घोषणा की।1972 में अमेरिका में फादर्स डे पर स्थायी अवकाश घोषित हुआ।
फि‍लहाल पूरे विश्व में जून के तीसरे रविवार को फादर्स डे मनाया जाता है। भारत में भी धीरे-धीरे इसका प्रचार-प्रसार बढ़ता जा रहा है। इसे बहुराष्ट्रीय कंपनियों की बढती भूमंडलीकरण की अवधारणा के परिप्रेक्ष्य में भी देखा जा सकता है और पिता के प्रति प्रेम के इजहार के परिप्रेक्ष्य में भी।
फादर्स डे बस आने ही वाला है। ऐसे में अगर आप भी यह सोच नहीं पा रहे हैं कि इस बार फादर्स डे को स्पेशल कैसे बनाएं और पापा को गिफ्ट में क्या दें तो हम आपके लिए लेकर आए हैं कुछ कूल आइडियाज।
हर साल जून महीने के दूसरे रविवार को फादर्स डे मनाया जाता है। जिस तरह एक बच्चे की लाइफ में मां का योगदान अतुलनीय है। उसी तरह पिता का प्यार, उनकी डांट और समझ भी बच्चे के भविष्य को बनाने में अहम योगदान देता है। लिहाजा फादर्स डे के दिन पिता को स्पेशल फील करवाना तो बनता है। इतने समय तक आपके पापा ने आपकी खुशियों के लिए क्या कुछ नहीं किया अब बारी आपकी है उनके चेहरे पर मुस्कान लाने की। ऐसे में आप भी फादर्स डे के मौके पर अपने पिता को कुछ बेहतरीन चीजें गिफ्ट में दे सकते हैं…
अगर पापा को पसंद है चाय
अगर आपके पापा को भी एक कप चाय बेहद पसंद है और उनकी सुबह और शाम चाय के बिना अधूरी है तो आप उन्हें बेहतरीन स्पेशल टी ब्लेंड्स और टी वरायटीज गिफ्ट में दे सकते हैं। इन दिनों मार्केट में कई फ्लेवर की चाय मौजूद है। आप चाहें तो अपने पिता की पसंद को ध्यान में रखते हुए खूबसूरत वुडन बॉक्स में टी बैग्स गिफ्ट में दे सकते हैं।
बिजनेस ट्रिप के लिए परफेक्ट गिफ्ट
अगर आपके पिता बिजनेसमैन हैं या फिर अक्सर उन्हें ऑफिस के काम से शहर से बाहर जाना पड़ता है तो आप उनकी इस बात को ध्यान में रखते हुए उनकी पर्सनैलिटी से मैच करता हुअ वॉलिट, डॉक्यूमेंट होल्डर या फिर ब्रीफकेस गिफ्ट में दे सकते हैं। आप चाहें तो अच्छे और ब्रैंडेड कंपनियों के लेदर बैग्स डैड को गिफ्ट में देकर उन्हें खुश कर सकते हैं।
अगर टाइम से प्यार है आपके पापा को
अगर आपके पापा भी बेहद पंक्च्युल हैं और उन्हें समय से बेहद प्यार है, अगर वह आपको सुबह 6.30 पर यह कहकर उठाते हैं कि 8 बज गए तो आप उन्हें एक अच्छी सी वॉच गिफ्ट में दे सकते हैं। अगर आपके पापा के पास पहले से वॉच है तब भी इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता। एक से ज्यादा घड़ी होने का मतलब है कि पापा के पास कई ऑप्शन्स होंगे और वह चेंज कर-करके घड़ियां पहन पाएंगे।
पापा का तनाव कम करने की कोशिश
अगर आपके पिता के कंधों पर घर और ऑफिस की बहुत सारी जिम्मेदारियां जिसकी वजह से अक्सर वह स्ट्रेस और तनाव में रहते हैं तो वक्त आ गया है कि आप पापा का तनाव कुछ कम करने की कोशिश करें। इसके लिए आप उन्हें रिलैक्सिंग स्ट्रेस फ्री स्पा ट्रीटमेंट गिफ्ट में दे सकते हैं। इसके अलावा आप चाहें तो उन्हें अरोमा ऑइल डिफ्यूजर भी गिफ्ट में दे सकते हैं जो बड़ी आसानी से ऑनलाइन मिल जाते हैं।
मुझे मोहब्बत है अपने हाथों की सब लकीरों से,
ना जाने पापा ने कौनसी ऊँगली को पकड़कर चलना सिखाया था।
नसीब वाले हैं जिनके सर पर पिता का हाथ होता हैं,
ज़िद पूरी हो जाती हैं सब गर पिता का साथ होता हैं।
दुनिया की भीड़ में सबसे करीब जो है,
मेरे पापा मेरे खुदा मेरी तकदीर वो है।
पिता हारकर बाज़ी हमेशा मुस्कुराया,
शतरंज की उस जीत को मैं अब समझ पाया।
मुझे रख दिया छाँव में खुद जलते रहे धूप में,
मैंने देखा है ऐसा एक फरिश्ता अपने पिता के रूप में।
जो चाहूँ वो मिल जाए मुमकिन नहीं,
ये किस्मत है मेरे पापा का घर नहीं।
जो मांगता हूँ चुपचाप दे दिया कर,
ऐ ज़िंदगी तू कभी तो मेरे पिता जैसी बन।
बेमतलब सी इस दुनिया में वो ही हमारी शान है,
किसी शख्स के वजूद की ‘पिता’ ही पहली पहचान है।
आपके ही नाम से जाना जाता हूँ “पापा”,
भला इस से बड़ी शोहरत मेरे लिए क्या होगी।
खुशिया जहाँ की सारी मिल जाती है,
जब पापा की गोद में झपकी मिल जाती है।
आप का गुस्सा देखा मैंने काश मै समझ जाता,
वो गुस्सा नही आपका अपनापन है, आई मिस यु पापा (साभार)
अंत में —
मुझे विरासत में दे गए अनेकों कहानियां ,किताबें ,
सीखा गए जीवन में धरम का सार
विपरीत स्थितिओं में रखो समता भाव
अल्प संग्रह परिग्रह में है सुख का सार

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