भोपाल में आयोजित ‘ग्लोबल वेदा 1.0’ अंतरराष्ट्रीय आयोजन में डॉ. आस्था जैन की सशक्त भूमिका
सनावद। भारतीय संस्कृति की अमूल्य स्वास्थ्य परंपरा आयुर्वेद को विश्व पटल पर स्थापित करने की दिशा में भोपाल में आयोजित ‘ग्लोबल वेदा 1.0’ अंतरराष्ट्रीय पंचकर्म इंटर्नशिप प्रोग्राम न केवल आयुर्वेद के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हुआ, बल्कि जैन समाज के लिए भी अत्यंत गौरव का विषय बना। जैन जगत के प्रभावी लेखक, संपादक एवं ओजस्वी वक्ता राजेन्द्र जैन ‘महावीर’ सनावद की सुपुत्री डॉ. आस्था जैन की इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में सक्रिय सहभागिता ने जैन जगत का गौरव वैश्विक स्तर पर बढ़ाया हैं।
इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन डॉ. आस्था जैन ने मेंटोर के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए आयुर्वेद के वैश्विक विस्तार में उल्लेखनीय योगदान दिया। उन्होंने आयुर्वेद चिकित्सकों को प्रशिक्षण प्रदान किया, सत्रों के संचालन, चिकित्सकीय मार्गदर्शन , आभार प्रदर्शन जैसे दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन कर जैन जगत का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच पर गौरवान्वित किया।
*आयुर्वेद को वैश्विक पहचान देने की ठोस पहल*
धर्म आयुर्वेद, भोपाल एवं दक्षिण कोरिया के वेलपार्क हॉस्पिटल के संयुक्त तत्वावधान में यह तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय आयोजन 14 से 16 जनवरी 2026 तक सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में भारत सहित विभिन्न देशों से 40 से अधिक अनुभवी आयुर्वेद चिकित्सकों ने सहभागिता की।
इस दौरान पंचकर्म चिकित्सा, आयुर्वेद की वैज्ञानिक प्रामाणिकता, वैश्विक उपयोगिता तथा अंतरराष्ट्रीय विस्तार की रणनीतियों पर गंभीर विमर्श हुआ। दक्षिण कोरिया से डॉ. किम मियांग ने ऑनलाइन सहभागिता कर अपने विचार साझा किए।
*वैश्विक स्तर पर आयुर्वेद का निरंतर विस्तार*
डॉ. आस्था जैन के गुरु एवं धर्म आयुर्वेद के संस्थापक वैद्य प्रशांत तिवारी एवं वैद्य जया सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि वे विगत पाँच वर्षों से दक्षिण कोरिया में आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार हेतु सतत कार्य कर रहे हैं। अब बाली (इंडोनेशिया) में भी आयुर्वेद के विस्तार की दिशा में ठोस पहल प्रारंभ हो चुकी है, जिसे ‘ग्लोबल वेदा 1.0’ के पश्चात विश्व के अनेक देशों में नई गति मिलने की संभावना है।
*समापन समारोह में आयुर्वेद विकास का संकल्प*
समापन समारोह के मुख्य अतिथि पं. विष्णु राजोरिया (अध्यक्ष, परशुराम कल्याण बोर्ड – केबिनेट मंत्री दर्जा) ने आयुर्वेद के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों की सराहना करते हुए इसे जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान किया।
बाली (इंडोनेशिया) से पधारे विशिष्ट अतिथि पद्मश्री अगम इंद्रा उद्यान मनुबा ने कहा कि भारत के प्राचीन ज्ञान आयुर्वेद के लिए अब वैश्विक द्वार खुल चुके हैं और ‘ग्लोबल वेदा’ इस दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। अतिथियों ने डा.आस्था को सम्मानित भी किया ।
*जैन समाज के लिए गर्व का क्षण*
इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में डॉ. आस्था जैन की सक्रिय और प्रभावी भूमिका ने यह सिद्ध किया कि जैन समाज की प्रतिभा ने वैश्विक मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। यह उपलब्धि जैन समाज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है, जो युवा पीढ़ी को आयुर्वेद एवं भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ने की नई दिशा प्रदान करेगी।
उल्लेखनीय है कि डॉ. आस्था जैन विगत वर्षों में दो बार तीन माह की अवधि के लिए वेलपार्क हॉस्पिटल, दक्षिण कोरिया में अपनी सेवाएँ प्रदान कर चुकी हैं। डॉ. आस्था जैन ने कहा कि भारत सरकार एवं मध्यप्रदेश सरकार आयुर्वेद को वैश्विक पटल पर स्थापित करने में निरंतर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
डॉ. सुनील जैनसंचय















