अंतरराष्ट्रीय जैन सम्मेलन में डॉ. दिलीप धींग का व्याख्यान

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अहमदाबाद।  श्रुत रत्नाकर (अहमदाबाद), फेडरेशन ऑफ जैन एसोसिएशन इन नॉर्थ अमेरिका (जैना) तथा वर्ल्ड जैन कॉन्फेडरेशन (मुंबई) के संयुक्त तत्वावधान एवं आचार्य नंदीघोष सूरीश्वर की निश्रा में गुजरात विश्वविद्यालय, अहमदाबाद में 11 जनवरी 2026 को संपन्न पाँचवें अंतरराष्ट्रीय जैन सम्मेलन में साहित्यकार डॉ. दिलीप धींग ने कहा कि मौजूदा सीएसआर का विचार अपरिग्रह का ही आधुनिक रूप है। ‘व्यावसायिक नैतिकता और सीएसआर में जैन धर्म का योगदान’ विषय पर अपने व्याख्यान में उन्होंने कहा कि जैन समाज में कॉर्पाेरेट सामाजिक उत्तरदायित्व, स्वैच्छिक सामाजिक कर्तव्य के रूप में सदियों से विद्यमान है। यही वजह है कि परोपकार और देश की जीडीपी में आनुपातिक रूप से जैनों का योगदान सर्वाधिक है। डॉ. धींग ने कहा कि अपरिग्रह उत्पादन और अर्जन को बाधित नहीं करता, अपितु संविभाग और समवितरण पर जोर देता है।
बतौर सत्राध्यक्ष डॉ. धींग ने कहा, भगवान महावीर की व्रत व्यवस्था में व्यावसायिक नैतिकता सिर्फ मनुष्य तक सीमित नहीं, अपितु पशु-पक्षियों तक विस्तृत है। इसमें मानवाधिकार, पर्यावरण और जीव-जंतुओं की रक्षा पूरा ध्यान रखा गया है। सत्राध्यक्ष के रूप में डॉ. धींग ने प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया। निदेशक डॉ. जितेंद्र बी. शाह के संयोजन में आयोजित इस वैश्विक आयोजन में दी जैन फाउंडेशन (बेंगलुरु) और वर्धमान चौरिटेबल फाउंडेशन (संयुक्त राज्य अमेरिका) भी सहभागी रहे। इसमें साध्वी स्मितप्रिया, समणी कुसुमप्रज्ञा, जैना के अध्यक्ष अतुल शाह, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति श्रीनिवास वरखेड़ी, जसवंत मोदी एवं भारत के विभिन्न प्रदेशों तथा विश्व के अनेक देशों के विद्वान व श्रोता उपस्थित थे। हितांश ने संचालन किया।
संलग्न फोटो : गुजरात विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर किंजल शाह को प्रमाण पत्र देते सत्राध्यक्ष डॉ. दिलीप धींग

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