योग-साधना के 5वें कुंभ में आचार्य प्रसन्न सागर व बाबा रामदेव बताएंगे उपवास के फायदे, 4 सेवाभावियों को मिलेंगे पुरस्कार बांसवाड़ा में ‘हर मास एक उपवास’ कार्यक्रम 7 अप्रैल को

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बांसवाड़ा शहर के डूंगरपुर रोड पर लोधा पॉवर हाउस के सामने स्थित एक निजी हॉल में योग एवं साधना का 5वां बड़ा कुंभआयोजित होने जा रहा है। ‘हर मास एक उपवास’ नाम का यह कार्यक्रम प्रसिद्ध जैन संत अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर महाराज और योग गुरु बाबा रामदेव के सानिध्य में होगा। 7 अप्रैल की दोपहर 2 बजे से आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से कई बड़ी हस्तियां
आचार्य प्रसन्न शामिल होंगी। सागर महाराज
इनमें रिटायर्ड आईएएस एवं पूर्व मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश दुर्गा शंकर मिश्रा, प्रख्यात कवि डॉ. हरिओम पंवार, प्रसिद्ध कथावाचक कमलेश भाई शास्त्री, महामंडलेश्वर स्वामी हितेश्वरानंद सरस्वती, बाबा सत्यनारायण मौर्या और मोटिवेशनल स्पीकर उज्वल पाटनी मौजूद रहेंगे। इस पहल की शुरुआत 13 दिसंबर को दिल्ली के भारत मंडपम से हुई थी, जिसमें करीब 6 लाख लोगों ने एक उपवास का संकल्प लिया था।
हर मासएक उपवास’ क्या है? आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने बताया कि आत्मा और
शरीर की शुद्धि का सबसे सरल उपाय है।’उपवास’, जिन लोगों ने उपवास को अपनाया, उन्होंने अपने परिवार ही नहीं, बल्कि समाज और देश को भी जीने की प्रेरणा दी है। उन्होंने बताया कि शरीर की भूख भोजन है और आत्मा की भूख उपवास है। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि भूख एक बीमारी है और भोजन एक औषधि। इसलिए जो भोजन को औषधि समझकर ग्रहण करते हैं, वे ‘दवा खाने’ से बच जाते हैं, जबकि जो भोजन को दबा दबा कर खाते हैं वह ‘दवाखाने’ जाते हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में हर व्यक्ति को सप्ताह में एक उपवास या 15 दिन में नहीं तो कम से कम एक महीने में एक उपवास तो करना ही चाहिए। ऐसा करने से शरीर की सैकड़ों बीमारियां अपने आप चली जाती हैं, जिससे आप अस्पताल जाने से बच जाते हैं।
स्वस्थ शरीर, मन और जीवन ही उद्देश्य
आचार्य ने बताया कि इस मुहिम का किसी धर्म, मजहब, पंथ या संप्रदाय से कोई संबंध नहीं है। इसका प्रयोजन केवल लोगों के स्वस्थ शरीर, मन और जीवन से है। सरकार से हमारी अपील है कि जिस प्रकार देश में राष्ट्रीय अवकाश बनाए हैं। वैसे ही हर महीने की 7 तारीख को एक दिन का ‘उपवास दिवस’ घोषित करे। एक दिन के उपवास से लोगों को स्वास्थ्य लाभ होने के साथ ही देश में 72 लाख टन राशन और खरबों रुपए की बचत हो सकती है।
देशभर से चुने हुए चार सेवाभावी होंगे पुरस्कृत
कार्यक्रम में देशभर से चुने हुए गणमान्य व्यक्तियों को उनके सेवा, करुणा, विशिष्ट ज्ञान और तप-साधना के क्षेत्र में पुरस्कृत किया जाएगा। इनमें तपस्वी सम्राट आचार्य सन्मति सागर सेवा पुरस्कार, आर्थिका सुपार्शमति वशिष्ठ पुरस्कार, आर्यिका पद्मश्री करुणा पुरस्कार और अंतर्मना साधना महोदधि पुरस्कार शामिल हैं। इनका चयन निर्णायक मंडल (जूरी) ने आचार्य प्रसन्न सागर महाराज और बाबा रामदेव के सानिध्य में तय किया है। इसमें प्रत्येक को 2.50 लाख रुपए की सम्मान राशि, सम्मान पत्र, शॉल और दिव्य चिह्न भेंट किए जाएंगे।
ये हैं उपवास के तीन प्रकार आचार्य प्रसन्न सागर ने बताया कि इस उपवास को करने के तीन प्रकार हैं। पहला निर्जला उपवास, जिसमें न खाना न पीना और पूर्ण संयम के साथ किया जाने वाला व्रत। यदि इससे काम न चले तो दूसरा- जल के साथ, इसमें निराहार रहकर जल, शर्बत या शिकंजी के साथ और इससे भी काम न चले तो तीसरा- फल के साथ, इसमें कोई भी एक फल और जल के साथ उपवास कर सकते हैं। ऐसी जानकारी प्रचार प्रसार संयोजक नरेंद्र अजमेरा औरंगाबाद ने दी है

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