यदि वर्तमान में भगवान महावीर होते तो

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यदि वर्तमान में भगवान महावीर होते तो :
— महावीर दीपचंद ठोले छत्रपति संभाजीनगर
महामंत्री, श्री भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ संरक्षिणी महासभा (महाराष्ट्र प्रांत)
प्रस्तावना
भगवान महावीर (ईसा पूर्व 599–527) केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं,बल्कि मानव सभ्यता के नैतिक विकास की शिखर चेतना हैं। उन्होंने अहिंसा, अपरिग्रह, अनेकांत और आत्मानुशासन के माध्यम से जीवन-दर्शन का ऐसा सार्वकालिक स्वरूप प्रस्तुत किया, जो काल और परिस्थिति से परे है।आज जब विश्व हिंसा,पर्यावरणीय संकट, उपभोक्तावाद, मानसिक तनाव और सामाजिक विभाजन से जूझ रहा है, तब यह प्रश्न प्रासंगिक हो उठता है —यदि वर्तमान में भगवान महावीर होते तो उनके संदेश किस प्रकार मार्गदर्शन प्रदान करते? यह लेख इसी प्रश्न का दार्शनिक और सामाजिकविश्लेषण प्रस्तुत करता है।
अहिंसा : वैश्विक संघर्षों के मध्य शांतिकासमाधान
आधुनिक विश्व में युद्ध, आतंकवाद, वैचारिक कट्टरता और सामाजिक हिंसा निरंतर बढ़ रही है। महावीर का मूलसंदेशथा“अहिंसा परमो धर्मः”
आचारांग सूत्र में महावीर कहते हैं “ सव्वे पाणा न हन्तव्वा” (सभी प्राणियों को हिंसा से बचाना चाहिए)।
यदि वे आज होते, तो अहिंसा को केवल शारीरिक हिंसा तक सीमित न रखकर वाणी की हिंसा (घृणास्पद भाषण),विचारों की हिंसा (कट्टरता),
आर्थिकहिंसा(शोषण),तथा प्रकृति के प्रति हिंसा(पर्यावरण दोहन)के लिए महावीर की अहिंसा आजकेमानवाधिकार विमर्श औरशान्ति अध्ययन के लिए नैतिक आधार प्रस्तुत करती है।वे अहिंसा को समग्र जीवन दृष्टि के रूप मे पुनर्परिभाषित करते।महावीर की अहिंसा आज के वैश्विक शांति आंदोलन की आधारशिला बन सकती है। अपरिग्रह : उपभोक्तावादी संस्कृति के विरुद्ध संतुलित जीवन
वर्तमान समाज उपभोग और प्रदर्शन पर आधारित है। संसाधनों का असमान वितरण और अंधाधुंध उपभोग वैश्विक असंतुलन को जन्म दे रहा है।ऊनका कहना है जितना आवश्यक है ऊतना ही संग्रह करो।अति संग्रह विग्रह का कारण है।परिग्रह अशान्ति का अग्रदूत है।तत्त्वार्थ सूत्र में कहा गया है
“परिग्रहवृद्धिर्दुःखवृद्धिः”(परिग्रह की वृद्धि से दुःख की वृद्धि होती है।)
यदि महावीर आज होते, तो वे ‘मिनिमलिज़्म’ और ‘सस्टेनेबल लिविंग’ को धर्म का अंग बताते।वे सिखाते कि भौतिक प्रगति तभी सार्थक है जब वह नैतिक संतुलन के साथ हो।
अपरिग्रह आज के आर्थिक असंतुलन, मानसिक तनाव, नैतिकता और पर्यावरणीय संतुलन का प्रभावी समाधान प्रस्तुत करता है।
अनेकांतवाद : वैचारिक ध्रुवीकरण का उत्तर
समकालीन समाज में वैचारिक असहिष्णुता बढ़ रही है। सोशल मीडिया और राजनीतिक विमर्श में ध्रुवीकरण स्पष्ट दिखाई देता है।
महावीर का अनेकांतवाद कहता है “स्याद्वाद” — सत्य के अनेक आयाम हैं।
यह दर्शन संवाद, सह-अस्तित्व और सहिष्णुता की संस्कृति को विकसित करता है।
यदि महावीर आज होते, तो वे समाज को यह सिखाते कि मतभेद शत्रुता नहीं, दृष्टिकोण की विविधता है।
अनेकांतवाद लोकतांत्रिक मूल्यों और बौद्धिक स्वतंत्रता का आध्यात्मिक आधार है।
पर्यावरणीय संकट और महावीर का जीवन-दर्शन
जलवायु परिवर्तन, जैव-विविधता का ह्रास और प्राकृतिक संसाधनों का दोहन मानव अस्तित्व के लिए चुनौती बन चुका है।महावीर ने सूक्ष्म जीवों तक के प्रति करुणा की भावना विकसित की।उनकी दृष्टि में पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और वनस्पति भी जीवन-तत्व हैं।
आधुनिकपर्यावरण-चिंतन (Deep Ecology) और महावीरका जीव दर्शन आश्चर्यजनक रूप से साम्य रखते हैं।यदि वे आज होते, तो पर्यावरण संरक्षण को केवल सामाजिक कर्तव्य नहीं, बल्कि आध्यात्मिक साधना घोषित करते।
मानसिक स्वास्थ्य और आत्मानुशासन
आज का युवा अवसाद, प्रतिस्पर्धा और अस्तित्व-संकट से जूझ रहा है। महावीर का संदेश था “अप्पा सो परखु”(स्वयं को पहचानो।)उनका ध्यान, तप और आत्मसंयम का मार्ग आधुनिक मनोविज्ञान की ‘माइंडफुलनेस’ अवधारणा से मेल खाता है। यदि महावीर आज होते, तो वे बाह्य उपलब्धियों से अधिक आंतरिक संतुलन को महत्व देते।
निष्कर्ष
यह प्रश्न कि “यदि वर्तमान में महावीर होते तोक्या करते?”
दरअसल वा मानवता को आंतरिक शान्ति,सामाजिक समरसताऔर पर्यावरणीय संतुलन की दिशा मे प्रेरित करते।दरअसल यह आत्ममंथन का प्रश्न है।महावीर का संदेश कालातीत है।
वेआज भी प्रासंगिक हैं क्योंकि अहिंसा आज भी आवश्यक है।अपरिग्रह आज भी समाधान है।
अनेकांत आज भी संवाद का सेतु है,
और आत्मानुशासन आज भी शांति का मार्ग है।महावीर शरीर से अनुपस्थित हो सकते हैं,वे ईस धरातल पर पुन्हः अवतरित भी होना असंभव है पर ऊनके जैसे तो हम बन सकते है क्यो कि उनके सिद्धांत प्रत्येक संवेदनशील आत्मा में जीवित हैं। और जब भी कोई व्यक्ति क्रोध पर विजय पाता है,जब भी कोई लोभ त्यागता है,जब भी कोई प्राणीमात्र के प्रति करुणा रखता है वहीं महावीर का पुनर्जन्म होता है।
श्री संपादक महोदय, जयजिनेद्र। महावीर जयंति निमित्त यह आलेख प्रकाशित कर उपकृत करे ।धन्यवाद।
महावीर ठोले।
7588044495

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