यदि जीना एक कला है तो उसका प्रबन्धन एक विज्ञान है – नितेश जैन
कैसे करें परीक्षाओं की तैयारी
मुरैना/अम्बाह (मनोज जैन नायक) परीक्षा की तैयारी करना अक्सर तनावपूर्ण हो सकता है, लेकिन एक सही रणनीति और योजना के साथ आप न केवल अच्छे अंक ला सकते हैं बल्कि विषय को गहराई से समझ भी सकते हैं। यदि जीना एक कला है तो उसका प्रबन्धन एक विज्ञान है। लोकसेवा प्रबंधक नीतीशकुमार जैन के अनुसार परीक्षाओं के सम्बन्ध में कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों पर चर्चा करते हैं –
1. योजना और समय सारणी – बिना योजना के पढ़ाई करना अंधेरे में तीर चलाने जैसा है। सबसे पहले यह देखें कि सिलेबस में कौन से विषय ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। और कितना पढ़ना है उसके अनुसार शेड्यूल बनाएं एवं प्रत्येक विषय के लिए समय तय करें। स्वयं के प्रति सकारात्मक रहते हुए समय सारणी का पालन करें ।
2. सक्रिय अध्ययन तकनीक – कठिन विषयों को उस समय पढ़ें जब आपका दिमाग सबसे ज्यादा फ्रेश हो (जैसे सुबह के समय)। एकाग्रता के लिए 25-30 मिनट पढ़ाई के बाद 5 मिनट का छोटा ब्रेक लें। इससे एकाग्रता बनी रहती है।
3. अभ्यास और रिवीजन – जो पढ़ा है, उसे समय समय के अंतराल में दोहराते रहें , पिछले 5-10 सालों के प्रश्न पत्र हल करें। इससे आपको परीक्षा के पैटर्न और समय प्रबंधन का अंदाजा होगा। शॉर्ट नोट्स बनाएं इससे रिवीजन आसान हो जाता है दूसरों को सिखाएं, अगर आप किसी टॉपिक को किसी और को समझा सकते हैं, तो इसका अर्थ है कि आप उसे अच्छी तरह समझ गए हैं।
4. स्वस्थ जीवनशैली – एक स्वस्थ शरीर में तेज दिमाग का निवास होता है। जिसके लिए आवश्यक है , आपके शरीर को जितनी नींद की आवश्यकता है उतनी नींद अवश्य लें , हल्का-फुल्का खाना खाएं। जिससे आलस्य न आये,
खुद को हाइड्रेट रखें, समय-समय पर पानी पियें , यह एकाग्रता और संकल्प शक्ति बढ़ाने के लिए यह बहुत प्रभावी है। वॉटर थेरेपी या जल चिकित्सा एक प्राचीन और वैज्ञानिक तरीका है जिसका उपयोग शरीर को शुद्ध करने और मानसिक स्पष्टता बढ़ाने के लिए किया जाता है। जब भी आप मानसिक रूप से थका हुआ या विचलित महसूस करें, एक गिलास ठंडा पानी घूँट-घूँट करके पिएं। यह आपके नर्वस सिस्टम को रीसेट करता है।
तनाव कम करने के लिए गहरी सांस लें, शांत बैठें और अपनी आती-जाती सांसों पर ध्यान दें। जब मन भटके (और वह भटकेगा ही), तो बिना खुद को कोसे वापस सांसों पर ले आएं। यही “वापस लाना” ही दिमाग की असली कसरत है।
30 सेकेंड के लिए उँगलियों से आँखों को बंद कर्रें जिससे आपकी आँखों की थकान कम होगी,
मूवमेंट थेरेपी का अर्थ केवल व्यायाम करना नहीं है, बल्कि शरीर की गति का उपयोग अपने मानसिक स्वास्थ्य, भावनाओं और दिमागी एकाग्रता को बेहतर बनाने के लिए करना है।
वातावरण को ‘फोकस-फ्रेंडली’ बनाएं- अपने कार्यस्थल से वह सब हटा दें जो ध्यान भटकाता है। जैसे फोन को अपनी नजरों से दूर रखें।
ध्यान और प्राणायाम : यह आपके मस्तिष्क के ‘प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स’ को मजबूत करता है, जो निर्णय लेने और आत्म-नियंत्रण के लिए जिम्मेदार है। रोज 10 मिनट का ध्यान भी जादुई असर करता है ध्यान का मतलब विचार शून्य होना नहीं है, बल्कि विचारों को आते-जाते देखना है।
एक समय में एक काम : मल्टीटास्किंग से दिमाग की शक्ति कम होती है। एक समय पर सिर्फ एक ही विषय पर ध्यान लगायें
संकल्प की शक्ति केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक मानसिक बल है जो असंभव को संभव बनाने की क्षमता रखता है। जब आप किसी कार्य को करने का “निश्चय” कर लेते हैं, तो आपकी पूरी मानसिक और शारीरिक ऊर्जा एक ही दिशा में केंद्रित हो जाती है।
स्वामी विवेकानंद ने कहा था— “एक विचार लें, उस विचार को अपना जीवन बना लें, उसके बारे में सोचें, उसके सपने देखें और उस विचार को जिएं।” यही संकल्प की पराकाष्ठा है।
छोटे संकल्पों से शुरुआत करें: पहले छोटे लक्ष्य तय करें (जैसे: अपने कार्यों को स्वयं पूर्ण करना या “आज मैं 1 घंटा बिना फोन छुए पढ़ूँगा”)। जब आप छोटे संकल्प पूरे करते हैं, तो आपका आत्मविश्वास बढ़ता है और संकल्प शक्ति की मांसपेशी मजबूत होती है।
स्वयं को सकारात्मक रखें और यह सोच बनाये कि “डर के आगे जीत है” अपने विचारों और भावनाओं को वश में करना ही सफलता की पहली सीढ़ी है।












