विलियमबक्कम में 1000 वर्ष पुरानी प्राचीन ‘आदि भगवान’ की मूर्ति के लिए भव्य नए जिनालय का निर्माण
12 वर्षों के निरंतर प्रयासों के बाद प्राण-प्रतिष्ठा सम्पन्न
चेंगलपट्टू तमिलनाडु। विलियमबक्कम में 1000 वर्ष पुरानी प्राचीन ‘आदि भगवान’ की मूर्ति के लिए भव्य जिनालय का निर्माण पूरा हो गया। रविवार, 30 नवंबर को भारी तूफान की चेतावनी के बावजूद, मंदिर उद्घाटन, विमान कलश स्थापना तथा आदिनाथ भगवान की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा आगम विधि के अनुसार अत्यंत धूमधाम से सम्पन्न हुई।
कैसे मिली प्राचीन मूर्ति?
चेंगलपट्टू से 7 किमी दूर, चेंगलपट्टू–वालाजाबाद राजमार्ग के समीप स्थित विलियमबक्कम गाँव में यह मूर्ति ‘थानथोन्द्री अम्मन’ मंदिर के पास इमली के एक विशाल वृक्ष की जड़ों में जकड़ी हुई अवस्था में मिली थी। ‘अहिंसा वॉक’ (अहिंसा यात्रा) के सदस्य श्री जीवकुमार द्वारा वर्ष 2013 में इस प्राचीन मूर्ति की खोज की गई।
12 वर्षों का लंबा संघर्ष
मूर्ति को उचित स्थान पर स्थापित करने के लिए ‘अहिंसा वॉक’, जैन युवा मंच और स्थानीय उत्साही लोगों ने वर्षों तक प्रयास किया। 2017 में ‘अहिंसा वॉक-44’ के माध्यम से जनजागरण किया गया। इमली के वृक्ष की जड़ों से मूर्ति को निकालना अत्यंत कठिन कार्य था। प्रारंभ में इसे भजन मंदिर और बाद में एक वाहन शेड में सुरक्षित रखा गया। कई बार भूमि खोजने के प्रयास हुए, पर योजनाएँ आगे नहीं बढ़ सकीं।
पंचायत ने दी भूमि प्रयास हुए सफल
फरवरी 2025 में ग्राम प्रधान श्री एकाम्बरम, नाट्टामै श्री पंचाक्षरम और मुरुगन भक्त श्री मुरुगन के सहयोग से पंचायत ने एक आधिकारिक प्रस्ताव पारित करते हुए मंदिर निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराई। इसके बाद भक्तों के दान से गर्भगृह, मुखमंडप और विमान (शिखर) सहित एक सुंदर व भव्य जैन मंदिर का निर्माण किया गया।
* उद्घाटन और प्राण-प्रतिष्ठा
उद्घाटन समारोह में जिनालय पूजा, हवन और धार्मिक अनुष्ठान प्रसिद्ध विद्वान श्री सुरेश उपाध्याय (स्वर्गीय उपाध्याय श्री देवराज के शिष्य) द्वारा संपन्न कराए गए। गाँव के लोगों, भक्तों और यात्रियों के लिए अन्नदान का विशेष आयोजन किया गया।
मूर्ति की जैन विरासत का पुनर्जीवन
प्राचीन 1008 श्री आदिनाथ जिन बिम्ब की जैन परंपरा को पुनर्जीवित करना ‘अहिंसा वॉक’ के लिए गर्व का विषय है। जैन समाज ने ग्रामवासियों और दानदाताओं का विशेष धन्यवाद किया, जिन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे इस जिनालय को स्थान देने में सहयोग किया। उल्लेखनीय है कि अहिंसा वाक एक संगठन है। जो प्रतिमाह भ्रमण करके पुरानी धरोहरों की खोजबीन करते हैं यह उन्हीं की खोज का परिणाम है। दानवीर श्री एमके जैन चेन्नई में बताया कि यह मंदिर जैन समाज के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि है जिसमें तमिलनाडु की जैन समाज ने मुक्त हस्त से सहयोग देकर इस मंदिर को निर्मित कराया है।
कार्यक्रम में दानवीर,दक्षिण के भामाशाह श्री एम.के. जैन, श्री दिनेश सेठी एवं तीर्थ क्षेत्र कमेटी के पदाधिकारीयो ने व सहयोगियों ने उपस्थिति दर्ज कराई व मंदिर निर्माण की सराहना करते हुए बड़ी धन राशि दान में दी। विशेष तौर पर श्री मुरुगन (चेंगलपट्टू), श्री शेखर (गुडुवांचेरी) और श्री एस. धनंजयन (पूनमल्ली) के सराहनीय योगदान का उल्लेख किया गया।
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