पलवल, 29 अगस्त — दशलक्षण महापर्व के पावन अवसर पर जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल में आज दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म की पूजा बड़े ही श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुई। धाम में प्रातः से ही श्रद्धालुजनों का आगमन आरंभ हो गया था और पूरे परिसर में धर्ममय वातावरण व्याप्त रहा।
सुबह मंगल ध्वनि और स्तुति गान के बीच भूगर्भ से अवतरित श्री चैतन्य चिंतामणि पार्श्वनाथ भगवान का पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा विधिवत संपन्न की गई। इसके उपरांत उत्तम मार्दव धर्म की विशेष पूजा-अर्चना कर भक्तों ने आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त किया।
इस अवसर पर नितिन जैन ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा —
“मार्दव का अर्थ है — विनम्रता। यह धर्म हमें सिखाता है कि मनुष्य के भीतर से अहंकार, गर्व और मान जैसी विकृतियाँ तभी दूर हो सकती हैं जब वह अपने व्यवहार में सच्ची नम्रता लाता है। अहंकार सभी पापों का मूल कारण है और विनम्रता ही उसके विनाश का उपाय है। जो व्यक्ति अपने अहंकार का त्याग कर विनम्रता को जीवन में उतार लेता है, वही सच्चे अर्थों में धार्मिक कहलाने योग्य होता है।”
वहीं मेघा जैन ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा —
“उत्तम मार्दव धर्म जीवन की वास्तविक शोभा है। भले ही व्यक्ति कितनी ही ऊँचाइयाँ क्यों न प्राप्त कर ले, यदि उसमें विनम्रता नहीं है तो उसका व्यक्तित्व अधूरा है। अहंकार व्यक्ति को पतन की ओर ले जाता है जबकि विनम्रता उसे महानता प्रदान करती है। यही कारण है कि शास्त्रों में मार्दव धर्म को आत्मा का आभूषण कहा गया है। जो व्यक्ति सदैव सरल और नम्र रहता है, वह समाज में सच्चा आदर्श स्थापित करता है।”
पूरे आयोजन के दौरान धाम में श्रद्धालुजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। वातावरण “जय जिनेन्द्र” और भक्ति गीतों की गूंज से परिपूर्ण रहा। पूजा के उपरांत सभी श्रद्धालुओं ने “उत्तम मार्दव धर्म” का संकल्प लिया और यह निश्चय किया कि जीवन में सदैव अहंकार का त्याग कर विनम्रता का आचरण करेंगे।
धाम प्रबंधन समिति ने बताया कि दशलक्षण महापर्व के आगामी दिनों में प्रतिदिन अलग-अलग धर्मों की पूजा होगी, जिससे श्रद्धालु आत्मिक शांति और धर्मलाभ प्राप्त करेंगे।