नवागढ़ (मनोज जैन नायक) श्री नवागढ़ गुरुकुलम् में 77 वाँ गणतंत्र दिवस समारोह अत्यंत हर्षोल्लास, अनुशासन एवं देशभक्ति के वातावरण में भव्य रूप से मनाया गया।
इस गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन गुरुकुलम् के मार्गदर्शक *श्री जय निशांत जी भैयाजी* के सानिध्य एवं निर्देशन में तथा गुरुकुलम् के शिक्षक ब्र. संध्या दीदी, श्री अनुराग सर, श्री विनीत सर, श्री संजय सर के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अतिथियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली।
कार्यक्रम में ब्र. मानी दीदी जी, उमा जी, श्रीमति सविता जी मेरठ, श्री वीरचंद्र जी नैकोरा, श्री अशोक जी मैनवार, श्रीमती किरण जैन शिक्षिका, श्रीमती आशा जैन शिक्षिका बड़ागांव, हेमलता जैन कैशली, सहित नवाई ग्राम के रहवासी, बच्चे एवं ग्राम में संचालित शासकीय विद्यालय के शिक्षकगण उपस्थित रहें।
कार्यक्रम का शुभारंभ गुरुकुलम् के संस्थापक *श्री पंडित गुलाब चंद्र जी पुष्प जी* के चित्र के समक्ष विधिवत *दीप प्रज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पित* कर किया गया। इसके उपरांत विधिवत *ध्वजारोहण* किया गया। जैसे ही तिरंगा लहराया, पूरा गुरुकुल परिसर “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के नारों से गूंज उठा। ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगान हुआ, जिससे वातावरण और अधिक राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत हो गया।इसके पश्चात भारत माता एवं देश के समस्त *महान क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों के चित्रों के समक्ष पुष्प अर्पित* कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। सभी उपस्थित जनों ने 2 मिनिट मौन रखकर राष्ट्र के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर सपूतों को नमन किया।
ध्वजारोहण के पश्चात गुरुकुलम् के विद्यार्थियों द्वारा देशभक्ति गीत, समूह नृत्य, कविताएँ, भाषण तथा लघु नाटिकाओं सहित अनेक *सांस्कृतिक कार्यक्रमों* की आकर्षक प्रस्तुतियाँ दी गईं। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में देशप्रेम, त्याग, एकता और संविधान के महत्व का सशक्त संदेश देखने को मिला, जिसे उपस्थितजनों ने करतल ध्वनि के साथ सराहा।
इस अवसर पर शिक्षक विनीत जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि गणतंत्र दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि हमारे देश का संविधान अनगिनत बलिदानों और संघर्षों की देन है। उन्होंने कहा कि सच्चा देशप्रेम केवल शब्दों में नहीं, बल्कि ईमानदारी, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा से अपने दायित्व निभाने में निहित है। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान किया। गुरुकुलम् के मंत्री *श्री अशोक जी मैनवार* ने भी अपने उद्बोधन में कहा कि भारत की पहचान उसकी संस्कृति, संस्कार और एकता में है। उन्होंने कहा कि गुरुकुल परंपरा भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जो विद्यार्थियों को चरित्रवान और राष्ट्रभक्त बनाती है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया।
कार्यक्रम के अंतर्गत गुरूकुलम् निर्देशक श्री जयकुमार जी निशांत जी** ने अपने विचार रखते हुए कहा कि संविधान हमें स्वतंत्रता देता है, परंतु उस स्वतंत्रता की रक्षा करना हम सभी का नैतिक कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों को सत्य, सेवा, परिश्रम और अनुशासन को अपने जीवन का आधार बनाने की प्रेरणा दी तथा शिक्षकों के योगदान की सराहना की। इस अवसर पर शिक्षिका *संध्या दीदी* ने कहा कि स्वतंत्रता और गणतंत्र केवल अधिकार नहीं, बल्कि बड़ी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति संवेदनशील नागरिक तैयार करना होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को संस्कारयुक्त जीवन अपनाने की प्रेरणा दी।
पूरे कार्यक्रम का सुव्यवस्थित एवं प्रभावशाली संचालन शिक्षक अनुराग जैन द्वारा किया गया। कार्यक्रम के समापन पर *शिक्षक श्री संजय जी* ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया, एवं उपस्थित जन समूह को मिष्ठान वितरित करते हुए कार्यक्रम का समापन किया। समारोह शांतिपूर्ण, अनुशासित एवं राष्ट्रप्रेम से परिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ, जिसने सभी के मन में देश के प्रति गर्व और कर्तव्यबोध की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया।
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