श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन महासभा (धर्म संरक्षिणी, तीर्थ संरक्षिणी, श्रुत संवर्धिनी, एवं महिला महासभा) की
प्रथम संयुक्त प्रबंधकारिणी की बैठक शनिवार, 31 जनवरी 2026, दोपहर 2:00 बजे
स्थान- जैन भवन, शहीद भगत सिंह मार्ग, नई दिल्ली, में राष्ट्रीय अध्यक्ष – महासभा – श्री गजराज जैन गंगवाल जी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई
बैठक में निम्नलिखित पदाधिकारी तथा सदस्य उपस्थित थें जिनके हस्ताक्षर उपस्थिति पुस्तिका में हैः-
बैठक का प्रारंभ मंगलाचरण से हुआ। तत्पश्चात महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गजराज जैन गंगवाल, श्री हंसमुख जैन गांधी, श्री प्रकाश जैन बोहरा आदि द्वारा दीपप्रज्वलन किया गया।
महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री श्री पवन जैन गोधा ने प्रबंधकारिणी की बैठक में उपस्थित सभी महानुभावों का हार्दिक अभिनन्दन व आभार व्यक्त किया। उन्होंने सभी पदाधिकारियों व सदस्यों से विगत मनोमालिन्य को भूलकर एक जुट होकर महासभा को सुसंगठित एवं बलवती बनाने का अनुरोध किया। सभी कार्यकत्र्ता महासभा के अपने आप में पदाधिकारी हैं, इस भावना व उत्साह से हमें कार्य करना है। महासभा की प्रतिष्ठा सम्पूर्ण देश-विदेश में हो इसका प्रयास करना चाहिये। महासभा को जन-जन की महासभा बनाने हेतु इसकी सदस्य संख्या का विस्तार करना है।
धर्म संरक्षिणी महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री कमल बाबू जैन ने महासभा में युवाओं की भागीदारी पर जोड़ दिया। उन्होंने महासभा के विधान में यथोचित आवश्यक संशोधन हेतु विधान समिति गठित करने की बात कही। महासभा की सभी इकाइयां मिलकर महासभा को सुद्ढ़ करें तथा महासभा के अल्याण हेतु तत्पर रहे।
धर्म संरक्षिणी महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री हंसमुख जैन गांधी ने बैठक को बताया कि सन् 1926 में महासभा का अधिवेशन मथुरा में हुआ था। हमें इस वर्ष उसका शताब्दी समारोह मनाना चाहिए। हमें 2027 की जनगणना हेतु प्रत्येक जैन को जागरूक करना है। जैन गजट को देश के कोने-कोने में पहुंचाना चाहिए। द्य ैवबपंस डमकपं पर महासभा के कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार की व्यवस्था करनी चाहिए। तथा महासभा का अधिवेशन देश के विभिन्न प्रदेशों में होना चाहिए।
धर्म संरक्षिणी महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, श्री ललित जैन सरावगी ने कहा कि महासभा को नवीन कार्यप्रणाली व नवीन रीति-रिवाजों से कार्य करना चाहिए। महासभा के सदस्यों की संख्या दो लाख तक करनी चाहिए। महासभा को धार्मिक गतिविधियों के साथ सामाजिक और राजनैतिक कार्य भी करने चाहिए। महासभा में ।तजपपिबपंस प्दजमससपहमदबम का समुचित उपयोग करना चाहिए। युवा महासभा के श्री विकेश मेहता ने अपने ओजस्वी विचार व्यक्त करते हुये कहा कि जैन राजनैतिक चेतना मंच इतने दिनों से कार्यरत है कि लेकिन आज लोक सभा में हमारा कोई प्रतिनिधि नहीं है। जनगणना कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु हमें गांव-गांव जाकर जागरुकता अभियान चलाना चाहिये। हम कोमल हैं, लेकिन कायर नहीं। श्री विकेश मेहता जी को युवा महासभा का कार्याध्यक्ष मनोनीत किया गया।
जैन राजनैतिक चेतना मंच के राष्ट्रीय महामंत्री श्री ललित जैन ने कहा कि महासभा का अधिवेशन विभिन्न क्षेत्रों में होना चाहिए जिससे महासभा की गतिविधियों का प्रचार-प्रसार होगा। बेलगांव में जैन समाज के लोगो की संख्या अत्यधिक है। वहां महासभा का अधिवेशन होना चाहिए।
कटनी के पूर्व विधायक श्री सुकीर्ति जैन ने महासभा को गठित करने हेतु जिला व राज्य स्तर पर महासभा के कार्यालय को गठित करने का सुझाव दिया।
श्री सुभाष काला ने महासभा की गतिविधियों में विधायक व सांसद से सम्पर्क बढ़ाने पर जोड़ दिया। वे मध्य प्रदेश में जनगणना हेतु जैन समाज के लोगों को जागरुक करने का कार्य कर रहे हैं।
श्रुत संवर्धिनी महासभा के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष, श्री गजेन्द्र पाटनी ने पदाधिकारियों से अनुरोध किया कि हर प्रदेश में महासभा का कार्यालय प्रारंभ किया जाय और राष्ट्रीय अध्यक्ष महोदय हर पदाधिकारी को उसकी जिम्मेदारी दें।
श्रुत संवर्धिनी महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, श्री श्यामलाल जैन कहा कि दिल्ली में दिगम्बर समाज के करीब 80 मन्दिर हैं। हमें उनके पदाधिकारियों के साथ अलग-अलग ग्रुप में बैठक कर महासभा की गतिविधियों की जानकारी दें। इससे महासभा का प्रचार-प्रसार होगा ।
तीर्थ संरक्षिणी महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, श्री अशोक चुडीवाल ने तीर्थ संरक्षिणी के राष्ट्रीय महामंत्री, आदरणीय राजकुमार सेठी द्वारा भेजी गई तीर्थ संरक्षिणी महासभा की गतिविधियों और सम्पूर्ण देश में क्षत-विक्षत मन्दिरों के पुनरुद्धार के रिपोर्ट पढ़कर बैठक को सुनाई।
अशोक ने तीर्थ संरक्षिणी महासभा के कार्यकर्ता आगामी जनगणना कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु सक्रिय रहेंगे, ऐसा विश्वास है। हमारे जैन मंदिरों एवं तीर्थों के कानूनी दस्तावेजों की पूर्ण जानकारी महासभा के पास होनी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार के अतिक्रमण या विवाद से हमारे धार्मिक स्थलों की रक्षा हो सके। इसके लिए स्थानीय प्रभावशाली व्यक्तियों का सहयोग लिया जाए। हमारे प्राचीन जैन ग्रंथों का डिजिटलीकरण किया जाए, ताकि यह अमूल्य धरोहर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सके।आदरणीय श्री गजराज जी गंगवाल जी ने जैन जनगणना अभियान का जो संकल्प लिया है, वह अत्यंत सराहनीय एवं प्रेरणादायक कार्य है। हम सभी को उत्साहपूर्वक आगे आकर इस पुण्य कार्य में सक्रिय सहभागिता निभानी चाहिए। श्री पवन जी ने पर्वतराज शाश्वत क्षेत्र श्री सम्मेद शिखर जी की स्वच्छता अभियान का, जो संकल्प लिया है, वह अत्यंत सराहनीय एवं प्रेरणादायक कार्य है। हम सभी को उत्साहपूर्वक आगे आकर इस पुण्य कार्य में सक्रिय सहभागिता निभानी चाहिए।
महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गजराज जैन गंगवाल ने अपने अध्यक्षीय अभिभाषण में आगामी जनगणना कार्यक्रम की महत्ता के बारे में प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आज देश में हमारी जनसंख्या 4 करोड़ के करीब है, लेकिन 2011 की जनगणना के सरकारी आकडे़ दोषपूर्ण हैं। आगामी जनगणना फाॅर्म के कालम संख्या 7 के धर्म कालम में 6 और जैन शब्द तथा कालम नं. 10 में भाषा कालम 10। में प्राकृत तथा 10ठ में दूसरी भाषा का उल्लेख करें।
महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गजराज जी ने बैठक को बताया कि देश के विभिन्न प्रदेशों में कई जातियां हैं जो जैन तीर्थकरों को अपना आराध्य मानते हैं। वे णमोकार मंत्र का पाठ करते हैं। झारखंड, ओडिसा और पश्चिम बंगाल की सीमा पर सराक जाति, पश्चिम बंगाल में पुण्डरा जाति के लाखों लोग हैं जो भगवान आदिनाथ और पाश्र्वनाथ भगवान तथा भद्रबाहु की आराधना करते हैं। हमें उनको जैन समाज की मुख्य धारा में लाना है तथा आगामी जनगणना में उनका उल्लेख जैन धर्म में करना है। हमें अपनी सदस्य संख्या का विस्तार करना है। सदस्य संख्या बढ़ाने पर हमें भारत सरकार में समुचित प्रतिनिधित्व मिलेगा। प्रदेशों से प्राप्त सदस्यता शुल्क का 75ः प्रतिशत भाग प्रदेश में जनकल्याणकारी कार्यों में खर्च होगा, ऐसी व्यवस्था हमें करनी है। महासभा में युवाओं की भागीदारी बढ़ानी है जिससे हमारी आगामी पीढ़ी महासभा को गति प्रदान करेगी। इस सन्दर्भ में महासभा ने ओजस्वी नेता व प्रखर वक्ता श्री विकेश मेहता को युवा महासभा के कार्यध्यक्ष का दायित्व दिया है। इसी तरह से आन्ध्र प्रदेश व तेलंगाना में महासभा को सुसंगठित करने हेतु श्री संदीप बाकलीवाल तथा झारखंड,श्री संजय पाटनी जैन, असम, श्री मुकेश जैन एड़वोकेट को महासभा का दायित्व प्रदान किया है।
महासभा के क्रिया कालापों से संबंधित समाचार आदिनाथ चैनल पर शीघ्र ही प्रतिदिन प्रसारित किये जायेंगे। प्रबंधकारिणी समिति की बैठक में श्री रवि सेन जैन, श्री कमल अजमेरा, श्री प्रमोद जैन, श्री सन्दीप जैन आदि ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किये।
धर्म संरक्षिणी महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, श्री अजीत जैन चांडूवाड़ ने बताया कि गांधीधाम (गुजरात) में सिद्धचक्र महामंडल विधान का भव्य आयोजन श्री धर्मेन्द्र कुमार जी, शालिनी जी लाला परिवार (इंदौर) द्वारा किया गया था। यह आयोजन प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी आदरणीय प्रदीप भैयाजी “सुरेश” (अशोकनगर), ब्रह्मचारिणी दीदी सविता दीदी (दश प्रतिमाधारी), माया दीदी एवं साधना दीदी के सान्निध्य एवं मार्गदर्शन में अत्यंत आध्यात्मिक, श्रद्धा, भक्ति एवं धूमधाम के साथ संपन्न हुआ।
इस अवसर पर आदरणीय श्री गजराज जैन गंगवाल एवं श्री पवन जैन गोधा सहित महासभा के पदाधिकारियों के निर्देशानुसार श्री भारतवर्षीय दिगंबर जैन महासभा के प्रतिनिधिमंडल, मेरे तथा श्री नरेंद्र जैन गोधा, ट्रस्टी सहित अन्य पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। प्रतिनिधिमंडल द्वारा नागौर जैन समाज एवं गांधीधाम (गुजरात) में महासभा का ध्वज फहराया गया, जिससे समाज में संगठनात्मक एकता एवं उत्साह का संचार हुआ।
श्रुत संवर्धिनी महासभा के महामंत्री श्री शरदराज जैन कासलीवाल ने सभी पदाधिकारियों व सदस्यों का आभार व कृतज्ञता ज्ञापित किया जो देश के विभिन्न प्रदेशों से आकर प्रबंधकारिणी की बैठक को अपने विचारों से लाभान्वित किया। इन्होंने महासभा को नई प्रेरणा व ओज प्रदान किया। हमें पूर्ण विश्वास है कि भविष्य में भी इनका सहयोग व मार्गदर्शन महासभा को प्राप्त होता रहेगा तथा अपने-अपने क्षेत्र में आगामी जनगणना कार्यक्रम में जैन समाज के लोगों को जागरूक करने में सक्रिय रहेंगे।
महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री श्री पवन जैन गोधा ने प्रबंधकारिणी की बैठक में उपस्थित सभी महानुभावों को बताया कि महासभा का उद्देश्य है कि प्रत्येक जैन साधर्मी महासभा का सदस्य बने और संगठन को सशक्त बनाए। इसी क्रम में महासभा सदस्यता संबंधी निम्न विकल्प निर्धारित किए गए हैं। यह महत्वपूर्ण सूचना शीघ्र ही जैन गजट में प्रकाशित की जाएगी।
अंत में महामंत्री श्री पवन जैन गोधा जी के सभी पदाधिकारियों एवं महासभा स्टाफ को धन्यवाद ज्ञापन के साथ बैठक की कार्यवाही सम्पन्न हुई।















