शास्त्रि-परिषद् के अध्यक्ष डॉ. श्रेयांसकुमार जैन को मिला तीर्थंकर ऋषभदेव सम्मान

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संस्कृति मंत्री ने लखनऊ में किया सम्मानित
लखनऊ। उत्तर प्रदेश जैन विद्या शोध संस्थान, लखनऊ (संस्कृति मंत्रालय, उत्तर प्रदेश) के 35वें स्थापना दिवस एवं अलंकरण समारोह के अवसर पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्रि-परिषद् के यशस्वी अध्यक्ष डॉ. श्रेयांसकुमार जी जैन (बड़ौत) को ‘तीर्थंकर ऋषभदेव सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
सम्मान स्वरूप उन्हें एक लाख रुपये की धनराशि, प्रशस्ति पत्र, शाल एवं श्रीफल प्रदान किए गए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री माननीय जयवीर सिंह ने अपने कर-कमलों से यह सम्मान प्रदान किया। समारोह की अध्यक्षता प्रो. अभय कुमार जी जैन ने की।
इस अवसर पर संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि “जीवन को सही दिशा देने की सच्ची कला भगवान महावीर के सिद्धांतों से प्राप्त होती है। उनके विचार आज भी समाज को नैतिकता और संयम का मार्ग दिखाते हैं।”
कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक अमित अग्निहोत्री, संजीव जैन (लखनऊ), विकास सेठी सहित संस्थान के पदाधिकारी, विद्वानजन एवं अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। समारोह के दौरान जैन धर्म एवं संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कुल सात विद्वानों को विभिन्न अलंकरणों से सम्मानित किया गया।
उल्लेखनीय है कि डॉ. श्रेयांसकुमार जी जैन , जैन जगत के सुविख्यात मनीषी एवं ओजस्वी वक्ता हैं। श्रवणबेलगोला में आयोजित विशाल विद्वत् संगोष्ठी एवं सम्मेलन में आपने सर्वाध्यक्ष के रूप में विशेष ख्याति प्राप्त की। जैन दर्शन, साहित्य एवं संस्कृति के क्षेत्र में आपकी सेवाओं के लिए आपको पूर्व में भी अनेक राष्ट्रीय मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है।
‘तीर्थंकर ऋषभदेव सम्मान’ आपके यशस्वी जीवन की उपलब्धियों में एक और स्वर्णिम अध्याय है।
इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर विद्वत्जनों एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा डॉ. श्रेयांसकुमार जी जैन को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की गई हैं।
— डॉ. सुनील जैन ‘संचय’, ललितपुर

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