संतों का दर्शन मंगल उपाध्याय विशेष सागर
जिसके जीवन में गुरु नहीं उसका जीवन शुरु नहीं, गुरु याने मार्ग दर्शक, गुरु के बिना ज्ञान नहीं होता, संयम नहीं होता, हमारे उपर गुरुओं का असीम उपकार है, उनके उपकारों का ऋण हम कभी नहीं चुका पायेगें उक्त उद्गार प.पू. उपाध्याय श्री विशेषसागर जी महाराज ने सर्वज्ञ तीर्थ पुसेगांव में धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा । आगम में उल्लेख है जिसने एक पद एक अक्षर का भी ज्ञान दिया हो, उसे जो भूल जाता । है वह पापी है, फिर जिसने शिक्षा दीक्षा दी हो उस गुरु को जो भूल
जाए वह महापापी है। भैया उपकारी के उपकार को कभी मत भूलना माता-पिता, शिक्षा गुरु और दिक्षा गुरु के उपकार को कभी नहीं भूलना चाहिए। उपाध्याय श्री ने आगे कहा आप लोग सौभाग्य शांली हो कि इस कलि काल में भी सच्चे दिगम्बर साधुओं कादर्शन हो रहा है। संतों का दर्शन मंगल है, लाभ का प्रतिक है संतों की कृपा से दुर्लभ से दुर्लभ कार्य भी सुलभ हो जाता है।
सर्वज्ञ तीर्थ पुसेगांव (महाः) में प.पू. गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी गुरुदेव के अदृश्य सानिध्य व आशीष, प.पू. आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के आशीष, प.पू. आचार्य श्री विभवसागर जी महाराज के पावन सानिध्य एवं प.पू. उपाध्याय श्री विशेषसागर जी महाराज के मार्ग दर्शन व प्रेरणा से दिनांक 18 फरवरी से 8 मार्च २०२६ तक अंतरराष्ट्रीय पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव व महामस्तकाभिषेक पं दिपक जी उपाध्ये सांगली पं. संजय जी सरस चिचोली , पं. अर्थव जी मुलावा, संगीतकार संजय रंगीला भोपाल, राजेंद्र जैन मंच कलाकार उमरगा के मार्ग दर्शन में सम्पन्न होगा। अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा महोत्सव में क्रमशः माता-पिता सौ. मंजली सन्मति रायबागकर कारंजा, सौधर्म इंद्र सौ. अल्का रत्नदिपक चवरे हिंगोली कुबेर सौ. मोनाली दिपक वरवंटे नांदेड़ को प्राप्त हुआ, इनके साथ लगभग 108 जोड़े को पूजन करने का सौभाग्य प्राप्त होगा, महानुष्ठान में महाराष्ट्र प्रांत सहित म.प्र., बिहार, झारखण्ड, गुजः, राजः आदि प्रांतों से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित होंगे।
✍️विनोद रोकडे जैन मालेगांव












