सांगाका बास में मूल नायक अतिशयकारी तीर्थंकर संभव नाथ भगवान का भक्ति भाव से मनाया गया मोक्ष कल्याणक
फागी संवाददाता
24 मार्च
जयपुर जिले की डूंगरी कला पंचायत के गाँव सांगाका बास के करीब अढ़ाई सो वर्ष प्राचीन जैन मन्दिर में मंगलवार को अपने समस्त दुःखों की निर्वृत्ति हेतु निर्वाण की भावना के साथ अतिशयकारी मूलनायक जैन धर्म के तीसरे तीर्थंकर श्री १००८ संभव नाथ भगवान के मोक्ष कल्याण पर निर्वाण लाडू भक्ति भाव से समर्पित किया गया ।
कार्यक्रम में मन्दिर समिति अध्यक्ष पदम जैन बिलाला ने बताया की भगवान संभव नाथ देव का जन्म कार्तिक की पूर्णिमा को श्रावस्ती गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम राजा जितारि और माता का नाम सेना रानी था।तीर्थंकर संभव नाथ का प्रतीक चिह्न घोड़ा था व इनका निर्वाण सम्मेदशिखर से हुआ था कार्यक्रम में प्रातः अभिषेक शान्तिधारा व पूजन के बाद निर्वाण काण्ड वाचन कर भगवान के निर्वाण महोत्सव पर लाडू समर्पित कर धर्म प्रभावना के साथ भगवान की भक्ति की गई, सभी कार्य विधि विधान पूर्वक संपन्न हुआ, शांतिधारा के समय रेनवाल के केवल बिलाला, टीकम बिलाला, जयपुर के दुली चंद बिलाला , चोमू के माल चंद, जनकपुरी के सौभाग अजमेरा, महेश काला , गायत्री नगर के बसंत बाकलीवाल , राधाकिशन पुरा से कमल जैन ,ओम बिलाला विनोद बिलाला सहित कई स्थानों के गणमान्य उपस्थित रहे । पूजन निर्वाण लड्डू आदि के समय हीरामणि , विमला , आशा , किरण , मधु ,तारा , अंजू काला , कमला , चंदा , लाखन आदि की उपस्थिति रही । इधर इसके बाद सभी द्वारा भक्ति भाव के साथ संभवनाथ की आरती की गई ।
राजाबाबू गोधा जैन महासभा मिडिया प्रवक्ता राजस्थान












