सामाजिक संसद का अध्यक्ष चुनने का अधिकार सिर्फ सांसदों को डॉ जैनेन्द्र जैन इंदौर

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सामाजिक संसद का अध्यक्ष चुनने का अधिकार सिर्फ सांसदों को
डॉ जैनेन्द्र जैन
इंदौर
जैन समाज को सदैव नैतिक सुचिता का प्रतीक माना गया है और यह समाज कभी संख्या से नहीं चरित्र से पहचान गया है, लेकिन संप्रति एक कड़वा एवं चिंताजनक सत्य यह है कि जिस विकृति को हम राजनीति में देखते हैं और कोसते हैं वही विकृति जैन समाज में भी दिखाई देने लगी है।
उदाहरण हमारे समक्ष है पिछले कुछ वर्षों से दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के दो अध्यक्ष होने से कुछ लोगों द्वारा एक समाज एक संसद और एक अध्यक्ष एवं मतदाता सूची के शुद्धिकरण की मांग एवं आवश्यकता महसूस की जा रही थी जिस पर किसी को आपत्ति नहीं थी।
इस हेतु दोनों अध्यक्ष की सहमति से एक समन्वय समिति का गठन किया गया एवं संसद अध्यक्ष श्री नरेंद्रजी वेद नेश्री कैलाशजी
वैद को संयोजक मनोनीत किया।श्री कैलाशजी ने अथक प्रयास कर संविधान
सम्मत कुछ लिखित सुझाव एवं निर्देश इस आशा और आगृह के साथ प्रेषित किये कि आप बिंदुवार निर्देशो एवं सुझावों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
इन सुझावों में मुख्य बिंदु था कि सामाजिक संसद के अध्यक्ष का चयन प्रजातांत्रिक प्रणाली से चुनाव के द्वारा किया जाए
एवं चुनाव में चयनित अध्यक्ष को ही दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद का मान्य अध्यक्ष स्वीकार किया जाए।
श्री विनयजी बाकलीवाल की अध्यक्षता में भी समन्वय समिति की बैठक मे यह निर्णय लिया गया था कि मतदाता सूची को अंतिम स्वरूप प्रदान कर साधारण सभा आहुत की जाएगी एवं निर्धारित तिथिको साधारण सभा में अध्यक्ष का निर्वाचन होगा। समिति ने पूर्व में यह भी निर्णय लिया था की समन्वय समिति का कोई भी सदस्य सामाजिक संसद के अध्यक्ष का चुनाव
नहीं लड़ेगा और ना ही किसी को अध्यक्ष घोषित करेगा। लेकिन अपने द्वारा ही बनाए गए नियमों और संयोजक श्री कैलाशजी द्वारा सुझाए गए नियमों को भंग कय असंवैधानिक तरीके से श्री विनयजी बाकलीवाल को ही सामाजिक संसद का अध्यक्ष घोषित कर दिया।
हमारा विरोध किसी व्यक्ति या विनयजी से नहीं है बल्कि संविधान की उपेक्षा कर जिस प्रक्रिया के तहत ताबड़ तोड़ विनय जी को अध्यक्ष घोषित किया उससे है। यह प्रकिया न तो संवैधानिक है और ना ही न्याय संगत इस कारण सामाजिक संसद के सांसद प्रतिनिधियों में भी असंतोष व्याप्त है। यह सर्व विदित है
कि सामाजिक संसद के अध्यक्ष का चुनाव अभी तक प्रजातांत्रिक प्रणाली से जिनालय प्रतिनिधियों (सांसदों) के द्वारा साधारण सभा में ही होता रहा है। यदि इसी प्रक्रिया से विनय जी का निर्वाचन होता तो एक समाज, एक संसद और एक अध्यक्ष की अवधारणा निश्चित रूप से समाज में फलीभूत होती और विरोध भी नहीं होता।
मेरा समाज श्रेष्ठी जनों एवं सांसद प्रतिनिधियों से विनम्र अनुरोध है कि आप मेरे चिंतन पर विचार कर निर्णय लें कि जो हुआ क्या उचित एवं न्याय संगत है? क्या वह सामाजिक संसद एवं दिगंबर जैन समाज की गरिमा एवं हित में है? यदि
नहीं तो 1 फरवरी रविवार को दोपहर 2:00 बजे दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद (कीर्ति स्तंभ) की महावीर बाग में होने वाली विशेष साधारण सभा में सम्मिलित होकर अपना विरोध दर्ज कराऐं ताकि भविष्य में इस तरह की अवैधानिक प्रक्रिया की
पुनरावृत्ति न हो। मेरे इस लेखन से यदि किसी की भावनाओं को ठेस पहुंची हो तो मैं क्षमा प्रार्थी हूं।
डॉक्टर जैनेंद्र जैन पूर्व मंत्री दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद इंदौर

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