समाज सेवा की राह पर बूंदी खण्डेलवाल सरावगी समाज के अध्यक्ष संतोष पाटनी

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समाज सेवा की राह पर बूंदी खण्डेलवाल सरावगी समाज के अध्यक्ष संतोष पाटनी
बंूदी। कहते हैं कि बच्चों को बचपन में जो संस्कार माता-पिता गुरु व परिवारजन से प्राप्त होते हैं ऐसे ही व्यक्तित्व के धनी बूंदी अमर कटला निवासी संतोष पाटनी का जन्म शिखरचंद पाटनी माताश्री कंचन बाई के घर पर 22 दिसंबर 1963 को हुआ। यह बास्केटबाॅल के राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रहे है। इसी के चलते इन्होंने राजकीय सेवा में शारीरिक शिक्षक के रूप में लगभग 32 वर्ष सेवा के बाद 2023 में सेवानिवृत्त हुए हैं। यह राजकीय सेवा में रहते हुए भी इनका धर्म शास्त्र गुरु के प्रति समर्पित रहकर सेवा में समर्पण भाव से लगे रहे।
इनका नित्य नियम भगवान के अभिषेक पूजा करने का नियम है एवं रात्रि भोजन का त्याग, जमीकंद का त्याग व मौन धारण करके भोजन करना इनका स्वभाव रहा है। जब कभी भी दिगम्बर मुनिराजों व साधु साध्वियों का बूंदी मंे प्रवास होता है या चातुर्मास होता है तो उन्हें आहार देकर आत्म संतुष्टि के भाव से प्रसन्न बने रहते हंै।
इनके परिवार में माताश्री कंचन बाई पारिवारिक जिम्मेदारियां से मुक्त होते ही परम पूज्य आचार्य पदमनंदजी महाराज के संघ में सम्मिलित होकर आर्यिका दयाश्री माताजी के नाम से पहचान बनाकर बूंदी की प्रथम आर्यिका बनी। पिछले वर्ष 2025 में इनकी अध्यक्षता में आचार्य प्रज्ञासागर महाराज की धर्म प्रभाविका आर्यिका सत्यमति माताजी का ससंघ चातुर्मास कराया। चातुर्मास कलश स्थापना पर ब्र. पुण्यांश भैया ने कहा इनके परिवार को आर्यिका दयाश्री के परिवार के नाम से जाना जाए।
संतोष पाटनी सरावगी समाज की एक जानी-पहचानी व्यक्तित्व के धनी है। सेवा से बढ़कर कोई सुख नहीं होता, प्रेम से बढ़कर कोई प्रार्थना नहीं होती और सहानुभूति से बढ़कर कोई सौन्दर्य नहीं होता इसी भावना से समाजसेवा में समर्पित भाव से लगे रहने से वर्ष 2025 में समाज के अध्यक्ष भी बने हुए हैं।
वह एक प्रखर वक्ता के साथ साथ कई सामाजिक, शिक्षा विभाग की शिक्षक कर्मचारी सहकारी समिति के दो बार मंत्री भी रह चुके हैं इसके साथ साथ धार्मिक संस्थाओं से जुडे़ हुए हैं। जिसमें यह जिला सरावगी समाज के दो बार मंत्री, बूंदी शहर सरावगी समाज के एक बार कोषाध्यक्ष तथा दो बार मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं। इनकी सबसे बड़ी पहचान युवाओं को धर्म के प्रति व समाज के कार्यों में आगे लाने का हमेशा भाव रहता है। यह जैन गजट के करीब 30 वर्षों से आजीवन सदस्य चले आ रहे हैं। इसी के साथ जैन गजट को समय समय पर सहयोग प्रदान करते रहते हैं।
-रविन्द्र काला
जैन गजट संवाददाता, बूंदी

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