साधु संतों के चित्र देखने से मन में त्याग के भाव बनते हैं

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साधु संतों के चित्र देखने से मन में त्याग के भाव बनते हैं

गणिनी आर्यिका संगममती माता
नैनवा 30 मार्च सोमवार 2026
शांति वीर धर्म स्थल पर आर्यिका संगममती माता ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए बताया कि जिनका शासन काल चल रहा है उनकी हम ने जन्म जयंती मनाई हैं उन्होंने यह भी बताया कि हमें सदा सत्य बोलना झूठ नहीं बोलना अपने सत उपदेश में बताया
प्रत्येक मनुष्य को भगवान ने एक मुंह दो आंखें दो कान और दो पैर दिए हैं उनका उपयोग सही कामों में लगाने से जीवन भर ही अंग साथ देते हैं इन अंगों से गलत कार्य करने से समय के पहले ही अपना साथ छोड़ जाते हैं
आंखों से भगवान के दर्शन महात्मा के दर्शन साधु संतों के दर्शन के लिए है दो पैर तीर्थ वंदना के लिए हैं कान उपदेश सुनने के लिए हैं एक मुंह उनके गुणगान करने के लिए दिए हैं
माता ने भी बताया कि देशभक्ति के चित्र देखने पर मन में देशभक्ति की भावना उत्पन्न होते है साधु संतों की चित्र देखने पर मन में त्याग भावना उत्पन्न होती है
उसी प्रकार जिनेंद्र भगवान के दर्शन शुद्ध भाव होने पर पापो का क्षय होता है
अंतिम में माता ने यह कहा कि भगवान की मूर्ति हमें ना तो कुछ देती है और नहीं दे सकती है मूर्ति के दर्शन करने से आत्मा के परिणाम में शुद्धता आती है उसी पुण्य उदय से संसारी भोग की सामग्री हमें प्राप्त होती है
बाहर से पधारे अतिथियों का माताजी के सानिध्य में स्वागत सम्मान समिति द्वारा किया गया

प्रत्येक मनुष्य को अच्छे फल के लिए प्रयास मेहनत जरुर करना पड़ता है उसी से अच्छे फल की प्राप्ति होती है
जैन समाज प्रवक्ता महावीर कुमार सरावगी ने बताया
माता जी का विहार कल 5:00 बजे शांति हुए जैन धर्मस्थल से नगर फोर्ड के लिए होगा रात्रि विश्राम सुवानिया ग्राम में होगा

महावीर कुमार सरावगी
दिगंबर जैन समाज प्रवक्ता

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