इन्दौर। श्रुतसंवेगी श्रमणमुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में 21 से 22 मार्च 2025 तक श्री दिगम्बर जैन समवसरण मंदिर इन्दौर में सच्चत्थ बोहो अनुशीलन राष्ट्रीय प्राकृत विद्वत् संगोष्ठी सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। संगोष्ठी के निर्देशक डॉ श्रेयांसकुमार जैन बड़ौत व संयोजक पं. विनोदकुमार जैन रजवांस रहे।
चार सत्रों में 12 विद्वानों ने अपने शोधालेख प्रस्तुत किए। प्रथम सत्र में डॉ. सुनील कुमार जैन ‘संचय’- ललितपुर ने सक्कारो की सच्चत्थ बोहो में मीमांसा, ब्र. विनोद भैया -छतरपुर ने सच्चत्थ बोहो में जैन संस्कृति विषय पर आलेख प्रस्तुत किए। सत्र की अध्यक्षता डॉ. श्रेयांस कुमार जैन – बड़ौत ने की। संचालन डॉ. बाहुबली कुमार जैन- इंदौर ने किया।
द्वितीय सत्र में डॉ. सुमित कुमार जैन- उदयपुर ने अप्पसारो चिंतणं अण्णुगहो अनुशीलन सच्चत्थ बोहो के परिप्रेक्ष्य में , डॉ. ब्र धर्मेन्द्र भैया -जयपुर ने सच्चत्थ बोहो में विवेक और धैर्य चिन्तन, डॉ. नरेन्द्रकुमार जैन- टीकमगढ़ ने सच्चत्थ बोहो के परिप्रेक्ष्य में आस्था, एक अनुचिन्तन विषय पर आलेख प्रस्तुत किया।
अध्यक्षता डॉ. अनुपम जैन इंदौर और संचालन डॉ. आशीष जैन- बम्होरी ने किया।
तृतीय सत्र में पं. विनोदकुमार जैन- रजवांस ने चतुर्भावना का वैशिष्ट्य सच्चत्थ बोहो के परिप्रेक्ष्य में, डॉ. श्रेयांसकुमार जैन- बड़ौत ने सच्चत्थ बोहो में शिक्षा बिषयक अनुचिन्तन, डॉ. अनुपम जैन -इन्दौर ने आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज का व्यसन संबंधी चिन्तन विषय आलेख प्रस्तुत किए। अध्यक्षता डॉ. नरेंद्र कुमार जैन -टीकमगढ़ व संचालन डॉ. सुनील जैन ‘संचय’- ललितपुर ने किया।
चतुर्थ सत्र में डॉ. बाहुबली कुमार जैन -इन्दौर ने सच्चत्थ बोहो में दयादमस्त्याग समाधि निष्ठा विषयक चिन्तन , डॉ. आशीष कुमार जैन (बम्होरी)- दमोह ने सच्चत्थ बोहो के संदर्भ-धर्म का वैशिष्ट्य,
डॉ. आशीष कुमार जैन आचार्य -सागर ने सच्चत्थ बोहो का भाषा वैशिष्ट्य ,डॉ. पंकजकुमार जैन -इन्दौर ने कर्म विषयक अनुचिन्तन सच्चत्थ बोहो के सन्दर्भ में, विषय पर आलेख प्रस्तुत किए।
अध्यक्षता ब्र. विनोद भैया- छतरपुर ने , संचालन पं. विनोदकुमार जैन -रजवांस ने किया।
विद्वानों का सम्मान : संगोष्ठी में समागत सभी विद्वानों का आयोजन समिति की ओर से संगोष्ठी पुण्यार्जक आजाद जैन,विकास जैन तथा समवसरण ग्रुप के अजित जैन, शैलेश जैन, संजय जैन, विकास जैन, अमित जैन आदि ने तिलक, माला, साहित्य, स्मृति चिह्न आदि के साथ बहुमान किया। इस मौके पर अशोक बड़जात्या, हँसमुख गांधी, ब्र. विनोद भैया अधारताल जबलपुर, ब्र. जिनेश मलैया , डॉ. भरत जैन -इंदौर, सुरेश मरौरा, पंडित जयकुमार जैन, पंडित लोकेश जैन- गनोड़ा, डॉ अरविंद जैन आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
सत्यार्थ बोध है जीवनशैली : मुनिश्री
इस अवसर पर मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज ने कहा कि परम पूज्य आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज द्वारा रचित नीतिपरक ग्रंथ सत्यार्थ बोध न केवल ग्रंथ है , बल्कि जीवनशैली है। इस ग्रंथ का प्राकृत भाषा में 75 दिनों में अनुवाद किया है। मुनिश्री ने बताया कि उनका लक्ष्य सवा लाख प्राकृत गाथाओं के निर्माण का है जिसमें 50 हजार वह लिख चुके हैं।
उन्होंने कहा कि जैन संस्कृति और संस्कार जीवनशैली है। अपने बच्चों में अच्छे संस्कार डालिए। वर्तमान और भविष्य सुधारना है तो संस्कारवान बनें। अनुकूलताओं और प्रतिकूलताओं में तटस्थ रहना ही धैर्य है। उन्होंने कहा कि धर्मात्मा को बाहर से न पहचानें, अंदर से पहचानें।
मुनिश्री बोले संगोष्ठी में बहुत आनंद आया। विद्वानों के श्रम को विद्वान ही जान सकता है।
तीर्थंकर ऋषभदेव जयंती पर पहली बार निकली शोभायात्रा, मुनि संघ और विद्वान हुए शामिल : परम पूज्य मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज के ससंघ सान्निध्य में 23 मार्च रविवार को तीर्थंकर ऋषभदेव के जन्म कल्याणक के मौके पर इंदौर के इतिहास में पहली बार विशाल भव्य शोभायात्रा निकाली गई। जो विभिन्न मार्गों से होते हुए धर्मसभा में परिवर्तित हुई। संगोष्ठी में समागत सभी विद्वान शोभायात्रा में मुनि संघ के साथ चले।
-डॉ सुनील जैन ‘संचय’
9793821108