जिनवाणी के सेवक, कई मुनि -आर्यिकाओं को अध्ययन कराने वाले, श्रावकाचार में वर्णित चर्या का पालन करने वाले , जिनको आचार्य श्री समयसागर जी महाराज ने 10 प्रतिमा के व्रत देकर *आत्मानंद सागर* नाम दिया, करणानुयोग के अधिकारी विद्वान् ,अत्यंत भद्र परिणामी वयोवृद्ध *पंडित प्रवर रतनलाल जी* शास्त्री इंदौर ने दुर्लभ समाधिमरण को प्राप्त किया है । उन्होंने दिनांक 02 अप्रैल 2025 को रात्रि 11.15 पर *’ओम’* का उच्चारण करते हुए नश्वर देह का त्याग कर दिया।
मुझे अनेकबार उनसे मार्गदर्शन प्राप्त करने का सुअवसर प्राप्त हुआ, उनके द्वारा लिखित ग्रंथ उन्हीं के कर कमलों से प्राप्त कर स्वाध्याय करने का अवसर भी प्राप्त हुआ।
अभी जब आदरणीय पंडित जी समवसरण मंदिर में समाधि-सल्लेखना की साधनारत थे तब 22,23 मार्च 2025 को उनके दर्शन करने का अवसर प्राप्त हुआ था, अनेक विद्वान और त्यागीव्रती भी उपस्थित थे। मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज भी वहाँ विराजमान थे, जो निरन्तर संबोधित कर रहे थे। असहनीय शारीरिक पीड़ा होने के बाद भी वे आत्मस्थ थे , पूर्ण चेतना के साथ आत्म साधना में तल्लीन थे। श्रावक-श्राविकाएं भी निरन्तर दर्शन के लिए उपस्थित हो रहे थे और णमोकार मंत्र का पाठ कर रहे थे। समाधि के निकट समय परम पूज्य मुनि श्री निर्णयसागर जी और महिमा सागर जी महाराज निरन्तर पंडितजी को संबोधित करते रहे।
भगवती आराधना के आलोक में समाधि करने वाले श्रेष्ठ साधक के रूप में उनकी आदर्श और उत्कृष्ट समाधि हुई है, उन्होंने एक आदर्श स्थापित किया है, वे हमेशा विद्वानों के आदर्श रहे, जाते-जाते भी वे एक और आदर्श स्थापित कर गए, उनके शिष्य- शिष्याओं ने बहुत सेवा की और श्रेष्ठ समाधि करायी।
उनकी विनम्रता, सरलता और आगम- निष्ठा सभी को लुभाती थी। वो सबके प्रिय थे। आपकी प्रेरणा से अनेक कार्य हुए। सम्मेद शिखर गिरिराज पर चोपड़ा कुंड मंदिर का निर्माण हुआ और मधुबन स्थित पदम प्रभु मंदिर अजितनाथ के शिखर पर भगवान चंदाप्रभु की अति मनोज्ञ 53 इंची प्रतिमा आपके द्वारा विराजमान की गई है जो सदैव भक्तों को आत्मदर्शन कराती रहेगी ।
उनका सादगी भरा जीवन विद्वानों को आकर्षित और सदा प्रेरणा देता रहेगा।
गुरुवार 3 अप्रैल 2025 को प्रातः 8 बजे समवसरण मंदिर से डोला निकाला गया और गोम्मटगिरी इंदौर में विधि विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
सरलस्वभावी विद्वान मनीषी का चिर- वियोग विद्वत जगत, जैन समाज के लिए अपूर्णीय क्षति है। आपको शीघ्र मुक्ति की प्राप्ति हो ऐसी मंगल भावना है। उनके चरणों में सविनय नमन।
-डॉ. सुनील जैन संचय, ललितपुर