पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में धर्मध्वजा (झंडारोहण) सबसे पहला और अत्यंत महत्वपूर्ण कर्म होता है।
यह केवल किसी आयोजन का शुभारम्भ नहीं,बल्कि धर्म के सार्वजनिक उद्घोष और पंचकल्याणक के पवित्र संकल्प की घोषणा है।
धर्मध्वजा फहराने का अर्थ है—
आकाश को साक्षी मानकर यह घोषणा करना कि
यह महोत्सव केवल विधियों और अनुष्ठानों का नहीं,
आत्मा के जागरण और जीवन-परिवर्तन का दिव्य पर्व है।
जब तक यह धर्मध्वजा लहराती रहती है, तब तक धर्म की चेतना, संघ की शक्ति और साधना का आलोक निरंतर इस क्षेत्र और सम्पूर्ण समाज पर अखंड रूप से प्रवाहित होता रहता है।
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🌿 धर्मध्वजा फहराने वाले परिवार कों सौभाग्य प्राप्त होता है,उसके जीवन पर इस पुण्य कर्म का प्रभाव स्पष्ट और स्थायी रूप से दिखाई देता है—
• जीवन में आंतरिक शांति और स्थिरता का वास
• निर्णयों में धर्मबोध, विवेक और स्पष्टता
• परिवार में संस्कार, एकता और मर्यादा की दृढ़ता
• कठिन समय में धैर्य, आत्मबल और साहस
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🌼 यश, कीर्ति और सामाजिक सम्मान
धर्मध्वजा फहराने वाला परिवार
समाज में धर्मनिष्ठा और आदर्श जीवन के लिए जाना जाता है
यह यश केवल वर्तमान तक सीमित नहीं रहता,बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी पुण्य-स्मृति और प्रेरणा बनकर आगे बढ़ता है।
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धर्मध्वजा फहराना केवल शिखर पर ध्वज उठाना नहीं,
यह अपने जीवन, परिवार और समाज को धर्म की ऊँचाइयों तक ले जाने का संकल्प है। द्वारा – शेखर चंद्र पाटनी














