निस्वार्थ, बहुआयामी व्यक्तित्व अशोक पाण्डे का देवलोकगमन

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निस्वार्थ, बहुआयामी व्यक्तित्व अशोक पाण्डे का देवलोकगमन
“जातस्य ध्रुवं मृत्युं” — अर्थात जो जन्म लेता है, उसकी मृत्यु अवश्यंभावी है। किंतु जो व्यक्ति समाज, परिवार एवं धर्मक्षेत्र के उत्थान हेतु निस्वार्थ भाव से अपने जीवन का प्रत्येक क्षण समर्पित करता है, वह देह त्याग कर भी अमरता को प्राप्त कर लेता है।
ऐसा ही एक बहुआयामी, प्रेरणास्पद एवं अनुकरणीय व्यक्तित्व — स्व. अशोक केशरचंद जी पाण्डे (चापानेर वाले) — दिनांक 21 जनवरी 2026 को इस नश्वर संसार से विदा होकर देवलोकगामी हुए। वे 74 वर्ष के थे।
स्व. अशोक जी अत्यंत अनुशासित, संयमनिष्ठ, कर्मठ, सिद्धांतप्रिय, मुनिभक्त एवं धर्मपरायण व्यक्तित्व थे। नित्य नियम से पूजा-अभिषेक करना, त्यागी संतों की वैय्यावृत्ति करना तथा परोपकार को जीवन का परम लक्ष्य मानना उनकी दिनचर्या का अभिन्न अंग था। उनका जीवन-मंत्र था —
“इस जीवन में जहाँ तक संभव हो, औरों का उपकार करूँ।”
इसी भाव भूमि ने उन्हें विसंगतिपूर्ण पारिवारिक स्थितियों में सामंजस्य स्थापित करने, द्वार पर आए हर जरूरतमंद को नई दिशा देने, उचित मार्गदर्शन एवं आर्थिक संबल प्रदान करने की प्रेरणा दी। वे हर क्षण मानवीय करुणा, सेवा और सहानुभूति की पुनीत भावना को अपने दामन में संजोए रखते थे।
उनके इसी सेवा-संकल्प को निरंतर बनाए रखने हेतु उनके तीनों सुसंस्कारित पुत्र — अमोल, आतिश, चेतन — एवं धर्मपत्नी श्रीमती अनीता पाण्डे ने उनके मरणोपरांत विभिन्न तीर्थक्षेत्रों, धार्मिक संस्थाओं एवं मंदिरों को विशाल दान राशि अर्पित करने की घोषणा की है। इसके अतिरिक्त, स्व. पिताजी के सेवा-कार्यों को अविरत रूप से संचालित करने हेतु एक विशाल सहायता-कोष की स्थापना भी की गई है इस सहायता कोष के अंतर्गत —पाँच अल्पभूधारक किसानों को निःशुल्क कृषि साहित्य,संभाग में निवासरत पाँच असहाय रोगियों के उपचार हेतु आर्थिक सहयोग,पाँच असमर्थ मेधावी छात्रों को पार्श्वनाथ ब्रह्मचर्याश्रम गुरुकुल, एलोरा में कक्षा 5वीं से 10वीं तक शिक्षा हेतु आर्थिक सहायता,
परिवार-संबंधित निराधार व्यक्तियों को आर्थिक संबल,
जैन विद्यालयों में विविध शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक स्पर्धाओं का आयोजन कर,
अशोक जी की पुण्यतिथि के अवसर पर पुरस्कार वितरण किया जाएगा।उल्लेखनीय है कि स्व. अशोक जी के चाचाजी श्री वर्धमान जी पाण्डे, श्री भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ संरक्षिणी महासभा, महाराष्ट्र प्रांत के अध्यक्ष हैं। तीर्थ संरक्षिणी महासभा लखनऊ को ₹7,500 तथा जैन गजट पत्रिका को ₹1,100 की सहयोग राशि अर्पित की गई है, साथ ही जैन गजट की आजीवन सदस्यता भी ग्रहण की गई है।
इस अवसर पर श्री भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ संरक्षिणी महासभा, महाराष्ट्र प्रांत की ओर से महामंत्री महावीर दीपचंद ठोले ने स्व. अशोक पाण्डे जी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।निस्संदेह, स्व. अशोक पाण्डे जी का जीवन सेवा, समर्पण, संयम और करुणा का अनुपम आदर्श है। उनका पुण्यस्मरण भावी पीढ़ियों को धर्म, मानवता और सामाजिक उत्तरदायित्व के मार्ग पर अग्रसर करता रहेगा।

जयजिनेद्र, कृपया यह शोक समाचार पत्रीका मे प्रकाशित कर उपकृत करे धन्यवाद
महावीर ठोले।

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