नेपाल के जनकपुर में पंचकल्याण , दीक्षा , वाग्दीक्षा, और निर्यापक मुनि संस्कार देकर आचार्य वसुनंदजी ने रचा इतिहास
जयपुर :: प्राकृत भाषा चक्रवृत्ति अभिक्षण ज्ञानोपयोगी आचार्य गुरुवर श्री १०८ वसुनंदी जी मुनिराज ससंघ का रविवार को विदेश (नेपाल) में प्रथम बार भावभीना स्वागत और नेपाल के जनकपुर क्षेत्र में आचार्य गुरुवर ससंघ 16 पिच्छी की आहारचर्या सम्पन्न हुई ।
अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान प्रान्त राजस्थान के अध्यक्ष पदम जैन बिलाला ने संघस्थ ब्र०भैया प्रभाशीष एवं भैया ऋषब से प्राप्त जानकारी अनुसार बताया की आचार्य भगवन द्वारा जनकपुर नेपाल में श्रीमज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव का कार्यक्रम सम्पन्न किया, क्षुल्लिका बोधिनंदनी माताजी को नेपाल में आर्यिका दीक्षा देकर नयपाल नंदनी नाम से सुशोभित किया, उपाध्याय श्री प्रज्ञानंद जी मुनिराज को सिद्धांत वारिधि की उपाधि से किया महिमा मण्डित, मुनिराज श्री आत्मानंद जी के निर्यापक मुनि के संस्कार किए, एवं मुनिराज श्री सभ्यानंद जी व समग्रानंद जी को दी वाग्दीक्षा (बोलकर स्वाध्याय करने की स्वीकृति दी) और आलोक शास्त्री बड़ामल्हरा को प्रतिष्ठाचार्य पद के संस्कार देकर स्वर्णिम इतिहास रचा गया ।
उल्लेखनीय है कि संघ का पद विहार अहिक्षत्र पार्श्वनाथ से तीर्थंकरों की जन्म भूमि अयोध्या, वैशाली , मिथिला आदि होते हुए शाश्वत तीर्थ सम्मेद शिखर के लिए चल रहा है ।
















