नशा कर रहा है नाश, परिवार, समाज और देश को हो रही क्षति, नशीले पदार्थ मिले ही नहीं,मुनिपुंगव निर्यापक श्रमण श्री सुधा सागर महाराज

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*नशा कर रहा है नाश, परिवार, समाज और देश को हो रही क्षति, नशीले पदार्थ मिले ही नहीं,मुनिपुंगव निर्यापक श्रमण श्री सुधा सागर महाराज*
  *गौरेला*।   *वेदचन्द जैन*।   नशा तुम्हारा नाश कर रहा है, धूम्रपान और तंबाकू गुटखा के सेवन से एक दिन केंसर होगा और इसका सेवन करने वाला अकाल मौत से बच नहीं सकता। धूम्रपान, गुटखा, तंबाकू सेवन करने वाले को सचेत करते हुए निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव श्री सुधा सागर महाराज ने कहा कि जिस परिवार में नशा का सेवन नहीं होता वो परिवार,वो समाज उन्नत और संपन्न होता है।
     आपने मध्यप्रदेश के अशोकनगर में एक चिकित्सक की जिज्ञासा पर कहा कि मैं नहीं  कहता कि आप मोक्ष की प्राप्ति के लिये तप त्याग करो,साधु संत बन जाओ,आप गृहस्थ रहो ,अपने परिवार से तो प्यार करो। नशा आपका नाश करेगा ये निश्चित है आप पर आश्रित परिवार भी संकट में रहेगा,अभाव में जीवन बितायेगा।
     धूम्रपान गुटखा और तंबाकू के नशा ने असंख्य जीवनों को निगल लिया मगर प्राण चले जायें परिवार त्रासदी में समा जाये,पर नशा नहीं छूटता। आखिर इसमें ऐसा क्या है कि आत्मघात हो जाये पर नशा न जाने पाये।आपने कहा कि गुरू समझायें, माता पिता कहें ,नशा छोड़ दो, डाक्टर चेतावनी दे, सरकार विज्ञापन देकर शिक्षित करे मगर नशा जब तक नहीं छूटता जब तक कि जीवन अंतिम अवस्था में न आ जाये।केंसर से ग्रस्त कितने ही रोगी आकर कहते हैं महाराज बचा लो अब नशा नहीं करूंगा।अब बचा ही क्या जो बचा लें ,नाश के बाद उतरा नशा तो लाभ क्या। इसीलिए समय है चेत जाओ,दूसरे से न करो स्वयं के जीवन से तो प्यार करो।
निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव श्री सुधा सागर महाराज ने कहा कि सरकार नशा सेवन के विरोध में विज्ञापन देती है,शराब पीने वालों  को दंड देती है, विक्रय  पर प्रतिबंध लगाती है मगर इन नशीले पदार्थों के उत्पादन को निषिद्ध नहीं करती। ये पदार्थ सेवन करने वालों को कहीं भी ये पदार्थ मिले ही नहीं तो हमारे देश की शक्ति जो इन पदार्थों के सेवन से समाप्त हो जाती है वो विनाश से बचाकर देशहित में लगाई जा सकती है। व्यक्ति बचेगा, परिवार बचेगा, समाज में अपराध कम होगें तो देश शीघ्र उन्नति करेगा।
*वेदचन्द जैन*

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