णमोकार तीर्थ में 46वां दीक्षा दिवस और 33वां आचार्य पदारोहण समारोह उत्साहपूर्वक संपन्न
अंतरराष्ट्रीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की अभूतपूर्व सफलता के बाद, मालसाणे स्थित ‘णमोकार तीर्थ’ में प्रज्ञाश्रमण सारस्वताचार्य देवनंदीजी गुरुदेव का 46वां दीक्षा दिवस और 33वां आचार्य पदारोहण दिवस अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस दो दिवसीय समारोह में देशभर से हजारों श्रद्धालु उपस्थित हुए और गुरुदेव के दर्शन किए।
ट्रस्टी और भक्त परिवार का विशेष सम्मान
समारोह की शुरुआत में आचार्य श्री देवनंदीजी महाराज ने अंतरराष्ट्रीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की अभूतपूर्व सफलता का उल्लेख किया। उन्होंने ‘णमोकार तीर्थ’ के ट्रस्टी और सभी भक्तों द्वारा किए गए भव्य आयोजन के लिए अथक परिश्रम और समर्पण की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि उनके सेवा भाव के कारण ही यह कार्यक्रम सफल हो सका।
जीवन केवल ‘दाल-रोटी’ तक सीमित नहीं होना चाहिए: आचार्य श्री
धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री देवनंदीजी महाराज ने जीवन का गहन दर्शन समझाया। उन्होंने कहा, “जीवन केवल पेट भरने (दाल-रोटी) तक सीमित नहीं होना चाहिए। मानव जीवन का उद्देश्य इससे कहीं अधिक बड़ा है। अपनी शक्ति का उपयोग मंदिर, समाज और जरूरतमंदों की सेवा में करें।”
उन्होंने आगे कहा कि गुरु की छाया में किया गया हर कार्य सफल होता है। जिनके सिर पर गुरु का आशीर्वाद होता है, उन्हें मोक्ष प्राप्ति से कोई नहीं रोक सकता। किसी का मन न दुखाना और अपने पुरुषार्थ से जीवन जीना ही सच्चा धर्म है।
प्रचार-प्रसार संयोजक पारस लोहाडे, विनोद पाटणी और नरेंद्र अजमेरा, पियुष कासलीवाल द्वारा ‘णमोकार तीर्थ’ और पंचकल्याणक महोत्सव के उत्कृष्ट प्रचार-प्रसार के लिए भी प्रवचन में सराहना की गई।
भक्तिमय वातावरण और धार्मिक अनुष्ठान
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान महावीर के अभिषेक और पूजन से हुई। इसके बाद विश्व में चल रहे युद्धों के शांत होने और विश्व शांति के लिए ‘महामृत्युंजय विधान’ किया गया। रात में आयोजित भव्य महाआरती श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रही। पंचपरमेष्ठी भगवान की मूर्तियों का महामस्तकाभिषेक किया गया। साथ ही पिच्छी प्रदान और शास्त्र प्रदान जैसे पवित्र अनुष्ठान भी संपन्न हुए।
संतों का मार्गदर्शन
इस अवसर पर आचार्य श्री विद्यानंदीजी, मुनि श्री पावनकीर्तिजी और मुनि श्री आर्षकीर्तिजी महाराज ने अपने विचारों से आचार्य देवनंदीजी के तपस्वी जीवन और समाज को दिए उनके मार्गदर्शक योगदान पर प्रकाश डाला। ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि केवल अपना परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व और सभी जीवों की सेवा करना ही सच्चा कर्तव्य है।
इस समारोह में नाशिक, मालेगांव, सटाणा, नांदगांव, चांदवड, लासलगांव, नांदेड, हैदराबाद, संभाजीनगर, पुणे और मुंबई सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री का पादप्रक्षालन और पूजन किया।
अतिथि एवं आभार
इस अवसर पर अध्यक्ष नीलमजी अजमेरा, ओमजी पाटणी और अनिल जमगे ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का कुशल संचालन रवीजी पहाड़े ने किया, जबकि अंत में उपस्थित सभी लोगों का आभार बा. ब्र. वैशाली दीदी ने व्यक्त किया।
इस अवसर पर औरंगाबाद से संजय कासलीवाल, ललित पाटणी, वर्धमान बाकलीवाल, संतोष कासलीवाल, मुकेश कासलीवाल, मदनलाल कासलीवाल, मनोज चांदिवाल, डॉ. आर. सी. बड़जात्या, भिकचंद लोहाडे, महेंद्र पहाड़े, भरत पापडीवाल, प्रकाश कासलीवाल, अनिल अजमेरा, केतन ठोले, मनोज साहूजी आदि उपस्थित थे।
यह जानकारी प्रचार-प्रसार संयोजक नरेंद्र अजमेरा और पियुष कासलीवाल, औरंगाबाद ने दी।.














