मुरैना की बेटी साधिका शांतमति का हुआ समाधि मरण

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मुरैना की बेटी साधिका शांतमति का हुआ समाधि मरण
आर्यिकारत्न श्री पूर्णमति माताजी के सान्निध्य में हुई समाधि

मुरैना/गाजियाबाद (मनोज जैन नायक) देव शास्त्र गुरु की साधिका शांतमति (पूर्व नाम शारदा देवी जैन – अजमेर) का संलेखना पूर्वक समाधि मरण हो गया है ।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश के मुरैना नगर के दिगम्बर जैसवाल जैन उपरोचियां परिवार के श्रावक श्रेष्ठी कुहेले गोत्रिय श्री मनीराम जी कस्तूरी देवी जैन (बघपुरा वाले) के परिवार में शारदादेवी का जन्म भादो शुक्ल दशमी सन 1953 में हुआ था । शारदा देवी की परवरिश एक धार्मिक और सादगी पूर्ण बतावरण में हुई थी । आपने दसवीं तक शिक्षा प्राप्त की थी । आपके माता, पिता, चाचा, भाई सभी देव शास्त्र गुरु के परम भक्त होकर पूर्ण सादगी और संयम के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते थे । आपके भाई महावीर प्रसाद जैन मुरैना आचार्य ज्ञानसागर एवं आचार्य ज्ञेयसागर के संघस्थ रहकर संयम की साधना कर रहे हैं
बेटी शारदादेवी का शुभ विवाह सन 1972 में राजस्थान अजमेर निवासी दिगम्बर जैसवाल जैन समाज के श्रावक श्रेष्ठी ढिलवारिया गोत्रिय बोहरे श्री चोखेलाल जी जैन के सुपुत्र महेशचंद जैन के साथ हुआ था । सुखी शांतिमय दाम्पत्य जीवन से आपको तीन पुत्र एवं एक पुत्री की प्राप्ति हुई । सभी बच्चों की सुसंस्कारित परिवारों में शादियां हो चुकी हैं।
अभी हाल ही में कुछ समय से श्रीमती शारदा देवी का स्वास्थ्य खराब चल रहा था । अपने अंतिम समय को समझकर शारदादेवी ने संयम के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया और अपनी भावना को साकार करने हेतु 18 अगस्त 2025 को संत शिरोमणि समाधिस्थ आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज की शिष्या आर्यिकारत्न श्री पूर्णमति माताजी (सूर्य नगर गाजियाबाद में चातुर्मासरत) के चरण सान्निध्य में लाया गया । शारदादेवी ने पूर्ण चेतना अवस्था में आचार्यश्री समय सागर जी महाराज के आशीर्वाद से आर्यिका माताजी के श्री चरणों में संयम की साधना हेतु श्रीफल समर्पित किया और मंगलवार 19 अगस्त को दस प्रतिमाओं के व्रत स्वीकार किए । पूज्य आर्यिका माताजी ने उन्हें व्रत आदि देकर शांतमति नामकरण किया । पूज्य गुरुमां ने ससंघ सान्निध्य में समाधि की तैयारियां प्रारम्भ कर दीं । साधिका शांतमति (शारदा देवी) ने अपनी भावना के अनुरूप गुरुमाँ आर्यिकाश्री पूर्णमति माताजी के निर्देशानुसार अन्न का त्यागकर, केवल तरल पदार्थों को ग्रहण किया ।
संयम के पावन पथ पर अग्रसर साधिका ने अंतिम समय में चारों प्रकार के आहारों का त्याग किया हुआ था । आज शुक्रवार 29 अगस्त को प्रातः 09.35 बजे पूर्ण चेतना अवस्था में महामंत्र णमोकर का स्तवन करते हुए सल्लेखना समाधि मरण के साथ इस नश्वर शरीर का त्याग किया ।
सूर्य नगर गाजियाबाद में आज दोपहर 12.20 पर साधिका शारदा देवी का अंतिम संस्कार किया गया । उनके गृहस्थ अवस्था के पति महेशचंद जैन अजमेर ने उन्हें मुखाग्नि दी ।

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