मिथ्या दृष्टि नहीं, सम्यक दृष्टि बनें — निर्यापक मुनि योग सागर जी महाराज

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मिथ्या दृष्टि नहीं, सम्यक दृष्टि बनें — निर्यापक मुनि योग सागर जी महाराज
आहार एवं दर्शन हेतु श्रद्धालुओं का तांता लगा — जम्बू जैन सर्राफ
कोटा | 11 फ़रवरी 2026 पुण्योदय अतिशय क्षेत्र , नसिया जी दादाबाड़ी के अध्यक्ष श्री जम्बू जैन सर्राफ ने जानकारी देते हुए विगत 35 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी पारस जैन “पार्श्वमणि” पत्रकार को बताया कि आज प्रातः 9 बजे, ज्येष्ठ श्रेष्ठ निर्यापक मुनि 108 श्री योग सागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में आचार्य 108 श्री विद्यासागर जी महाराज की भक्ति-भाव से पूजा संपन्न हुई।उपाध्यक्ष श्री सुमित सैंन्की ने बताया कि तत्पश्चात पुण्यार्जक परिवार — पदम जी, राजेंद्र जी, हुकम जी काका, प्रकाश जी हरसौरा परिवार द्वारा आचार्य श्री के चित्र का अनावरण, दीप प्रज्वलन एवं शास्त्र भेंट किया । इसके पश्चात 21 श्रेष्ठी परिवारों द्वारा महा मुनिराज निर्यापक मुनि 108 श्री योग सागर जी महाराज एवं मुनि 108 श्री निर्मोह सागर जी महाराज को शास्त्र भेंट किए गए।
शुभम शास्त्री ने बताया कि धर्मसभा को संबोधित करते हुए निर्यापक मुनि 108 श्री योग सागर जी महाराज ने कहा कि “इस त्रिलोक में मिथ्या दृष्टि जीव असंख्य हैं, जो अवगुणों को भी गुण समझ लेते हैं। पराई वस्तु भी उन्हें अपनी प्रतीत होती है और दूसरों पर दोषारोपण करना वे अपनी शान मानते हैं।”
एक उदाहरण देते हुए आपने कहा कि रावण पराक्रमी और महाज्ञानी होते हुए भी दृष्टि में विसंगति आने से पतन को प्राप्त हुआ।
आपने कहा कि हमें सम्यक दृष्टि बनने का प्रयास करना चाहिए, जहाँ “अपना सो अपना, तेरा सो तेरा” की भावना हो और किसी पर हावी होने की प्रवृत्ति न हो। आज हम राग-द्वेष में जी रहे हैं, जबकि इससे दूर रहना ही आत्मकल्याण का मार्ग है। धर्म-ध्यान भी कर्मों के उदय से ही प्राप्त होता है; परिणामों को शुद्ध कर कर्मों पर विजय प्राप्त करना ही साधना का लक्ष्य है।
उपाध्यक्ष श्री धर्मचंद धनोप्या ने बताया कि प्रवचन से पूर्व मुनि 108 श्री निर्मोह सागर जी महाराज ने भगवान राम, माता सीता एवं लक्ष्मण के जीवन प्रसंग के माध्यम से गुरु सानिध्य एवं माता-पिता की आज्ञा पालन का महत्व बताया। आपने कहा कि आज भले ही आचार्य 108 श्री विद्यासागर जी महाराज सशरीर हमारे बीच नहीं हैं, किंतु उनके आदर्श सदैव हमें उनकी स्मृति कराते रहेंगे।
आपने यह भी कहा कि आचार्य श्री के परम प्रभावक शिष्य निर्यापक मुनि 108 श्री योग सागर जी महाराज ससंघ का 47 वर्षों बाद राजस्थान की धरती पर आगमन हम सभी के लिए अत्यंत सौभाग्य का विषय है। प्रेरणा देते हुए आपने कहा कि “यदि चौका नहीं लगा सकें, तो भी एक ग्रास अर्पित कर देखिए — निश्चित ही कल्याण होगा।”
महामंत्री श्री महेंद्र कासलीवाल ने जानकारी दी कि योग सागर जी महाराज का आहार — वीरेंद्र, मनोज, रविंद्र, आदिनाथ परिवार को मुनि श्री निरोग सागर जी विनोद मंजू पाटनी श्री निर्मोह सागर जी का आहार — राजेंद्र जी, हुकम जी काका परिवार को,श्री निर्भीक सागर जी का आहार — श्री जम्बू जी, रानी जैन दिव्यांश मुस्कान सर्राफ परिवार को तथा मुनि 108 श्री निरामय सागर जी का आहार — संतोष, आशीष, नेहा हरसौरा परिवार को देने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
कोषाध्यक्ष श्री मनीष मोहिवाल ने बताया कि आज श्रावक-श्रेष्ठी परिवारों द्वारा कुल 21 चौके लगाए गए।
अर्चना (रानी) जैन सर्राफ ने बताया कि निर्यापक मुनि संघ नें क्षेत्र में चल रही सभी परोपकारी (नर सेवा नारायण सेवा) योजनाओं का अवलोकन किया और प्रसंशा करते हुये आशीर्वाद दिया
कल प्रातः 9 बजे धर्मसभा पुनः पुण्योदय तीर्थ, नसिया जी दादाबाड़ी में आयोजित होगी।

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