मनुष्य को जीवन सांसारिक भोगों के लिए नहीं धर्म कार्यों के लिए मिला है आर्यिका संगममती माताजी

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मनुष्य को जीवन सांसारिक भोगों के लिए नहीं धर्म कार्यों के लिए मिला है
आर्यिका संगममती माताजी
नैनवा जिला बूंदी 1 अप्रैल बुधवार 2026

शांति वीर धर्म स्थल पर संगममती माताजी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए बताया
आत्मा कहां है यह मनुष्य आज दिन तक जान नहीं पाया आत्मा पैसे से नहीं खरीदी जाती आत्मा मन की शांति होने पर ही आत्मा का ज्ञान होगा आत्मा अमर है कभी मरती नहीं है शरीर का संस्कार होता है आत्मा का नहीं
पहले नई बहु रानी आती थी उसका चेहरा देखने के लिए परिवार जनों पड़ोसियों की भिड होती थी चेहरा तो पैसे से मिल सकता है आत्मा पैसे से नहीं मिलती
जब भी संसार के मनुष्य का मरण होता है पहले आत्मा निकलकर चली जाती है केवल शरीर का पुतला पड़ा रहता है जन्म तो प्रत्येक जीव का हुआ है परंतु आत्मा को जान नहीं पाया
माता ने बताया की लकड़ी कई प्रकार की होती है चंदन की लकड़ी में खुशबू आती है जंगल महका करता है और नाम कड़वी होती है उसमें खुशबू नहीं आती दोनों ही लकडि्या है फर्क बहुत माता ने बताया
आज के युग में माता-पिता अपने बच्चों को विदेशों में नौकरी के लिए भेज देते हैं वह बच्चे विदेशी बनकर रह जाते हैं धर्म संस्कार भूल जाते हैं उनकी वह सेवा चाहते हैं परंतु सेवा नहीं मिल पाती इसलिए अपने बच्चों को विदेशों में ना भेजें अपने पास रखें
मनुष्य का जीवन अनमोल है इसे भोगों में ना रमाये धर्म कार्यों के लिए मिला है इससे ज्यादा से ज्यादा धर्म कार्य में लगाकर मनुष्य जीवन को सफल बनाएं
धर्म ही ज्ञान है अधर्म अज्ञान होना माता ने बताया
दिगंबर जैन समाज प्रवक्ता महावीर सरावगी

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