सम्यक दृष्टि जीव घाट को नहीं निर्मल पानी को देखा है
जैन मुनि प्रवचन केसरी विश्रांत सागर महाराज
महावीर कुमार सरावगी जैन गजट संवाददाता नैनवा जिला बूंदी राजस्थान
ग्राम चौरई मध्य प्रदेश
17 अगस्त रविवार 2025
दिगंबर जैन मंदिर में
मुनि श्री ने अपने मंगल प्रवचन में कहा है कि सम्यग्दृष्टि घाट को नहीं देखता निर्मल पानी को देख करके अपनी प्यास बुझाता है ,छोटे बड़े साधु को नहीं देखता वह तो भक्ति करके अपना कल्याण करना चाहता है आगे कहां है कि पंचम काल में भी सच्चे भाव लिंगी साधु होते हैं जो नहीं मानता है वह नियम से मिथ्या दृष्टि है,
मुनि ने यह भी बताया जब साधु केश लोच करते हैं इतने सारे केशौ को कितनी शीघ्रता से निकाल कर फेंक देते हैं देखने वाले की आंखों में आंसू चिपकने लगते हैं लेकिन साधू ऐसे वितरागी होते हैं कि किसी प्रकार का महत्व भाव अपने मन में नहीं आता
आज वही साधु धरती के देवता कहलाते हैं
वह बहुत ही पुण्यशाली परिवार होते हैं जिनके घरों पर मुनिराज के चरण पड़ते हैं उन घरों में सदा ही मंगल ही मंगल होता है दरिद्रता सदैव के लिए दूर हो जाती है धन-धान्य समृद्धि की वृद्धि होती है
108 विश्रांत सागर जी महाराज के आहार सिंघई विजय कुमार, अमित कुमार ,अतुल कुमार, आनंद कुमार जैन के घर पर हुए के भक्तों की भक्ति देखो कितना उत्साह है
महावीर कुमार सरावगी जैन गजट संवाददाता नैनवा जिला बूंदी राजस्थान












