महावीर जयंती: जब ईद-दिवाली के लिए अवकाश है, तो जैनों के लिए क्यों नहीं?
महावीर जयंती — जैन धर्म के अंतिम तीर्थंकर, भगवान महावीर के जन्म का पावन दिन — जो अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह के चार आधार पर जीवन जीने का संदेश देते हैं, वह दिन जब अवकाश नहीं दिया जाता, तो वह सिर्फ एक त्योहार नहीं रह जाता — वह एक अन्याय बन जाता है। और यह अन्याय आज भारत के कई निजी कॉलेजों, ऑफिसों और शैक्षणिक संस्थानों में देखा जा रहा है, जहां छात्र और कर्मचारी मजबूरन काम पर आने को मजबूर हैं, जबकि यह दिन उनके लिए धार्मिक अवकाश होना चाहिए था।महावीर जयंती को भारत सरकार ने गजेटेड हॉलिडे के रूप में मान्यता दी है। इसका मतलब है कि सरकारी कार्यालय, बैंक, शैक्षणिक संस्थान और सार्वजनिक सेवाएं इस दिन बंद रहनी चाहिए। लेकिन निजी क्षेत्र में यह नियम लागू नहीं होता — और यही वह खाई है जो धार्मिक सम्मान को तोड़ रही है। जैन समुदाय के लाखों लोग इस दिन व्रत रखते हैं, मंदिरों में जाते हैं, ध्यान और धार्मिक समारोहों में भाग लेते हैं — जिसके लिए उन्हें अवकाश की आवश्यकता होती है। लेकिन जब कॉलेज या ऑफिस खुले रहते हैं, तो उन्हें या तो अपने धर्म को त्यागना पड़ता है, या फिर अपनी नौकरी/पढ़ाई के लिए अपने धर्म को दूर रखना पड़ता है। यह न्याय से बहुत दूर है।
और यहां एक और बड़ी गलती है — कुछ संस्थान “RH” (Restricted Holiday) का झूठा बहाना बनाते हैं।
“RH” का मतलब होता है — “लेना चाहो तो ले सकते हो, लेकिन कॉलेज/ऑफिस का वर्किंग डे रहेगा”। यह एक धोखा है। क्यों? क्योंकि:
• महावीर जयंती कोई वैकल्पिक अवकाश नहीं है — यह एक गजेटेड हॉलिडे है, जिसका अर्थ है कि यह अवकाश लेना वैकल्पिक नहीं, बल्कि अनिवार्य है।
• “RH” का इस्तेमाल सिर्फ उन दिनों के लिए होना चाहिए जो गजेटेड नहीं हैं — जैसे कुछ छोटे स्थानीय त्योहार।
• जब एक धार्मिक त्योहार को “RH” बना दिया जाता है, तो यह धर्म के प्रति अनादर है — क्योंकि यह बताता है कि “तुम चाहो तो छुट्टी ले लो, लेकिन हमारा काम चलता रहेगा” — जो एक अपमानजनक भावना है।
कुछ लोग कहते हैं कि “यह निजी संस्थान हैं, वे अपने नियम बना सकते हैं” — लेकिन यह तर्क तब टूट जाता है जब हम देखते हैं कि ईद, दिवाली, क्रिसमस जैसे त्योहारों पर निजी कॉलेज और ऑफिस अक्सर अवकाश देते हैं। तो फिर महावीर जयंती क्यों छूट जाती है? क्या जैन धर्म कम महत्वपूर्ण है? या फिर इसके पीछे एक अनदेखी की संस्कृति है? जब एक समुदाय के लिए पवित्र दिन को नजरअंदाज किया जाता है, तो वह धार्मिक सहिष्णुता का नाम नहीं, बल्कि धार्मिक उपेक्षा का नाम है।भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है — लेकिन धर्मनिरपेक्षता का मतलब धर्म को नजरअंदाज करना नहीं, बल्कि सभी धर्मों का सम्मान करना है। और जब एक धर्म के लिए पवित्र दिन को अवकाश नहीं दिया जाता, तो वह धर्मनिरपेक्षता नहीं — धर्मनिरपेक्षता का नाटक है।
हम मांग करते हैं —
1. सभी निजी कॉलेज और ऑफिस महावीर जयंती को अवकाश के रूप में मान्यता दें — “RH” जैसे झूठे बहाने बंद करें।
2. शैक्षणिक संस्थान अपने कैलेंडर में इस दिन को अवकाश के रूप में शामिल करें — न कि “वैकल्पिक छुट्टी” के रूप में।
3. राज्य सरकारें निजी संस्थानों के लिए भी धार्मिक अवकाशों के लिए दिशा-निर्देश जारी करें — ताकि “RH” का दुरुपयोग न हो।
4. छात्र और कर्मचारी अपने अधिकार के लिए आवाज उठाएं — क्योंकि धर्म का सम्मान अवकाश के रूप में नहीं, तो वह सम्मान नहीं, अपमान है।
महावीर जयंती का अवकाश न देना सिर्फ एक नियम का उल्लंघन नहीं है — यह भारत की धार्मिक विविधता के प्रति अपमान है। अहिंसा का संदेश तभी जीवंत रहेगा, जब हम उसके जन्मदिन को भी सम्मान देंगे। अगर आप जैन हैं — तो आपका अधिकार है। अगर आप नहीं हैं — तो आपका कर्तव्य है। इस दिन को अवकाश दें — क्योंकि धर्म का सम्मान, भारत की एकता का आधार है।
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