लालकिला मैदान में भगवान ऋषभदेव का जन्मकल्याणक महोत्सव मनाया गया धूमधाम से

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नई दिल्लीः जैन धर्म के प्रवर्तक प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव का जन्म कल्याणक महोत्सव 23 मार्च को मुनि श्री प्रतीक सागरजी के सान्निध्य में लालकिला मैदान के विशाल पंडाल में भव्य स्तर पर मनाया गया। आरंभ में लाल मंदिर से भव्य रथ यात्रा निकाली गई। ध्वजारोहण व चित्र अनावरण के बाद मुख्य अतिथि दिल्ली की CM रेखा गुप्ता ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का उदघाटन किया। CM का माल्यार्पण, शाल व स्मृतिचिन्ह प्रदान कर स्वागत किया गया। CM ने
सभी संतों को श्रीफल भेट कर विनयांजलि अर्पित की। मुनि श्री प्रतीक सागरजी ने कहा कि भगवान ऋषभदेव अत्यंत प्राचीन काल से चली आ रही वैदिक और
श्रमण संस्कृति के समन्वयक हैं। उन्होने मानव को असि, मसि, कृषि, शिल्प, विद्या, वाणिज्य आदि की शिक्षा देकर जीने का आधार दिया। आचार्य आदित्य
सागरजी ने कहा कि ऋषभदेव ने ही सर्वप्रथम मानवता का संदेश दिया। आचार्य डा. लोकेश मुनिजी ने कहा कि ऋषभदेव के पुत्र भरत के नाम पर ही हमारे देश
का नाम भारतवर्ष पडा। भगवान राम ने ऋषभदेव के इक्ष्वाकुवंश में ही जन्म लिया। श्रीकृष्णजी 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ जी के चचेरे भाई थे। लोकेश जी ने CM को महावीर जयंती पर 10 अप्रैल को मांस मदिरा की दुकाने बंद करने का आदेश जारी करने पर धन्यवाद दिया। इस मौके पर सभी संतों ने समस्त जैन समाज की ओर से भगवान ऋषभदेव के जन्म दिवस  को राष्ट्रीय पर्व घोषित कर सार्वजनिक अवकाश की मांग का ज्ञापन CM को दिया।
CM ने अपने उदबोधन में कहा कि मानव को अहिंसा, सत्य, तप-त्याग और संयम का उपदेश देने वाले जैन संतों के चरण यंहा पडे यह सौभाग्य की बात है, इन
संतों के सान्निध्य में भगवान ऋषभदेव के जन्मकल्याणक पर यहां 5084 इंद्रों के द्वारा भगवान का महामस्तकाभिषेक किया जा रहा है, यह आध्यात्मिक गरिमा के
साथ-साथ सामाजिक व आत्मिक विकास का प्रतीक भी है। इस मौके पर मैं समस्त समाज को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देती हूं। समस्त समाज की सोच
बहुत ही उच्चकोटि की है। सभी संतों के मार्गदर्शन से ही हम दिल्ली को विकसित करेंगें। सांस्कृतिक विविधता ही हमारी एकता व समरसता की ताकत है। पंडित
अरविंद जैन के निर्देशन में सभी इंद्रों ने बडी आत्मीय भाव से पांडुक शिला पर मस्तकाभिषेक किया। समारोह में अन्य कई मुनियों सहित आर्यिका संघ भी
उपस्थित था। राजधानी के अन्य अनेक मंदिरों में भी आदिनाथ जन्मोत्सव हर्षोल्लास से मनाया गया।
प्रेषकः रमेश चंद्र जैन एडवोकेट नवभारत टाइम्स नई दिल्ली

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