केकड़ा अधिवेशन में बुद्धि में भारत का केकड़ा प्रथम रहा विदेशी देश देखते रहे /भारत गौरव आर्यिका रत्न 105 विज्ञा श्री माताजी

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केकड़ा अधिवेशन में बुद्धि में भारत का केकड़ा प्रथम रहा विदेशी देश देखते रहे
/भारत गौरव आर्यिका रत्न 105 विज्ञा श्री माताजी
द्वारा
महावीर कुमार सरावगी जैन गजट संवाददाता नैनवा जिला बूंदी राजस्थान
गुंसी जिला टोंक राजस्थान सहस्त्रकूट विज्ञातीर्थ प्रणेत्री
गुरु माता ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए बताया
समाज की संगठन शक्ति सबके लिए एकता का महान सूत्र प्रदान करती है। घडी के तीन काटे होते हैं, एक अति शीघ्र चलता है, एक मध्यम गति से चलता है और एक बहुत ही धीरे चलता है। समाज में भी यह तीन प्रकार के लोग रहते हैं परंतु यह घडी के तीन काटे जब एकता के सूत्र में बंध जाते हैं तो किसी की भी बैड बजा देते हैं। बंध मुट्ठी संगठन शक्ति का प्रतीक है। इसलिए कहते हैं बंध मुट्ठी लाख की, खुली मुट्ठी खाक की। एक दुष्टान्त आता है कि जापान में एक केकड़ा सम्मेलन आयोजित हुआ। सभी देशों के लोग अपनी अपनी संदूक में केकड़े भरकर ले आये दिखाने का जमाना है, जो दिखता है वही बिकता है।सभी के विदेशी लोगों ने बहुत ही सुंदर तरीके से अपनी अपनी संदूक को सजाया, पर जो भारत का व्यक्ति था उसका साधा लकड़ी का संदूक था और वो भी खुला हुआ। विदेशों के लोग भारत के व्यक्ति पर हंसने लगे और कहने लगे कि येह कैसा व्यकित है इतना भी समसदार नहीं है। अपना संदूक खोल कर लाया है। केकड़े अगर भाग जायेंगे तो आयोजन में अपनी नाक कटवायेगा क्या? उस व्यक्ति ने कहा भारत की एक विशेषता है कि अगर एक भी केकड़ा अगर ऊपर चढ़ता है तो दूसरा उसके नीचे गिरा देता है यह भारत के लोगों की बुद्धि है! कोई व्यक्ति अगर तरक्की करता है ऊपर चढ़ता है तो उसे नीचे गिरने वाले अनेको लोग होते हैं ! इस केकड़ा बुद्धि को हटाओ ! ऐसी बुद्धि किस काम की जो बम बंदूक बनाने में लगे ! जो किसी व्यक्ति को नीचे गिराने में काम आए यह बुद्धि नहीं दो दुबुॅद्धि है यह लेख समाज में एकता और संगठन की महत्ता को समझाता है। इसमें एक दुष्टान्त के माध्यम से बताया गया है कि कैसे भारत में सामूहिक प्रयास से व्यक्तिगत सफलता को रोकने की प्रवृत्ति होती है, जबकि संगठन से शक्ति मिलती है। अंत में एक प्रेरणादायक वाक्य दिया गया है जो मेहनत और सफलता के बारे में है। प्रतीक जैन सेठी ने बताया कि परम पूज्य 108 अरह सागर जी महाराज ,108 मुनि सुहित सागर जी महाराज एवं परम पूज्य भारत गौरव आर्यिक रत्न 105 विज्ञाश्री माताजी ससंघ सानिध्य में 29 मार्च 26 प्रातः 6:00 बजे जिनसहस्त्रनाम महामंडल विधान का आयोजन होगा जिसमें 24 पांडुशिलाओ ,24 विधान ,24 हवन कुंड ,24, चॉइस पुण्यार्जक परिवार द्वारा 1008 मंत्रो से अहूती होगी
महावीर कुमार सरावगी जैन गजट संवाददाता नैनवा जिला बूंदी राजस्थान

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