जो मनुष्य अपने घर को मंदिर बना दे वही धर्मात्मा है
अच्छे कर्म करने से सद्गति प्राप्त होती है
/प्रवचन केसरी विश्रांत सागर महाराज/
महावीर कुमार सरावगी जैन गजट संवाददाता नैनवा जिला बूंदी राजस्थान
जो घर को मंदिर बना दे वही सच्चा धर्मात्मा सिर्फ पूजा पाठ करने वाला धर्मात्मा नहीं है
24 मार्च मंगलवार 2026 छतरपुर मध्य प्रदेश दिगंबर जैन बड़े मंदिर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए जैन संत विश्रांत सागर महाराज ने बताया
आज पंचम काल में मंदिरों में पूजा पाठ करने वाला मनुष्य अपने आप को धर्मात्मा मान रहा है यह उसकी सोच सही नहीं है जब तक अपने मन के बुरे विचारों को शुद्ध नहीं करेगा दूसरों के प्रति ईर्ष्या भाव मन से नहीं त्यागेगा तब तक धर्मात्मा हो नहीं सकता
मुनि ने यह भी बताया की धर्म को ग्रहण करने के लिए मनुष्य को अपने मन को सफेद वस्त्र की तरह साफ करना होगा आत्मा पर इतनी कालीमा क्रोध मान माया लोभ भरी हुई है उन्हें साफ करने के लिए हमें धर्म रूपी अमृत से स्नान करना होगा तभी हमारी आत्मा साफ होगी केवल मात्र दिखावा करने में धर्म नहीं है धर्म तो सच्चे मन से ईश्वर की भक्ति स्मृति करने से प्राप्त होगा पूजा पाठ तो केवल मात्र एक क्रिया है इसे धर्म नहीं कहा जा सकता
परेशान व्यक्ति की मदद करना बुरे वक्त में एक दूसरे का साथ देना गरीबों पर दया करना बीमारी मे मदद करना भूखे व्यक्ति को भोजन कराना यह सब धर्म क्रिया है
समय बहुत परिवर्तनशील है अच्छे-अच्छे दिन निकलने पर भी पाप कर्म के उदय से अशुभ कर्म आ जाते हैं उन कर्मों से मनुष्य घबरा जाता है उसे बुरे वक्त में मदद करना एक धर्म क्रिया कहलाती है
अनेकों भक्तों ने मुनि के मंगल प्रवचनों को सुनकर अपार भक्तों ने जिनालय में जय-जय कर के मुनि के नारे भी लगाए
जिनालय में अनेक महिला पुरुषों ने मंगल प्रवचन सुनकर धर्म लाभ प्राप्त किया
महावीर कुमार सरावगी जैन गजट संवाददाता नैनवा जिला बूंदी राजस्थान















