जिसने अपनी माता-पिता को दुख दिया है वह जीवन के अंत समय तड़प तड़प कर मरता है

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जिसने अपनी माता-पिता को दुख दिया है वह जीवन के अंत समय तड़प तड़प कर मरता है
/दिगंबर संत प्रवचन केसरी विश्रांत सागर महाराज/
10 फरवरी मंगलवार 2026
नेमी नगर दमोह के दिगंबर जैन मंदिर में दिगंबर मुनि का संपूर्ण जैन समाज ने गाजे-बाजे से अगवानी करके मंगल प्रवेश कराया
गणाचार्य विराग सागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य प्रवचन केसरी विश्रांत सागर महाराज
ने बताया कि जिस मां ने अपने पुत्र को 9 माह तक अपने गर्भ में रखा जन्म दिया है उसका पालन पोषण किया उसका परिणाम माता-पिता के साथ वेदना देने के कारण बहुत बुरा फल भोगना होगा
दिगंबर संत ने यह भी बताया
रावण ने सीता से कहा 18000 रानियां की पटरानी बन जा और मुझे स्वीकार कर ले फिर भी सीता ने रावण को स्वीकार नहीं किया यह प्रवचन परम पूज्य प्रवचन केसरी मुनि श्री 108 विश्रांत सागर महाराज जी ने महाराजपुर में दिए थे,
महाराज ने यह भी कहा मां के हाथ का सुखा भोजन भी मीठा लगता है क्योंकि मां स्वार्थ सहित भोजन करती है अपने हाथ से बनाया हुआ भोजन बहुत ही टेस्ट फुल लगता है क्योंकि उन हाथों में मां की ममता होती है इसलिए वह बाजार के भोजन से सुंदर और स्वास्थ्य हितकारी भोजन लगता है ,
अपार महिलाओं ने युवाओं ने मुनि के जज कारो के नारे जिनालय में लगाकर गूंजायमान किया
महावीर कुमार सरावगी जैन गजट संवाददाता नैनवा जिला बूंदी राजस्थान

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