जिस तरह खुशी और मुसीबत बिना किसी अपॉइंटमेंट के आ जाती है..उसी तरह अपने आप को हमेशा तैयार रखें.. अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज
औरंगाबाद नरेंद्र पियुष जैन परसोला राजस्थान। अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय पियूष सागरजी महाराज ससंघ की अहिंसा संस्कार पदयात्रा दिक्षा भुमी परतापुर बांसवाड़ा राजस्थान की और चल रही है उसी श्रुंखला में आज उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि मुसीबत आये तो होश ना खोयें, और खुशी आये तो जोश पर कन्ट्रोल करें..!
बहुत कम लोग है जो आप बीती और पर बीती को ठीक से समझते हैं। यदि हम पर दुःख का पहाड़ आया और हमने जैसे तैसे उसका सामना किया, ठीक वैसे ही – जब किसी पर दुःख आये तो हम उसी भाव से उसे समझें। वरना इस दुनिया में ऐसे लोग ज्यादा है, जो कहते हैं – फूल आहिस्ते फेंको – फूल बड़े नाजुक होते हैं। इसे ही कहते हैं – दुहरा जीवन।
सबका जीवन मूल्यवान है। हमारी खुशी और दूसरों की सफलता हमारे जीवन की उन्नति में वरदान सिद्ध हो सकती है। अधिकांश दुःख, परेशानी, पीड़ा, दर्द हमारी सोच पर निर्भर करते हैं। *विचारों और भावनाओं के इन दो रूपों की तुलना हमें दूसरों के सुख शान्ति कल्याण के अनमोल जीवन बनाने में कारण बनेगी।
तीन मित्र धन की खोज में घुम रहे थे। चलते चलते अचानक एक मित्र को चांदी की खान दिख गई और वह कहते कहते चला गया – हमको हमारा मुकाम मिल गया। दूसरा मित्र उदास परेशान होकर आगे चला जा रहा था कि अचानक उसे भी सोने की खान दिखाई दी और वह खुशी से झूम गया और खदान में पहुंच गया। तीसरा मित्र – मरता क्या ना करता, रोते बिलखते, पैर पटकते हुये चला जा रहा था कि अचानक उसे हीरे की खदान दिखी और वह देखते ही बावला हो गया। जिसके भाग्य में जो था वह उसको मिल गया।* इसलिए — किसी की खुशनसीबी से अपने आप को हैरान-परेशान मत करो बल्कि सोचो –परमात्मा के पास देर है, अन्धेर नहीं…!!! नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद












