जिनशासन संरक्षण विलक्षण उपक्रम का हुआ आयोजन

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जिनशासन संरक्षण विलक्षण उपक्रम का हुआ आयोजन
दिगंबराचार्य अतिवीरसागर के आशीर्वाद से हुआ आयोजन

मुरैना/दिल्ली (मनोज जैन नायक) केदारनाथ साहनी ऑडिटोरियम दिल्ली में आचार्य श्री अतिवीर जी महाराज के आशीर्वाद से आयोजित विलक्षण कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं ने अनुमोदना की।आज जिन शासन को आहत करने के कई आयाम स्थापित हो रहे हैं, जिसमें शासकीय, सामाजिक, राजनीतिक से घातक है जैनत्व का मुखौटा लगाने वाले जैन। आज जैनत्व के संस्कारों का तेजी से क्षरण हो रहा है। जैन युवा इससे बहुत ही दूर हो रहे हैं । मंदिरों की संख्या बढ़ रही है और जैनों की जनसंख्या तेजी से घट रही है। वह दिन दूर नहीं जब मंदिरों का द्वार भी खोलने वाला ना होगा । महानगरों में ही नहीं ग्रामीण अंचल से भी जैनों का पलायन निरंतर हो रहा है। पर हम सब इससे बेखबर हैं ।
आचार्यश्री ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विगत कई वर्षों से जिन शासन के भेद-प्रवेद, आपसी मतभेद, जैन श्रावकों का पंथ, ग्रंथ, संत में बंटना तथा एकल परिवार की अवधारणा जैन संस्कृति के लिए सबसे घातक सिद्ध हो रही है। अर्थ प्रधान इस परिवेश में पाश्चात्य की अंधी दौड़ में सामाजिक मर्यादाएं तो विलीन हो गई हैं , आज मुनिराजों के चातुर्मास, विधान, पंचकल्याणक सभी मांगलिक अनुष्ठानों के साथ अर्थ के व्यामोह में भगवान भी इसकी चपेट में आ गए हैं।
पूज्य अतिवीर महाराज ने निरंतर कोशिश की, अंत में उनकी विचारधारा के श्रावकों ने जैन धर्म के सभी पक्षों को एक मंच पर समायोजित करने का उपक्रम अतिवीराचार्य सम्मान के रूप में फलीभूत किया।
आचार्य श्री ने कहा दिगंबर, श्वेतांबर, कांजी पंथी, 20 पंथी, 13 पंथी, स्थानकवासी सभी महावीर की संतान हैं, हमारी पहचान एक ही हो हम जैन हैं । हम एक दूसरे के प्रतिद्वंदी नहीं पूरक बनकर जैनत्व का संरक्षण करें , तभी हमारी संस्कृति, इतिहास, पुरातत्व एवं धर्म का उन्नयन संवर्धन संभव हो सकेगा ।मैं अपना प्रयास जारी रखूंगा । मैंने मुनी धर्म मोक्ष मार्ग पर चलने के लिए स्वीकार किया है और अभेद मोक्ष मार्ग एक ही है, जिस पर चलने वाला महावीर का अनुयाई है, जिसका में सदैव समर्थन करूंगा।
दिल्ली के केदार साहनी ऑडिटोरियम में उपस्थित विशाल जन समूह ने
अतिवीराचार्य सम्मान का समर्थन करते हुए पुरस्कार
प्रदाताओं का उत्साह वर्धन एवं बहुमान तालियों के माध्यम से किया। पुरस्कार प्राप्त कर्ताओं का चयन भी इसी उद्देश्य से किया गया। जिसकी सभी ने सराहना की। कार्यक्रम में जिन शासन प्रभावना के लिए उपाध्याय श्री रविंद्र मुनि जी म.सा., संस्कृति संरक्षक के लिए पं. स्व. गुलाब चंद्र जैन पुष्प “प्रतिष्ठा पितामह”, जैन न्याय दर्शन के लिए डॉक्टर वीर सागर जैन (लाल बहादुर संस्कृत विद्यालय), जीव दया परोपकार के लिए पक्षियों का धर्मार्थ चिकित्सालय (लाल मंदिर दिल्ली) को सम्मानित किया गया ।
आचार्य श्री के इस प्रयास का सभी ने समर्थन करते हुए सहयोग करने का संकल्प किया और सब ने स्वीकार किया “हम जैनी, अपना जैन धर्म, इतना ही परिचय केवल हो” जैन अखंडता का सभी ने उत्साह पूर्वक समर्थन किया।
आयोजन समिति ने वर्तमान परिवेश में समय का मूल्यांकन करते हुए घोषित अवधि में ही कार्यक्रम संपन्न कर सभी को आश्चर्यचकित किया। श्री विवेक जी ने संचालन करते हुए समाज गौरव श्री चक्रेश जी एवं स्वदेश भूषण जी के साथ निर्देशक ब्रह्मचारी जयकुमार निशांत भैया, सह निदेशक डॉक्टर सोनल जी का स्वागत करते हुए ध्वजारोहण से समारोह का शुभारंभ किया। जिसका मंगल गान बबीता जी झंझरी ने करके सभी को सम्मोहित किया।
प्रतिष्ठा पितामह पं. गुलाब चंद्र जी पुष्प का सम्मान उनके चतुर्थ पुत्र ब्रह्मचारी जय निशांत भैया को प्रदान किया गया । आपके परिवारजन इंजी. अभिनव, इंजी. लोहित जी, इंजी. सुमित, श्रीमती शर्मिला जैन, अनुभूति जैन, सोनिया जैन एवं परिवारजन रहे।
विद्वानों में पं. सनत कुमार विनोद कुमार रजवांस, पं. मनीष जैन संजू टीकमगढ़, ऋषभ जैन शास्त्री, पं. दीपक शास्त्री, पं. राजेश शास्त्री पं.मदन जैन दिल्ली के साथ सभी विद्वानों ने गौरव प्राप्त किया।
आचार्य श्री ने कहा उस काल में जब दो-तीन वर्ष में एक ही पंचकल्याणक होता था, तब पुष्प जी ने 155 पंचकल्याणक पूर्ण शुद्धि, आगम सिद्धांत के साथ स्नेह एवं वात्सल्य से भरपूर संपन्न किये ।आपने अपनी विरासत तो प्रतिष्ठा रत्नाकर के रूप में सौंपी ही है, निशांत भैया को इस क्षेत्र में अग्रणी किया है। संस्कृति संरक्षण के लिए आपकी स्मृति में श्री नवागढ़ गुरुकुलम् का विशेष आयाम स्थापित कर पुष्प परिवार ने अपने कर्तव्य का पालन किया है।
गरिमामय सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ आचार्य श्री का पिच्छी परिवर्तन, पूजन अनूठे ढंग से संक्षिप्त समय में ही संगीत में वातावरण में संपन्न किया गया।
पुरस्कार प्रदाता द्वारा पुरस्कार प्राप्त कर्ताओं का 3 लाख की नगद राशि, शाल, श्रीफल प्रशस्ति एवं बोलती जिनवाणी समर्पित कर उनको उपाधि पूर्वक सम्मानित किया गया।
मंगल आरती के साथ कार्यक्रम का गरिमा में समापन किया गया ।आयोजन के पश्चात सुरुचि पूर्ण भोज की व्यवस्था का आनंद सभी ने प्राप्त किया ।आचार्य श्री ने सभी को आशीर्वाद देते हुए कहा यह प्रयास आगे भी जारी रहेगा।
श्री समीर जैन ने सभी पुरस्कार प्रदाताओं एवं पुरस्कार प्राप्तकर्ता के साथ उपस्थित सभी श्रद्धालुओं का का आभार व्यक्त करते हुए कहा आप सब की उपस्थिति हमारे इस प्रयास की सफलता है। आपका संकल्पपूर्वक समर्थन मुझे अभिर्भूत कर रहा है । सभी का बहुत-बहुत आभार।

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