जीवन में साहस का होना बहुत जरूरी है बिना साहस के जीवन अधूरा है

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जीवन में साहस का होना बहुत जरूरी है बिना साहस के जीवन अधूरा है
गणिनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी
नैनवा जिला बूंदी राजस्थान 26 मार्च गुरुवार 2026
दिगंबर जैन शांति वीर धर्म स्थल पर गुरु माता ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए बताया
प्रत्येक मनुष्य के जीवन में साहस का होना बहुत जरूरी है
धर्म को जानकर आलस को छोड़कर लड़ने के लिए सैनिक जाता है उसे साहस होता है घरवालों उसे लड़ाई के लिए दुश्मनों को मार गिराने के लिए देश के लिए साहस होने पर ही वह लड़ सकता है बिना साहस के नहीं
घरवालों से समाज से लड़ने में साहस की आवश्यकता नहीं है अगर तुम्हें लड़ना है उसे सेना में भर्ती होना चाहिए
माता ने बताया डाकू बनने के लिए भी निडरता साहस चाहिए ऐसी निडरता किस काम की दूसरों के हिसा करें परेशानी करें उसे निडरता नहीं कहते
जंगल में अकेला शेर रहता है वह भीड़ में नहीं रहता अकेला रहने पर भी साहस के कारण जंगल का राजा कहलाता है
माता ने यह भी बताया की एक भेड कुएं में गिर जावे तो सारी की सारी भेडे कुएं में गिर जाती है इसे भेड़ चाल करते हैं
आज की महिलाएं खुले बाल रखना बंद बाल रखना एक दूसरे को देखकर पैंट शर्ट जींस पहनने लगी है यह भी एक भेड़ चाल है
आज की महिलाएं भगवान के पवित्र जिनालय में मर्यादा पूर्वक वस्त्र पहनकर प्रवेश नहीं होती
कोई महिलाओं सिलवार सूट
जींस टॉपर आदि पहनना शोभनीय नहीं है जितनी सुंदर महिला साड़ी पहनकर निकलते पर लगती है वह टॉपर शर्ट जींस में कभी नहीं लगती वह घर की एक ग्रहणी पतिव्रता नारी के रूप में देखी जाती है मर्यादा कपड़ों से ही भगवान के जिनालय साधु संतों के प्रवचनों में उन्हीं महिलाओं को सम्मान प्राप्त होता है जो व्यवस्थित मर्यादा के कपड़ों में पहुंचती है
माता ने बिना आंखों के व्यक्ति का उदाहरण देकर बताया
रविंद्र कुमार जैन बिना आंखों वाला था उसने संगीत में सम्राट की उपाधि प्राप्त की लाखों भजन उन्होंने लिखे उसने बहुत बड़े स्पीकर के नाम से भारत में नाम कमाया है
गुरु माता ने अपना उदाहरण देते हुए बताया कि जब मैं धर्म मार्ग पर चलना प्रारंभ किया था बहुत कठिन मार्ग लग रहा था
इस मार्ग पर लाने के लिए मुझे सबसे पहले गौरव रन आर्यिका विज्ञा श्री माताजी का सानिध्य प्राप्त हुआ उन्होंने मुझे हिम्मत दिखाई इस मार्ग में तुम आगे बढ़ो हम तुम्हें संभालेंगे मेंने साहस किया तो आज मैं जन-जन की की माता गणिनी आर्यिका रत्न स्वस्ति भूषण माता कहला रही हूं उन माताजी ने मुझे प्रेरणा और धर्म मार्ग बताया
साहस के अनेक उदाहरण माता ने देते हुए बताया
गलत व्यसनों त्याग कराया
युवाओं युवतियों को माताजी ने आज नियम दिलाया कि हम जीवन भर अपने जीवन साथी को जैन के रूप में स्वीकार करेंगे शादी विवाह जैन लड़की लड़के करेंगे एवं अभक्ष वस्तुओं का आज हम त्याग करते हैं
शांति वीर धर्म स्थल पर
गर्ल्स स्टार प्रशिक्षण में दूसरे रोज भी बालिकाओं को जीवन जीने के अनेक प्रकार के उदाहरण देकर
उन्हें समझाया बताया
अपने जीवन में कभी निराश नहीं होना अपनी बात को अपने घर माता-पिता बहन-भाई से शेयर करना ताकि हर बात का निवारण हो सके
घुट घुट कर कर रहना ही एक कायरता है निडर होकर रहना ही एक साहस का कार्य होता है
जितने भी आज माताजी देख रही है यह सब कल तक आपकी तरह लड़कीयों थी ज्ञान प्राप्त करके ही आज ज्ञान का उद्बोधन देकर संसार के प्राणी मात्र का कल्याण का मार्ग बता रही है
आप भी प्रशिक्षण में बताई हुई बातों को अपने जीवन में उतारे आपका पूरा जीवन सफल होगा
महावीर कुमार सरावगी जैन गजट संवाददाता नैनवा जिला बूंदी राजस्थान

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