जैन विद्या के क्षेत्र में गौरवपूर्ण उपलब्धि
पं. सुनील प्रसन्न शास्त्री को ‘आचार्य विमलसागर शोधानुसंधान अवार्ड’ से किया जाएगा सम्मानित
बड़ागांव। जैन विद्या के उन्नयन एवं विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विद्वान पं. सुनील प्रसन्न शास्त्री को वर्ष 2025 के प्रतिष्ठित “अंकलीकर अन्तर्राष्ट्रीय अवार्ड” के अंतर्गत “आचार्य विमलसागर शोधानुसंधान अवार्ड” हेतु चयनित किया गया है। यह सम्मान उन्हें एकलव्य विश्वविद्यालय, दमोह से आचार्य आदिसागर अंकलीकर परम्परा पर किए गए उच्चस्तरीय शोध कार्य के लिए प्रदान किया जा रहा है।
इस सम्मान के अंतर्गत ₹51,000/- की नगद राशि, शाल, श्रीफल एवं स्मृतिचिन्ह भेंट किए जाएंगे। इस अवार्ड के पुण्यार्जक श्री रिखबचंद जी, अजित जी एवं श्री कमल जी कासलीवाल परिवार, सेलम हैं।
संयोजक डॉ. महेंद्र कुमार जैन, इंदौर ने जानकारी देते हुए बताया कि यह सम्मान समारोह चतुर्थ पट्टाधीश प्राकृत महोदधि आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित होगा। यह आयोजन भव्य श्रीमज्जिनेद्र पंचकल्याणक जिनबिम्ब प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत संपन्न किया जाएगा।
यह समारोह दिनांक 30 मार्च 2026 को दोपहर 2 बजे सन्मति पार्क में आयोजित होगा, जहां देश-विदेश से आए श्रद्धालु एवं विद्वान इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनेंगे।
यह सम्मान न केवल पं. सुनील प्रसन्न शास्त्री के शोध कार्य की उत्कृष्टता का प्रमाण है, बल्कि जैन दर्शन और संस्कृति के वैश्विक प्रसार में उनके योगदान को भी रेखांकित करता है।












