जैन समाज के लिए प्रेरणा दायक
हम नन्हे मुन्ने बच्चे हैं ।
नादान उम्र के कच्चे हैं ,
पर अपने कर्तव्य के पक्के हैं ,महावीर की जय जय गाएंगे,अहिंसा की ध्वजा फहराएंगे,
अपने मार्ग को कभी न छोडेंगे, अपने प्रण को कभी ना तोड़ेंगे,
जिना गम से नाता जोड़ेंगे, हम सम्मेद शिखर चढ़ जाएंगे,
अहिंसा की ध्वजा फहराएंगे, हम व्यसनों के सगं कभी ना डोलेंगे,
अपनी क्षमता को तोलेंगे,
हम हमारे कर्मों की गांठ खोलेंगे, जैन धर्म की शान बढ़ाएंगे, अहिंसा की ध्वजा फहराएंगे
मा.हर्षिल सेठी (उम्र 10 वर्ष) फोर्थ स्टैंडर्ड जेसस पब्लिक स्कूल बेंगलुरु में अध्यनरत है, वह शैक्षणिक रुचि के साथ-साथ आध्यात्मिक रुचि बहुत रखता है, और अभी हाल ही में नेशनल साइंस ओलंपियाड में भी स्टेट लेवल पर थर्ड स्थान प्राप्त किया है वह जैन धर्म को सीखने का बहुत भाव रखता है, उसने यह कविता स्वयं ने लिखी है और अपने स्कूल में व बेंगलुरु जैन मंदिर में भी सुनाई है,जिसकी बहुत प्रशंसा की गई।।इस प्रकार की प्रेरणा उसको अपने मम्मी पापा श्रीमती प्रतिका जैन व प्रतीक सेठी एवं उनके नाना नानी दीपिका बोहरा एवं प्रमोद कुमार बोहरा( मोटिवेशनल स्पीकर) से मिलती रहती है।
राजाबाबू गोधा जैन गजट संवाददाता राजस्थान












